ऑर्गेनिक रंगों के इस्तेमाल, पीओपी पर रोक और गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए तमाम इंतजामों के बावजूद भोपाल की झीलों और जलाशयों के पानी की गुणवत्ता में बदलाव सामने आया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के सभी प्रमुख विसर्जन घाटों पर पानी में जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) और घुले ठोस पदार्थों (टीडीएस) की मात्रा बढ़ी है। वहीं, पानी में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) कम हुई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विसर्जन के तीन दिन पहले, विसर्जन के दौरान और विसर्जन के तीन दिन बाद एक ही स्थान से पानी के नमूने लिए थे। इसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सबसे ज्यादा बदलाव हथाईखेड़ा डैम और शाहपुरा झील में दर्ज हुआ। हथाईखेड़ा में जैविक प्रदूषण बढ़ने के संकेत मिले हैं, जबकि शाहपुरा में पानी में घुले ठोस पदार्थों की मात्रा तेजी से बढ़ी है। सभी घाटों पर पानी की गुणवत्ता के मानकों में बदलाव हुआ। जलाशयों पर संकट… हथाईखेड़ा में बीओडी में दोगुने से अधिक बढ़ा, सभी जगह घुलित ऑक्सीजन घटी बीओडी बढ़ने और ऑक्सीजन घटने का क्या मतलब? बीओडी पानी में जैविक पदार्थों को विघटित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा बताती है। इसका बढ़ना जैविक प्रदूषण के दबाव में वृद्धि का संकेत है। वहीं, पानी में घुलित ऑक्सीजन मछलियों और दूसरे जलीय जीवों के लिए जरूरी होती है। इसकी कमी जलीय जीवन के लिए प्रतिकूल हो सकती है। हालांकि, विसर्जन के बाद की जांच में सभी घाटों पर घुलित ऑक्सीजन का स्तर पांच मिलीग्राम प्रति लीटर या उससे अधिक दर्ज हुआ। रिपोर्ट में भारी धातुओं और बैक्टीरिया की जांच के आंकड़े शामिल नहीं हैं। इसलिए उपलब्ध नतीजों से पानी की गुणवत्ता में बदलाव तो सामने आता है, लेकिन प्रदूषण की पूरी स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। हथाईखेड़ा : बीओडी सबसे ज्यादा बढ़ा… हथाईखेड़ा डैम में विसर्जन के बाद बीओडी में सभी घाटों के मुकाबले सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज हुई। विसर्जन के दौरान भी इसमें वृद्धि हुई थी, लेकिन बाद की जांच में यह और बढ़ गई। बीओडी बढ़ने का मतलब है कि पानी में मौजूद जैविक पदार्थों को विघटित करने के लिए सूक्ष्म जीवों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। यहां टीडीएस में मामूली बढ़ा, घुलित ऑक्सीजन और पीएच घटे। खटलापुरा : ऑक्सीजन घटी… खटलापुरा घाट पर भी विसर्जन के बाद पानी की गुणवत्ता में बदलाव मिला। यहां बीओडी में वृद्धि हुई। पानी में घुले ठोस पदार्थों की मात्रा भी बढ़ गई। इसके विपरीत घुलित ऑक्सीजन में गिरावट दर्ज हुई। पीएच भी पहले की तुलना में कम मिला। यानी यहां जांचे गए चारों मानकों में बदलाव सामने आया। प्रेमपुरा : घुले ठोस पदार्थ बढ़े… प्रेमपुरा घाट पर बीओडी में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी हुई, लेकिन टीडीएस में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की गई। पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर भी घटा। पीएच में भी कमी मिली। इस घाट पर पानी में घुले पदार्थों और ऑक्सीजन के स्तर में बदलाव अधिक उल्लेखनीय रहा। शाहपुरा : टीडीएस सबसे ज्यादा बढ़ा… पानी में घुले ठोस पदार्थों की मात्रा में सभी घाटों से अधिक वृद्धि दर्ज हुई। यहां घुलित ऑक्सीजन में भी सबसे ज्यादा गिरावट मिली। बीओडी बढ़ा और पीएच कम हुआ। टीडीएस करीब 86 फीसदी तक बढ़ा। आरकेएमपी : ऑक्सीजन मामूली घटी… रानी कमलापति घाट पर भी विसर्जन के बाद बीओडी और टीडीएस बढ़े। हालांकि, यहां घुलित ऑक्सीजन में अन्य घाटों की तुलना में कम गिरावट हुई। पीएच में भी मामूली कमी दर्ज की गई।
