हादसे शरीर को चोट पहुंचा सकते हैं, पर हौसले को नहीं तोड़ सकते। मप्र के दो पैरा-खिलाड़ियों कपिल परमार और अब्दुल कादिर इंदौरी की कहानी इसी जोश और जज्बे का प्रतीक है। बचपन में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कपिल ने आंखों की 80% रोशनी गंवा दी और 6 महीने कोमा में रहे, वहीं अब्दुल को महज 7 साल की उम्र में दोनों हाथ खोने पड़े। इन भयानक हादसों के बावजूद दोनों ने हार नहीं मानी। खेल को ही जुनून बना लिया। हाल में जापान में हुए पैरा एशियन गेम्स में कपिल ने जूडो में कांस्य पदक जीता, जबकि अब्दुल ने तैराकी की दो स्पर्धाओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। कपिल : खेत में पानी दे रहे थे, तभी टूटकर गिरी बिजली लाइन सीहोर जिले के मुरली गांव के रहने वाले कपिल 2009 में खेत में पानी दे रहे थे। तभी आंधी से हाईटेंशन लाइन टूटी और कपिल गंभीर रूप से घायल हो गए। छह महीने कोमा में रहे और आंखों की 80% प्रतिशत रोशनी चली गई। हाथ-पैर की उंगलियों की सक्रियता भी प्रभावित हुई। ऐसा आघात सहने के बाद भी कपिल ने हार नहीं मानी। उन्होंने वर्ष 2017 में जूडो शुरू किया। 2019 में बर्मिंघम में कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। 2022 के एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। जापान में हुए पैरा एशियन गेम्स में भी उन्होंने जूडो में ब्रॉन्ज मेडल जीता। कपिल के पिता टैक्सी चलाते हैं। अब्दुल : 7 साल की उम्र में हादसा, फिर तैराकी को बनाया सहारा रतलाम के अब्दुल कादिर वर्ष 2014 में जब दूसरी कक्षा में थे, भोपाल में अपनी मौसी के घर आए थे। छत पर खेलते हुए हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए। दोनों हाथ काटने पड़े। फिर भी एक साल बाद उन्होंने तैराकी शुरू कर दी। अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 23 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। जापान में हुए पैरा एशियन गेम्स में अब्दुल ने पुरुषों की 50 मीटर बैकस्ट्रोक एस-5 और 50 मीटर बटरफ्लाई एस-5 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में उनकी पांचवीं रैंक रही। इससे पहले उन्होंने 2025 में दुबई में हुए एशिया न्यू पैरागेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे सिंगापुर में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भी क्वालिफाई कर चुके हैं।
