बंगाल की खाड़ी में बना अर्नब चक्रवात बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा। अनुमान है कि यह 2014 के हुदहुद के बाद इस इलाके का सबसे ताकतवर तूफान हो सकता है। अर्नब मध्य प्रदेश में तूफान लेकर आएगा। कुछ जिलों में एक दिन में 4.5 इंच से ज्यादा पानी गिरने का अलर्ट है, जबकि पूरे देश में पूरे अक्टूबर की सामान्य बारिश करीब 3 इंच होती है। सबसे ज्यादा असर 29 अक्टूबर को रहेगा, जिस दिन करवा चौथ है। 1000 किमी दूर टकराने वाला तूफान MP में कैसे बरसेगा, किन जिलों में कितना खतरा है और किसानों को क्या करना चाहिए; समझते हैं आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: समुद्र में उठा ‘अर्नब’ मध्य प्रदेश का मौसम कैसे बदल सकता है? जवाब: अर्नब 2026 में बंगाल की खाड़ी में बना पहला चक्रवात है। IMD के मुताबिक यह अभी ‘अति प्रचंड चक्रवाती तूफान’ है और 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश में बापटला और विशाखापट्टनम के बीच तट पार करेगा। उस वक्त हवा की रफ्तार 115-125 किमी/घंटा रहेगी, जो झोंकों में 140 किमी/घंटा तक जा सकती है। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अर्नब 2014 के हुदहुद के बाद इस इलाके का सबसे ताकतवर तूफान हो सकता है। आंध्र तट के पास 12 से 20 इंच तक बारिश और 3 से 5 फीट ऊंची लहरों का अनुमान है। तट पार करने के बाद क्या होगा, इसे तीन कदमों में समझिए… 1. ताकत घटेगी, नमी नहीं: चक्रवात को ताकत समुद्र के गर्म पानी से मिलती है। जमीन पर आते ही यह ईंधन बंद हो जाता है और हवाएं कमजोर पड़ने लगती हैं। लेकिन सैकड़ों किलोमीटर में फैले इसके बादल समुद्र से खींची हुई भारी नमी साथ लेकर चलते हैं। 2. उत्तर की ओर मुड़ेगा: भोपाल मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अरुण शर्मा बताते हैं, ‘जमीन पर जाने के बाद यह मुड़ेगा और लगभग सीधा उत्तर की ओर चलेगा। 29-30 अक्टूबर को यह डिप्रेशन (कम दबाव के क्षेत्र) के रूप में रीवा और शहडोल के पूर्वी छोर से गुजरता हुआ आगे बढ़ेगा।’ 3. रास्ते में बरसेगा: MP तक पहुंचते-पहुंचते 140 किमी/घंटा की हवाएं 40-50 किमी/घंटा पर आ जाएंगी, लेकिन बादलों में जमा नमी पूर्वी जिलों में बरसेगी। असर शुरू भी हो चुका है। अरुण शर्मा के मुताबिक मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, शहडोल, सीधी और सिंगरौली में हल्की गरज-चमक और बूंदाबांदी शुरू हो गई है। सवाल 2: MP के किन जिलों में बारिश होगी, कितनी तेज होगी और ठंड कितनी बढ़ेगी? जवाब: बारिश का असर पूर्व से पश्चिम की ओर घटता जाएगा। किन जिलों में कौन-सा अलर्ट ऑरेंज अलर्ट (अति भारी बारिश): सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट भारी बारिश: जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, कटनी, दमोह, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा बूंदाबांदी: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर समेत बाकी करीब 35 जिले IMD के पैमाने पर 24 घंटे में करीब 2.5 से 4.5 इंच पानी ‘भारी बारिश’ है, और 4.5 से 8 इंच ‘अति भारी’। इसके साथ 40-50 किमी/घंटा की हवाएं चलेंगी, जो झोंकों में 60 किमी/घंटा तक जा सकती हैं। इसे ऐसे समझिए कि जबलपुर में अक्टूबर में 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 5 इंच है, जो 4 अक्टूबर 1977 को बना था। ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में एक ही दिन में करीब उतनी बारिश का अनुमान है। ठंड कितनी बढ़ेगी: MP में असर हल्का रहेगा। अरुण शर्मा के मुताबिक तापमान 1 से 2 डिग्री गिरेगा, और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे जाने की संभावना नहीं है। पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री और शाजापुर में 13.9 डिग्री दर्ज हुआ है। करवा चौथ पर असर: सबसे ज्यादा बारिश 29 अक्टूबर को है, इसलिए पूर्वी MP में बादलों के कारण चांद दिखना मुश्किल हो सकता है। सवाल 3: बेमौसम बारिश से खड़ी फसल और कटाई कर चुके किसानों को कितना नुकसान हो सकता है? जवाब: इस बारिश की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह ठीक MP के धान बेल्ट पर गिरेगी। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस खरीफ सीजन में प्रदेश में करीब 25.5 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया था, और सबसे ज्यादा धान बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, शहडोल और अनूपपुर में होता है। यही जिले इस बार ऑरेंज अलर्ट में हैं, और यहां इस वक्त धान की कटाई चल रही है। नुकसान कैसे होता है खड़ी पकी फसल: तेज हवा से पौधे खेत में बिछ जाते हैं, और पकी बालियों से दाने झड़ने लगते हैं। कटी फसल: खेत या खलिहान में पड़ा धान भीगने पर दाने काले पड़ जाते हैं और अंकुरित होने लगते हैं। ऐसे धान का मंडी में भाव गिर जाता है। मक्का: छिंदवाड़ा और सिवनी मक्का के बड़े इलाके हैं, और दोनों भारी बारिश की चेतावनी में हैं। कटी मक्का भीगने पर उसमें फफूंद का खतरा रहता है। रबी की बुवाई: जिन खेतों में पानी भरेगा, वहां चना, गेहूं और मसूर की बुवाई कुछ दिन टल सकती है। पश्चिमी MP को कम खतरा: प्रदेश की सबसे बड़ी फसल सोयाबीन (करीब 51 लाख हेक्टेयर) मालवा-निमाड़ में होती है, जहां सिर्फ बूंदाबांदी का अनुमान है। किसान क्या करें: मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा की सलाह है… नुकसान हो जाए तो बीमा है तो: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नुकसान की सूचना 72 घंटे के अंदर टोल-फ्री नंबर 14447 पर देनी होती है। बीमा नहीं है तो: राज्य के राजस्व नियमों (RBC 6-4) के तहत पटवारी सर्वे के बाद राहत राशि मिलती है। इसके लिए नुकसान की जानकारी तहसील में देनी होती है। सवाल 4: चक्रवात कमजोर पड़ने के बाद भी MP में कई दिन तक बारिश क्यों हो सकती है? जवाब: इसकी तीन वजहें हैं… 1. कमजोर होने का मतलब सूखा होना नहीं: चक्रवात की ताकत हवा की रफ्तार से नापी जाती है, बारिश की मात्रा से नहीं। जमीन पर आकर हवाएं कमजोर हो जाती हैं, लेकिन बादलों में समुद्र से खींची हुई नमी कई दिन तक बनी रहती है। 2. धीमी चाल: कमजोर पड़ा सिस्टम धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, इसलिए एक ही इलाके पर ज्यादा देर रुककर बरसता है। अरुण शर्मा के मुताबिक अर्नब 29-30 अक्टूबर के दौरान डिप्रेशन के रूप में MP के पूर्वी हिस्से से गुजरेगा, और 31 अक्टूबर तक इसका असर रहेगा। 3. पहले से गीली जमीन: इस मानसून में पूर्वी MP में औसत से 4% ज्यादा बारिश हुई है। पिछले एक हफ्ते में भी कई जिलों में बारिश हुई है। गीली जमीन पर पानी जल्दी जमता है, और यही नमी नए बादल बनने में मदद करती है। सवाल 5: क्या पहले भी दूर उठे चक्रवातों ने MP का मौसम बिगाड़ा है, इस बार क्या अलग होगा? जवाब: हां, कई बार। 1. हुदहुद, अक्टूबर 2014: यह 12 अक्टूबर 2014 को विशाखापट्टनम के पास टकराया था। जमीन पर आकर यह तेजी से कमजोर हुआ और डिप्रेशन बनकर छत्तीसगढ़ होते हुए उत्तर की ओर बढ़ा। तब पूर्वी MP में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी हुआ था। अर्नब की तुलना इसी तूफान से की जा रही है। 2. मोंथा, अक्टूबर 2025: ठीक एक साल पहले, 28 अक्टूबर 2025 को, यह आंध्र के काकीनाडा के पास इसी तट से टकराया था। कमजोर होकर यह डिप्रेशन बना और 29-30 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ से पूर्वी MP की ओर बढ़ा। उत्तर-पूर्वी MP और उत्तरी छत्तीसगढ़ में दो दिन भारी बारिश हुई। उसी समय अरब सागर में भी एक डिप्रेशन बना हुआ था, और दोनों सिस्टम के बीच की कम दबाव की पट्टी ने बारिश का दायरा बढ़ा दिया। ग्वालियर संभाग में कटकर खेतों में पड़ा धान भीग गया, और कई किसानों ने पूरी फसल खराब होने की बात कही। 3. सितंबर 2026 का डिप्रेशन: अरुण शर्मा के मुताबिक मानसून के आखिरी हफ्ते में बंगाल की खाड़ी से उठा एक डिप्रेशन भी पूर्वी MP से होता हुआ यूपी की ओर गया था। तब करीब 47 जगह भारी और 19 जगह अति भारी बारिश दर्ज हुई थी। अर्नब से भी उसी तरह के असर की उम्मीद है। तट पर अर्नब, मोंथा से ज्यादा ताकतवर है, लेकिन MP पहुंचने तक तीनों तूफान डिप्रेशन बन गए। इसलिए यहां तेज हवा के मुकाबले लगातार बारिश, धान की फसल पर असर और बिजली गिरने का खतरा ज्यादा अहम है। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें… क्या आसाराम की जान को खतरा है:इलाज के लिए उज्जैन ही क्यों चुना नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में ‘अंतिम सांस तक’ उम्रकैद काट रहा 85 साल का आसाराम इन दिनों उज्जैन में हैं। बुधवार को उसने सरकारी धन्वंतरि आयुर्वेदिक अस्पताल में परामर्श लिया और गुरुवार को पंचकर्म कराया, लेकिन शुक्रवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल नहीं पहुंचा। आसाराम की पैरोल 26 अक्टूबर को खत्म हो रही है…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
