पटना स्नातक सीट से JDU के नीरज कुमार ने शानदार जीत दर्ज की है। अपने प्रत्याशी अनुज सिंह की हार के बाद मोकामा विधायक अनंत सिंह ने नया खुलासा किया है। उन्होंने कहा, ‘दुलारचंद हत्याकांड में नीरज मुझे जेल भिजवाने की कोशिश कर रहे थे। इसलिए विरोध किया।’ अनंत सिंह के दावों की सच्चाई क्या है, नीरज के साथ लड़ाई कैसे शुरू हुई, उनकी विधायकी का क्या होगा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। पहले जानिए, सुप्रीम कोर्ट में दुलारचंद हत्याकांड का पूरा मामला क्या है? दरअसल, 30 अक्टूबर 2025 को दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी। इसमें 2 नवंबर 2025 को पटना पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत दे दी। जमानत देते हुए पटना हाईकोर्ट ने कहा था, ‘पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार कठोर और कुंद वस्तु से फेफड़ों तथा हार्ट (दिल) को कुचलने के कारण हाइपोवोलेमिक शॉक हुआ, जिससे हार्ट और श्वसन तंत्र (सांस लेने की प्रणाली) ने काम करना बंद कर दिया। दुलारचंद की मौत का कारण गोली लगना नहीं था।’ हाईकोर्ट ने कहा था, ‘अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज पहले के आपराधिक मामलों और हिरासत में बिताई गई अवधि पर भी विचार किया। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अनंत सिंह को जमानत दी जाती है।’ क्या अनंत सिंह को जेल भिजवाने के पीछे लगे हैं नीरज कुमार? साफ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन नीरज कुमार की दिल्ली दौरे की चर्चा जोरों पर हैं। आधिकारिक नहीं, अंदरखाने की चर्चा की मानें तो जुलाई-अगस्त के बीच नीरज कुमार दिल्ली दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा सांसद और एक पूर्व मंत्री से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद अनंत सिंह को एक कॉल आया। उधर से कहा गया- ‘छोटे सरकार’ आपको जेल भिजवाने की प्लानिंग चल रही है। इस सूचना के बाद अनंत सिंह भड़क गए और तब उन्होंने MLC चुनाव में नीरज कुमार को सबक सिखाने की ठान ली। हार के बाद अनंत सिंह ने कहा, ‘जनता ने मुझे जो वोट दिया, वह बहुत है। बिहार की जनता हमारे साथ खड़ी है। विधान परिषद चुनाव के दौरान हमें वोटर बनवाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला था। जिस तरह से हमारे खिलाफ राजनीतिक परिस्थितियां बनाई गईं, उसी को ध्यान में रखते हुए हमने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था।’ पार्टी, बंगला छिना, क्या अब विधायकी भी जाएगी? वोटिंग के अगले दिन 24 अक्टूबर को JDU ने पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने के आरोप में मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया। साथ ही अनंत सिंह की विधानसभा की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश कर दी। 25 अक्टूबर को JDU के कहने पर सम्राट सरकार ने नीलम देवी को 20 सूत्री के सदस्य पद से हटा दिया। और सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दे दिया। 26 अक्टूबर को बिहार JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा कार्यालय जाकर अनंत सिंह के खिलाफ 10 पन्नों का सबूत जमा किया और विधायकी खत्म करने की फिर से सिफारिश की। अब अनंत सिंह की विधायकी पर फैसला लेने का पूरा मामला BJP के पाले में है। क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार हैं। 28 अक्टूबर को दिल्ली से पटना पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा, ‘उमेश कुशवाहा का पत्र मिला है। अनंत सिंह की सदस्यता मामले के डॉक्युमेंट की समीक्षा कर रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई नियमनुसार की जाएगी।’ फिलहाल BJP के पास 2 विकल्प हैं। इसे विस्तार से समझिए… 1. JDU का प्रेशर है तो BJP खत्म करेगी विधायकी पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘बिहार सरकार में JDU मुख्य सहयोगी पार्टी है। अगर पार्टी ने BJP पर प्रेशर बनाया तो विधानसभा अध्यक्ष को जल्दी फैसला लेना होगा।’ 2. BJP अपनी पॉलिटिक्स करेगी तो अनंत सिंह की बची रहेगी विधायकी इस वक्त बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री है। उम्मीद है कि अब वह कभी भी अपने सहयोगी पार्टियों को मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं देगी। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा अंदर ही अंदर अपने दम पर राजनीति करने की तैयारी में जुट गई है। वह जान चुकी है कि नीतीश कुमार के जाने के बाद JDU ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है। इसलिए सरकार से लेकर पार्टी के निर्णय वह अपनी दूरगामी रणनीति के तहत ले रही है। भाजपा बांकीपुर के अपने 30 साल पुराने गढ़ को उपचुनाव में गंवा चुकी है। अब पटना शिक्षक सीट पर भी 30 साल से चुनाव जीतते आ रहे भाजपा के नवल किशोर यादव हार गए हैं। यह पार्टी के लिए बड़ा झटका है। दोनों सीटों पर पार्टी की हार का मुख्य कारण भूमिहार वोटरों का छिटकना बताया जा रहा है।
