मध्य प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में ‘नाम’ के फेर में सूबे के नियोजित विकास का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट अटक गया है। इंदौर और उज्जैन समेत 6 जिलों को मिलाकर बनने वाले ‘मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी’ के नाम और मुख्यालय को लेकर ऐसी खींचतान छिड़ी है कि 4 महीने से अथॉरिटी का प्रशासनिक ढांचा ही खड़ा नहीं हो पाया है। इस खींचतान में भोपाल मेट्रोपॉलिटन का काम की रफ्तार भी सुस्त हो गई है। पढ़िए रिपोर्ट… आईएमआर से यूआईएमआर: नाम बदलने पर क्यों छिड़ी जंग? शुरुआत में इस प्रोजेक्ट का नाम ‘इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन’ (IUMR) प्रस्तावित था, जिसे 30 अप्रैल 2026 को अंतिम प्लान के दौरान अफसरों ने बदलकर ‘उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन’ (UIMR) कर दिया। बिना कोई ठोस वजह बताए किए गए इस बदलाव ने सियासी पारे को चढ़ा दिया है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय चाहते हैं कि नाम में ‘इंदौर’ पहले आए। 20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखी चिट्ठी में उन्होंने साफ कहा-‘इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र है और मेट्रोपॉलिटन रीजन की हर चर्चा इंदौर केंद्रित रही है। इस पूरे रीजन में इंदौर का हिस्सा शत-प्रतिशत (100%) है, जबकि उज्जैन का हिस्सा करीब 59 प्रतिशत है। ऐसे में नाम ‘इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन’ ही होना चाहिए।’ मुख्यालय कहां बने? सांसद भी उतरे मैदान में नाम के साथ-साथ अथॉरिटी के मुख्यालय को लेकर भी मोर्चा खुला है। इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने जून के महीने में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुख्यालय इंदौर में स्थापित करने की पुरजोर वकालत की। लालवानी ने अपने पत्र में 7 प्रमुख तर्क दिए। खींचतान का असर: 500 पदों की भर्ती और 15 साल का मास्टर प्लान अटका जून 2026 में उज्जैन-इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की सीमाओं की अधिसूचना जारी हुई थी। इसके बाद जुलाई 2026 में नगरीय विकास विभाग ने अथॉरिटी के संचालन के लिए करीब 500 अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रशासनिक ढांचा मंजूरी के लिए भेजा। चार महीने बीत जाने के बाद भी फाइल मंत्री और विभाग के बीच झूल रही है। एक विवाद का दोहरा असर: भोपाल मेट्रोपॉलिटन पर भी ब्रेक मालवा की इस राजनीतिक खींचतान का खामियाजा भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन को भी भुगतना पड़ रहा है। अप्रैल 2026 में अधिसूचित भोपाल रीजन (12,095 वर्ग किमी, 6 जिले, 2,523 गांव) का काम भी इंदौर-उज्जैन की फाइल अटकने के कारण धीमा पड़ गया है। कुल मिलाकर 28 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल और 5,300 से अधिक गांवों के विकास की योजना कागजों में बंद है। हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती: 74वें संशोधन के उल्लंघन का आरोप अथॉरिटी अभी प्रशासनिक खींचतान से उबर भी नहीं पाई थी कि मामला अदालत पहुंच गया। हाईकोर्ट में अधिवक्ता अक्षय पहाड़िया ने जनहित याचिका (PIL) दायर कर UIMR के गठन को चुनौती दी है। याचिका में दो मुख्य आपत्तियां जताई गई हैं। कैलाश विजयवर्गीय और अफसरों के बीच पहले भी रहे मतभेद नगरीय विकास मंत्री और प्रशासनिक अफसरों के बीच तल्खी का यह पहला मामला नहीं है। एक्सपर्ट बोले- नाम से ज्यादा प्रशासनिक नियंत्रण का विवाद वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता का कहना है कि-“जिस तेजी से सरकार ने मेट्रोपॉलिटन रीजन का नोटिफिकेशन जारी किया था, उसके सेटअप का काम भी उसी तेजी से होना चाहिए। मंत्री चाहते होंगे कि उनके क्षेत्र को तवज्जो मिले, मगर आखिरकार फैसला सरकार को लेना है। उनका कहना है कि ये नाम से ज्यादा प्रशासनिक अधिकार का विवाद ज्यादा दिखाई देता है। जिस शहर में अथॉरिटी का मुख्यालय होगा उसके जनप्रतनिधियों का फैसले लेने में अपर हैंड होगा।
