स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट (संलग्नीकरण) खत्म कर मूल पदस्थापना में भेजने के फैसले के बाद अब हेल्थ कमिश्नर ने यू-टर्न ले लिया है। 3 नवंबर को जारी नए दिशा-निर्देश के तहत अब विशेष परिस्थितियों में अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की स्थानीय व्यवस्था से तैनाती हो सकेगी। अटैचमेंट खत्म होने से अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का मुद्दा दैनिक भास्कर ने उठाया था। नए आदेश में स्थानीय व्यवस्था की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए तय प्रक्रिया अनिवार्य होगी। अस्पताल में डॉक्टर या विशेषज्ञ की जरूरत पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) प्रस्ताव तैयार करेंगे। जिला कलेक्टर जरूरत के कारणों की जांच करेंगे। इसके बाद प्रस्ताव स्वास्थ्य संचालनालय भेजा जाएगा। वहां परीक्षण के बाद स्वास्थ्य आयुक्त की मंजूरी ली जाएगी। स्वीकृति मिलने पर ही तैनाती का आदेश जारी होगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल से होगी। इन विशेषज्ञों की हो सकेगी तैनाती स्त्री रोग, बाल रोग और निश्चेतना विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी गई है। रेडियोलॉजी, नेत्र रोग, शल्य रोग, नाक-कान-गला और अस्थि रोग विशेषज्ञों की कमी पर भी स्थानीय व्यवस्था का प्रस्ताव दिया जा सकेगा। विशेषज्ञ को उसकी मूल संस्था में मरीजों की सेवाएं प्रभावित करके दूसरी जगह नहीं भेजा जाएगा।
इन्हें छूट-जिन अस्पतालों में विशेषज्ञ हैं, लेकिन ऑपरेशन थिएटर, डेंटल चेयर या अन्य सुविधाएं नहीं हैं, वहां उनकी सेवाओं का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ को जरूरत वाली दूसरी संस्था में भेजने की अनुमति मिल सकेगी। अन्य कर्मचारियों का अटैचमेंट नहीं
गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों को स्थानीय व्यवस्था के नाम पर दूसरी संस्था में नहीं भेजा जा सकेगा। चिकित्सा अधिकारी भी सामान्य परिस्थितियों में मूल संस्था में ही काम करेंगे।
