भोपाल मेट्रो के बहुप्रतीक्षित ब्लू लाइन प्रोजेक्ट का सबसे पेचीदा और आखिरी बचा हुआ काम अब शुरू होने जा रहा है। सुभाष नगर डिपो से मेट्रो ट्रेनों को निकालकर लिली टॉकीज चौराहे के रास्ते पीएचक्यू स्टेशन तक पहुंचाने के लिए चिकलोद रोड पर 1.02 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कनेक्टिंग ट्रैक बिछाया जाना है। इस ट्रैक के निर्माण के लिए चिकलोद रोड के दोनों ओर बने 365 मकानों और दुकानों पर बुलडोजर चलना तय हो गया है। यह मेट्रो के लिए शहर में अब तक की सबसे बड़ी तोड़फोड़ होगी। मेट्रो प्रशासन ने जिला प्रशासन और नगर निगम के साथ मिलकर प्रभावित संपत्तियों का सर्वे पूरा कर लिया है। मेट्रो प्रोजेक्ट के डीपीआर का यह इकलौता ऐसा हिस्सा था, जिसका काम अड़चनों के चलते अब तक शुरू नहीं हो सका था। इसके शुरू होते ही भोपाल मेट्रो के सभी चरणों पर निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ लेगा। ट्रैक के रास्ते में आने वाली संपत्तियों को खाली कराने के लिए नगर निगम ने इलाके में लाउडस्पीकर से मुनादी करवानी शुरू कर दी है। इन 365 संपत्तियों में 78 पूरी तरह व्यावसायिक हैं, जबकि 104 आवासीय सह-व्यवसायिक हैं। फिलहाल इन संपत्तियों में 183 किरायेदार रह रहे हैं। पूरा इलाका काफी घना बसा हुआ है। 200 मकान-दुकान सिंधी कॉलोनी और काजी कैंप के आसपास प्रभावित 191 मकान-दुकान पुल बोगदा से ऐशबाग रूट पर प्रभावित 80 आरा मशीनें हटाई जा रहीं हैं ऐशबाग से भोपाल स्टेशन रूट पर सड़क की बनावट ऐसी… मेट्रो ट्रैक में तीखा मोड़ आ रहा इंजीनियरिंग मैप के मुताबिक, यह ट्रैक जिंसी चौराहा (चेनेज 0+075) से शुरू होकर लिली टॉकीज चौराहा (चेनेज 27+180) तक जाएगा। पूरे स्ट्रेच पर सड़क की इसी बनावट के कारण मेट्रो ट्रैक में तेज मोड़ आ रहा है। यही वजह है कि इतनी बड़ी संख्या में निर्माण तोड़ने की जरूरत पड़ रही है। चेनेज नंबर से पता चलती है सटीक लोकेशन मेट्रो के नक्शे में हर पिलर किस सटीक जगह पर बनेगा, मोड़ कहां से शुरू कहां खत्म होगा, इंजीनियर यह तय करने के लिए चेनेज का इस्तेमाल करते हैं। सड़क, रेलवे या मेट्रो ट्रैक के मैप में हर मोड़, पिलर या चौराहे का पता बताने के लिए किमी के पत्थरों की तरह चेनेज नंबर का इस्तेमाल किया जाता है। इससे इंजीनियरों को इंच-दर-इंच सटीक लोकेशन पता चल जाती है।
अलाइनमेंट में जरा सा बदलाव भी मुमकिन नहीं जानकारों के मुताबिक मेट्रो ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के चलते इस अलाइनमेंट में मामूली बदलाव भी संभव नहीं है। एलिवेटेड पिलर और ट्रैक तैयार करने के लिए कम से कम 22 मीटर का राइट ऑफ वर्क (आरओडब्ल्यू) चाहिए, जबकि मौके पर सड़क की चौड़ाई 10 से 11 मीटर ही है। 11-12 मीटर की कमी पूरी करने के लिए सड़क के दोनों किनारों की संपत्तियों को हटाना जरूरी है। इसलिए जरूरी है कनेक्टिंग ट्रैक… कब्रिस्तान विवाद: वक्फ ट्रिब्यूनल में मामला
इधर, बड़ा बाग के पास शाही कब्रिस्तान को लेकर मेट्रो प्रबंधन और मुस्लिम पक्ष के बीच जारी विवाद अभी सुलझा नहीं है। ऑरेंज लाइन के फेज-2 के तहत अंडरग्राउंड मेट्रो रूट शाही कब्रिस्तान के नीचे से निकलना है। फिलहाल मामला मप्र राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है, जिससे इस हिस्से में काम अटका हुआ है। संपत्तियां खाली होते ही शुरू करेंगे काम
सुभाष नगर डिपो से लिली टॉकीज चौराहे तक 1.02 किमी लंबा कनेक्टिंग ट्रैक बनाया जाना है। भोपाल कलेक्टर के जरिए अब तक 108 प्रभावितों को मुआवजे का भुगतान किया जा चुका है। संपत्तियां खाली होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। – एस. कृष्णा चैतन्य, एमडी, मप्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन
