दीपावली पर मां लक्ष्मी की आराधना के साथ घर-घर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी पहुंचेगा। करीब पांच साल पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की जगह मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग बढ़ी और अब पिछले दो वर्षों से गाय के गोबर से बनी लक्ष्मी-गणेश की ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं लोगों की पसंद बन रही हैं। पिछले साल तक भोपाल में चार-पांच शिल्पकार करीब 30 से 40 हजार गोबर की प्रतिमाएं तैयार कर रहे थे। इस साल यह उत्पादन 60-70 हजार तक पहुंचने का अनुमान है। अब लोग केवल लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं ही नहीं, बल्कि दीपावली पूजन की पूरी किट भी खरीद रहे हैं। कंपनियां इन्हें अपने कर्मचारियों, परिचितों को दीपावली उपहार के रूप में दे रही हैं। किट में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की छोटी प्रतिमाओं के साथ पांच दीपक, ऊं, स्वस्तिक, शुभ और लाभ के धार्मिक प्रतीक शामिल किए गए हैं। अधिकांश सामग्री प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल है। ऐसी है दीपावली पूजन किट… लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं के साथ पांच दीपक, ऊं, स्वस्तिक और शुभ-लाभ के प्रतीक मूर्तिकार बाेले…दिल्ली और नोएडा से भी गोबर की प्रतिमाओं के ऑर्डर मिले
नीलबड़ के मूर्तिकार हुकुमचंद पाटीदार बताते हैं, कुछ साल पहले गाय के गोबर से गणेश प्रतिमाएं बनाना शुरू किया था। मांग देखते हुए दो साल पहले लक्ष्मीं प्रतिमाएं बनानी शुरू की। इसके लिए गोबर के साथ औषधीय पेड़ों की लकड़ी का बुरादा और चंदन पाउडर जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। पिछले साल से पूरी किट बनानी शुरू कर दी। दिल्ली और नोएडा से भी गोबर की लक्ष्मी प्रतिमाओं के ऑर्डर मिले हैं। छोला रोड क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर तैयार हो रहीं दीपावली पूजन किट
छोला रोड स्थित फूटा मकबरा क्षेत्र के शिल्पकार जितेंद्र राठौर भी तीन-चार वर्षों से गाय के गोबर से लक्ष्मी प्रतिमाओं और विभिन्न धार्मिक कलाकृतियों का निर्माण कर रहे हैं। वे आकर्षक पूजन किट भी तैयार करते हैं। इनमें तीन से पांच इंच की लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाओं के साथ गोबर से बने वंदनवार, ऊं, स्वास्तिक, शुभ और लाभ के प्रतीक शामिल होते हैं। महिलाएं प्रतिमाओं का निर्माण करती हैं। मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग अब भी सबसे ज्यादा, बाहर से भी मंगा रहे
मूर्तिकार अजय प्रजापति के मुताबिक, भोपाल में दीपावली के दौरान लक्ष्मी प्रतिमाओं की कुल मांग डेढ़ से दो लाख तक रहती है। गोबर की प्रतिमाओं का उत्पादन अभी इतना नहीं है। इसलिए मिट्टी की प्रतिमाओं का निर्माण भी बड़े पैमाने पर जारी है। मांग पूरी करने के लिए व्यापारी और मूर्तिकार मथुरा, दिल्ली, बैतूल, अमरावती और देवास से भी प्रतिमाएं मंगा रहे हैं। इस बार प्रतिमाओं की कीमतों में 8-10% वृद्धि होने की संभावना है।
