हरदा में 22 अक्टूबर को जिला अस्पताल के पास नाली किनारे मिली नवजात के मामले में नया मोड़ आ गया है। बच्ची को जन्म देने के कुछ घंटों बाद बेसहारा छोड़ने वाली मां ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया है। इसके बाद नवजात को अपनाने के लिए कई परिवार आगे आ रहे हैं। इनमें एक ऐसे शिक्षक भी हैं, जिन्हें शादी के 19 साल बाद भी संतान सुख नहीं मिला। पुलिस ने बताया, बच्ची को जन्म देने वाली उसकी मां की काउंसलिंग तक करवाई, लेकिन वे उसे अपनाना नहीं चाहते। अब बच्ची के सुरक्षित भविष्य और उसे कानूनी रूप से गोद देने की प्रक्रिया पर बाल कल्याण समिति (CWC) फैसला करेगी। देखें तीन तस्वीरें… माता-पिता दोनों अलग धर्म के
22 अक्टूबर को जिला अस्पताल से करीब 100 मीटर दूर चौक के पास नाली किनारे नवजात की किलकारी सुनाई दी।। स्थानीय लोगों ने देखा, तो वहां खड़ी दो बाइक की आड़ एक नवजात थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने नवजात को जिला अस्पताल पहुंचाया। सीसीटीवी की जांच में सामने आया कि जन्म देने वाली युवती और उसकी मां ही उसे वहां छोड़ गए थे। दोनों को 24 घंटे के भीतर तलाश लिया गया। पूछताछ में युवती ने बताया कि मजदूरी के दौरान वह एक युवक के संपर्क में आई थी। दोनों के धर्म अलग हैं। युवती की सगाई हो चुकी थी। डर था कि यह बात सामने आने पर संबंध टूट सकता है। इसी वजह से बच्ची को अस्पताल के पास छोड़ दिया। एसडीओपी शालिनी परस्ते के मुताबिक, दोनों को जमानत पर छोड़ दिया गया है। कई परिवार बच्ची को अपनाने आगे आए
बच्ची के मिलने की खबर सामने आने के बाद कई परिवारों ने उसे गोद लेने की इच्छा जताई। लोग पुलिस और मीडिया से संपर्क कर कानूनी प्रक्रिया की जानकारी ले रहे हैं। इन्हीं में एक ग्राम देवतलाब के रहने वाले प्रवीण बछान हैं। वे ग्राम करनपुरा के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक हैं। उनका कहना है कि मैं इस बच्ची को अपनी बेटी बनाकर घर लाना चाहता हूं। बच्ची की देखभाल डॉक्टरों की निगरानी में
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सनी जुनेजा के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर नवजात का शरीर ठंडा था। सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसे उसी के अनुसार इलाज दिया गया। अब सेहत में सुधार है। बच्ची हर दो घंटे में 15 से 20 मिलीलीटर दूध पी रही है। CWC की निरगानी में है नवजात
बाल कल्याण समिति, हरदा की सदस्य शिखा केशवरे ने बताया कि बच्ची की मां पुलिस के माध्यम से समिति के सामने उपस्थित हुई थी। महिला ने आवेदन देकर कहा कि वह बच्ची का पालन-पोषण करने में असमर्थ है। इसके बाद उसने बच्ची को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया। समिति ने बच्ची को देखरेख और संरक्षण में ले लिया है। गोद लेने के लिए क्या करना होगा?
बच्ची को अपनाने के लिए आगे आए परिवारों की इच्छा के साथ-साथ उसकी सुरक्षा और भविष्य अहम है। बाल कल्याण समिति (CWC) बच्चे की स्थिति की जांच और कानूनी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। किसी भी इच्छुक परिवार को बच्ची सीधे नहीं सौंपी जा सकती। बच्ची को कानूनी रूप से गोद देने योग्य घोषित किए जाने और अधिकृत दत्तक ग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उसे सौंपा जा सकता है। …………………….. यह खबरें भी पढ़ें… सगाई न टूटे इसलिए नवजात को छोड़ गए थे सगाई न टूटे, इसलिए एक युवती अपनी नवजात बच्ची को जिला अस्पताल से 100 मीटर दूर नाली किनारे छोड़ गई। बच्ची का जन्म गुरुवार सुबह अस्पताल में हुआ था। शाम करीब 6 बजे वह अस्पताल के पास नाली किनारे मिली। पूरी खबर पढ़िए… जिला अस्पताल के पास नाली किनारे मिली नवजात हरदा में गुरुवार शाम करीब सात बजे जिला अस्पताल से 100 मीटर दूर अस्पताल चौक पर एक नवजात बच्ची लावारिस मिली। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर राहगीरों और आसपास के लोगों ने पुलिस को 112 पर सूचना दी। पूरी खबर पढ़िए…
