मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। राहुल गांधी पर भाजपा सांसद के ऐसे बोल..
मंदसौर से भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता ने राहुल गांधी की तुलना प्री-मैच्योर जन्म लेने वाले बच्चों से कर दी। उन्होंने कहा- ‘जब व्यक्ति का विकास अपूर्ण रहता है और वह पूर्ण नहीं होता है। प्री-मैच्योर जब जन्म हो जाते हैं न, तो रास्ते चुनना नहीं आते।’ उन्होंने राहुल गांधी की समझ पर सवाल उठाते हुए कहा- ‘मेरा अपना सोचना है कि राहुल देश को नहीं समझे अभी। राहुल समाज तोड़ने में विश्वास करते हैं और सामाजिक विघटन में शायद उन्हें मजा आता होगा।’ दरअसल, भाजपा ने इन दिनों ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान छेड़ रखा है। इसके तहत विपक्षी दल खासकर राहुल गांधी भाजपा नेताओं के निशाने पर हैं। लेकिन सांसद सुधीर गुप्ता ने उन्हें ऐसी उपमा दे दी, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। खरी बात ये है कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और विरोध अपनी जगह हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी नहीं है? आखिर नेताओं की बयानबाजी में भी कुछ मर्यादा तो होनी ही चाहिए। पूर्व विधायक ने इंदिरा गांधी के लिए कहे अपशब्द
श्योपुर में इमरजेंसी की बात करते-करते भाजपा के पूर्व विधायक बाबूलाल मेवरा अपनी भाषा की मर्यादा भूल गए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर दिया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने अपने पद के लिए पूरे देश को जेल बना दिया था। पूर्व विधायक भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस सड़क पर उतर आई। कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कोतवाली थाने के सामने धरना-प्रदर्शन किया और पूर्व विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। दरअसल, भाजपा ने इन दिनों ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान छेड़ रखा है। खरी बात ये है कि राजनीतिक विरोध में भाषा की मर्यादाएं लगातार टूट रही हैं। सवाल है कि सियासत में शब्दों की मर्यादा बचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या भाजपा ने खुद के स्वागत की व्यवस्था की?
जबलपुर में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान जगह-जगह लगे स्वागत मंच चर्चा का विषय बन गए हैं। इन मंचों पर अलग-अलग समाज और संस्थाओं के नाम से लगे बैनरों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि सभी बैनरों की डिजाइन एक जैसी है। प्रिंटिंग का रंग भी एक जैसा है। इतना ही नहीं, सभी पर एक ही संदेश लिखा है- ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का स्वागत, वंदन, अभिनंदन… अब सवाल उठ रहे हैं कि यह महज संयोग है या स्वागत की कोई सोची-समझी व्यवस्था। लोग चुटकी ले रहे हैं कि कहीं यह भाजपा का मैनेजमेंट तो नहीं, जिसमें स्वागत कराने के लिए बैनर भी खुद ही छपवा दिए गए और स्वागत के इंतजाम भी खुद ही कर लिए। और अब अंदर की बात.. मजबूरी में ही सही, साहब ने संभाली कलेक्टरी
एक आईएएस अधिकारी को हाल ही में कलेक्टर बनाकर एक छोटे जिले में पदस्थ किया गया। लेकिन मनमुताबिक जगह पोस्टिंग नहीं मिलने से साहब ने वहां जॉइन करना ही मुनासिब नहीं समझा। इतना ही नहीं, अपनी बात मनवाने के लिए अधिकारी सरकार के दरबार तक भी पहुंच गए। लेकिन वहां जाकर पता चला कि बड़े साहब पहले ही तय कर चुके थे कि उन्हें किस जिले में भेजना है। हुआ भी वही। इसके बाद अधिकारी ने भी सोच लिया कि जब बड़े साहब ने फैसला कर ही लिया है, तो उनसे पंगा लेने में भलाई नहीं। आखिरकार, मजबूरी में ही सही, साहब ने उसी जिले में कलेक्टरी संभाल ली। ये वही अधिकारी हैं जो कुछ समय पहले तक बड़ी-बड़ी डींगें हांक रहे थे। दावा कर रहे थे कि प्रदेश के चार महानगरों में से किसी एक में उनकी कलेक्टरी तय है। खुद को ‘सरकार’ का करीबी भी बता रहे थे। इनपुट सहयोग – बबलू किलोरिया (नीमच), कुलदीप शर्मा (श्योपुर), शिशिर वायपेयी (जबलपुर) ये भी पढ़ें –
कहीं नहीं जाएंगे मोदी… केंद्रीय मंत्री ने गाया गाना: बेटे जयवर्धन का भाषण, गाइड करते रहे दिग्विजय केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जबलपुर में भाजपा की लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ यात्रा में शामिल होने पहुंचे थे। यहां लोगों ने उनसे ‘कहीं नहीं जाएंगे मोदी…’ गीत सुनाने की फरमाइश कर दी। फिर क्या था, उन्होंने मंच से ये तराना छेड़ दिया। पूरी खबर पढ़ें
