खरगोन जिले के महेश्वर में इंदौर के 343 वोटर कार्ड मिले हैं। रविवार दोपहर सफाई अभियान से जुड़ी संस्था के सदस्यों को ये कार्ड नर्मदा नदी में तैरते और किनारे पड़े मिले। कार्ड पर इंदौर के तिलक नगर, आस्था पैलेस सहित अन्य पते दर्ज हैं। इंदौर से करीब 90 किलोमीटर दूर इतनी बड़ी संख्या में कार्ड मिलने के बाद कांग्रेस देश के चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोट चोरी की एफआईआर कराने के लिए धरना दे रही है। देखिए तस्वीरें डिजिटल कार्डों पर 2016 का साल दर्ज होने का दावा खरगोन जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक का दावा है कि कार्डों पर 2016 का साल दर्ज है, जबकि ये डिजिटल कार्ड हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर डिजिटल कार्ड की शुरुआत 2021 में हुई तो इन पर 2016 कैसे दर्ज है। नाईक ने इसे वोट चोरी का सबूत बताते हुए मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि वोटर आईडी के EPIC नंबर को सिस्टम में डालकर कार्डों की स्थिति पता की जा सकती है। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस-प्रशासन उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं कर रहा है और जांच की बात कह रहा है। नाईक के मुताबिक, कांग्रेस मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग कर रही है। कांग्रेस ने की निष्पक्ष जांच की मांग कांग्रेस जिला अध्यक्ष रवि नाईक और ब्लॉक अध्यक्ष हिम्मत सिंह पटेल ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि कार्ड मंडलेश्वर घाट तक कैसे पहुंचे, वे वास्तविक मतदाता पहचान पत्र हैं या नहीं और उन्हें वहां किसने छोड़ा। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। सभी वोटर आईडी कार्ड जब्त, थाना प्रभारी को सौंपी जांच मंडलेश्वर एसडीओपी श्वेता शुक्ला ने बताया कि नर्मदा घाट पर निःस्वार्थ सेवा समिति के सदस्य सफाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कुछ वोटर आईडी कार्ड मिले। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया। टीम ने पंचनामा तैयार कर सभी कार्ड जब्त कर लिए हैं। शुक्ला के मुताबिक, इस मामले में कांग्रेस नेताओं का आवेदन भी मिला है। इसके आधार पर जांच थाना प्रभारी को सौंपी गई है। सफाई करने वाली संस्था ने फिलहाल कोई लिखित शिकायत नहीं दी है। हालांकि, कार्ड सबसे पहले संस्था के सदस्यों को ही दिखाई दिए थे, इसलिए जांच के दौरान उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
