शहर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद से बिजली उपभोक्ताओं की परेशानियां कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही हैं। कंपनी द्वारा उपभोक्ता हित के तमाम दावों के विपरीत अब छोटे-छोटे बकाया (100 से 200 रु.) पर भी बिना किसी लिखित सूचना के बिजली सप्लाई काट दी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि उपभोक्ताओं की पर्याप्त सुरक्षा निधि जमा होने के बावजूद मामूली देरी पर भारी-भरकम पेनल्टी और 340 रु. तक का अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे आम जनता में बिजली कंपनी के खिलाफ आक्रोश है।
197 रुपए नहीं भरे तो 542 रुपए जमा कराए
केस- 1 दयानंद वार्ड निवासी अनीता भटनागर को 197 रुपए का बिल आया । अंतिम तारीख तक जमा न करने पर राशि बढ़कर 202 रुपए हो गई। बिजली कंपनी ने सप्लाई बंद की , इसके बाद उन्हें 542 रु. का भुगतान करना पड़ा।
केस-2 लाजपतपुरा वार्ड में रहने वाले काशीराम लारिया को बिजली कंपनी ने 1532 रुपए का बिल जारी किया। अंतिम तारीख पर जमा न करने पर राशि 1551 रुपए हो गई। इसके बाद कंपनी ने उनकी सप्लाई बंद कर दी और जब उपभोक्ता राशि जमा करने पहुंचे तो पेनाल्टी के अलावा सप्लाई चालू करने के नाम पर 340 रुपए जोड़कर राशि जमा कराई गई। केस- 3 विवेकानंद वार्ड निवासी मनोहर लाल साहू को 1597 रु. का बिल जारी किया, जो पेनाल्टी के बाद 1617 रु. हो गया, लेकिन सप्लाई बंद होने के बाद जब वह बिजली कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो उनसे 1957 रुपए जमा कराए गए। इसके बाद सप्लाई बहाल की गई। बकाया न होने पर भी सप्लाई बंद की, उसके भी 340 वसूले मोहन नगर वार्ड निवासी संजय नन्होरिया ने बताया कि उनका करीब 2500 रुपए बिल बकाया था। अंतिम तारीख निकलने के बाद रक्षाबंधन के दिन घर की बिजली बंद कर दी। उन्होंने राशि जमा की और सप्लाई बहाल कर दी गई, लेकिन दो दिन बाद कंपनी ने दोबारा सप्लाई बंद कर दी। उपभोक्ता का कहना है कि उनसे दोनों बार सप्लाई चालू कराने के नाम पर 340-340 रुपए लिए गए। सुरक्षा निधि जमा फिर भी सख्ती बिजली कंपनी बकाया बिलों के जोखिम से बचने के लिए उपभोक्ताओं से सुरक्षा निधि जमा कराती है। यदि उपभोक्ता बकाया बिल की राशि जमा न करे तो कंपनी सुरक्षा निधि से उसकी वसूली कर सकती है। शहर में हर उपभोक्ता की लगभग 2 से 2.50 हजार रुपए सुरक्षा निधि कंपनी के पास जमा है। इसके बाद भी कंपनी मामूली राशि बकाया होने पर भी उपभोक्ताओं की सप्लाई बंद कर परेशान कर रही है। उपभोक्ता हित के दावे फेल बिजली कंपनी ने 2024 में जब शहर में स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत की थी, तो इसे उपभोक्ता हितैषी बता रहे थे। दावा किया जा रहा था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, ऑटोमेटिक रीडिंग होने से गलत बिल जारी नहीं होंगे। लेकिन स्थिति यह है कि आमजन स्मार्ट मीटर लगने के बाद परेशान ही हुए हैं। शुरूआत से ही ज्यादा बिजली बिल, गलत बिजली बिल, मीटर जंप जैसी हजारों शिकायतें हुई हैं। पहले 5 हजार से ऊपर के बकायादार टारगेट होते थे शहर में पहले 5 हजार रु. से ज्यादा बकाया होने पर सप्लाई बंद करते थे। स्मार्ट मीटर लगने के बाद इसे घटाकर 2 हजार रु. कर दिया। अब तो 100-200 रु. बकाया होने पर भी सप्लाई बंद कर रहे हैं। पहले कर्मचारियों को खंभे से सप्लाई काटनी पड़ती थी और जोड़ने पर 200 रु. अतिरिक्त शुल्क लेते थे, लेकिन अब स्मार्ट मीटर लगे तो आॅफिस में बैठे-बैठे सप्लाई बंद कर रहे हैं। फिर भी शुल्क 340 रुपए कर दिया गया है। भास्कर एक्सपर्ट – एड. पवन नन्होरिया 15 दिन का लिखित नोटिस जरूरी विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 56(1) के अनुसार बिजली कंपनी बकाया राशि का भुगतान न होने पर उपभोक्ता की बिजली सप्लाई बंद कर सकती है, लेकिन विद्युत अधिनियम में इसको लेकर स्पष्ट प्रावधान है कि कंपनी को कनेक्शन काटने या अस्थायी रूप से सप्लाई बंद करने के पहले कम से कम 15 दिन का लिखित नोटिस उपभोक्ता को देना अनिवार्य है। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि उपभोक्ता बकाया राशि जमा नहीं करता है तो बिजली कंपनी कनेक्शन काट सकती है। 2-3 हजार की सप्लाई बंद होती हैं लोग 100-100 रुपए भी जमा नहीं करते और बाद में बकाया राशि हजारों में हो जाती है। ऐसा न हो इसलिए अब अंतिम तारीख तक बकाया न जमा करने वाले करीब ढाई-तीन हजार उपभोक्ताओं की सप्लाई बंद करनी पड़ती है। जिनका बिल 500 या उससे कम हो उनकी पेनाल्टी पहली बार माफ भी करा देते हैं।
– सुभाष राय, कार्यपालन अभियंता, शहर
