नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में ‘अंतिम सांस तक’ उम्रकैद काट रहा 85 साल का आसाराम इन दिनों उज्जैन में हैं। बुधवार को उसने सरकारी धन्वंतरि आयुर्वेदिक अस्पताल में परामर्श लिया और गुरुवार को पंचकर्म कराया, लेकिन शुक्रवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल नहीं पहुंचा। आसाराम की पैरोल 26 अक्टूबर को खत्म हो रही है। सवाल है कि इलाज के लिए उज्जैन ही क्यों, पैरोल खत्म होने से ठीक 4 दिन पहले सीने में दर्द, कहीं इसके पीछे कोई टैक्टिक तो नहीं; पूरी कहानी मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: आसाराम ने इलाज के लिए उज्जैन ही क्यों चुना, यहां ऐसा क्या खास है? जवाब: उज्जैन से आसाराम का पुराना नाता है। इसकी तीन वजहें दिखती हैं… 1. पहले भी यहीं इलाज करा चुके हैं: मार्च 2025 में, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के दौरान, आसाराम इसी सरकारी धन्वंतरि आयुर्वेदिक अस्पताल में व्हीलचेयर पर पंचकर्म कराने पहुंचा था। 2. अपना आश्रम है: उज्जैन के अंकपात मार्ग पर उसका आश्रम है, जहां वो रुका है। भीतर मोबाइल ले जाने पर रोक है और बाहर अनुयायियों की भीड़ जुट रही है। 3. मालवा उनके अनुयायियों का गढ़ रहा है: 2013 में जोधपुर पुलिस ने आसाराम को इंदौर के आश्रम से ही गिरफ्तार किया था। मार्च 2025 में, जब जमानत की शर्तों में अनुयायियों से मिलने और प्रवचन देने पर रोक थी, तब इंदौर आश्रम से उनके प्रवचन का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद वो उज्जैन पहुंचा थे। » शरद पूर्णिमा का संयोग: सूत्रों के मुताबिक आसाराम शरद पूर्णिमा (25 अक्टूबर) तक उज्जैन में रहेंगे, और पैरोल उसके अगले दिन 26 अक्टूबर को खत्म हो रही है। उज्जैन का आयुर्वेद से पौराणिक जुड़ाव भी बताया जाता है। मान्यता है कि आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि राजा विक्रमादित्य के नवरत्नों में शामिल थे। सवाल 2: सीने में दर्द के बाद आसाराम की तबीयत कितनी गंभीर है, जान को खतरा है? जवाब: इसे लेकर कोई पुख्ता जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन इसे ऐसे समझ सकते हैं… रिकॉर्ड बताता है कि यह दर्द हल्की बात क्यों नहीं है » 2024 की एंजियोग्राफी: AIIMS जोधपुर में हुई जांच में उसके दिल की दो नसों में 90-95% रुकावट और खून की कमी मिली थी। » AIIMS बोर्ड की रिपोर्ट: अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि उसे अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं है, पर चौबीसों घंटे मेडिकल देखभाल चाहिए। » तो क्या बीमारी बहाना है: यह सवाल इसलिए उठता है, क्योंकि पिछले दो साल में आसाराम के लगभग हर बार जेल से बाहर आने का आधार सेहत रही है। सवाल उठाने वाले तथ्य » सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि गंभीर हालत के आधार पर जमानत पाने वाला आसाराम कुछ महीने पहले काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्रा कर चुका था। » AIIMS बोर्ड की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में उसे अंतरिम जमानत नहीं दी। » सीने में दर्द की शिकायत ऐसे समय आई है, जब पैरोल खत्म होने में करीब 4 दिन बचे हैं और डॉक्टर 14 दिन का इलाज बता रहे हैं। बीमारी को सही बताने वाले तथ्य » दिल की बीमारी का रिकॉर्ड AIIMS जोधपुर की जांच से है। उज्जैन के डॉक्टर के मुताबिक भी सीने के दर्द का इलाज पहले से अलग चल रहा है और यहां आने से पहले वे एक अस्पताल में भर्ती रह चुके थे। यानी यह शिकायत पैरोल खत्म होने से ठीक पहले अचानक नहीं उठी। » AIIMS बोर्ड ने भी चौबीसों घंटे देखभाल जरूरी मानी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उसे प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की इजाजत दी और कहा कि हालत बिगड़े तो वे दोबारा कोर्ट आ सकते हैं। मौजूदा पैरोल सेहत के आधार पर नहीं, बल्कि लंबी कैद और अच्छे आचरण के आधार पर मिली है। सवाल 3: आसाराम पंचकर्म क्यों करा रहा, इससे किन बीमारियों में मदद मिलती है? जवाब: डॉ. निपेंद्र मिश्रा के मुताबिक आसाराम ने सिर दर्द, कमर दर्द और शरीर में दर्द की शिकायत बताई थी, इसलिए उसे 14 दिन पंचकर्म की सलाह दी गई है। डॉ. मिश्रा बताते हैं कि ये प्रक्रियाएं मरीज की जांच और तैयारी के बाद अस्पताल में भर्ती करके कराई जाती हैं। आयुर्वेद के ग्रंथ बुजुर्गों और दिल के मरीजों को वमन जैसी अंदरूनी प्रक्रियाओं से दूर रखने को कहते हैं, जबकि बाहरी थेरेपी इनके मुकाबले हल्की मानी जाती है। सवाल 4: उम्रकैद की सजा काट रहा फिर पैरोल कैसे मिली, नियम क्या हैं? जवाब: पहले जमानत और पैरोल का फर्क समझ लें… A. जमानत: आम तौर पर तब मिलती है, जब मुकदमा या सजा के खिलाफ अपील चल रही हो। B. पैरोल: सजा काट रहे कैदी को तय शर्तों पर कुछ दिन के लिए जेल से बाहर जाने की छूट है, जिसके बाद उसे लौटना होता है। आसाराम को पिछले दो साल में कई बार मेडिकल राहत मिली… 27 मई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखते हुए जमानत रद्द कर दी। इसके बाद 3 अगस्त 2026 को इसी हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल मंजूर की। » कोर्ट ने पैरोल क्यों दी: जोधपुर की जिला पैरोल समिति ने आवेदन खारिज कर दिया था। पुलिस को आसाराम के फरार होने का डर था। सरकार ने गुजरात का मामला, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट न मिलने और शिकायतकर्ता परिवार की सुरक्षा का हवाला दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आसाराम 13 साल से ज्यादा जेल में हैं और पहले की राहतों के दौरान उन्होंने कोई शर्त नहीं तोड़ी, इसलिए सिर्फ आशंकाओं के आधार पर पैरोल नहीं रोकी जा सकती। शर्त रखी गई कि वे 50 हजार रुपए का निजी मुचलका और 25-25 हजार के दो जमानतदार पेश करें। » नियमों का पेच: राजस्थान के 2021 के नए पैरोल नियम दूसरे राज्य में दोषी ठहराए गए कैदी को पैरोल से रोकते हैं, और आसाराम को गुजरात में भी उम्रकैद हुई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक कैदी पर वही नियम लागू होते हैं, जो उसकी सजा के वक्त थे। आसाराम को 2018 में सजा हुई थी, और 1958 के पुराने नियमों में अधिकारियों के पास ऐसे मामलों में छूट देने की गुंजाइश है। » रिहाई में दो महीने क्यों लगे: सरकार ने गुजरात हाईकोर्ट से आसाराम की पैरोल और जमानत खारिज होने का हवाला देकर आदेश पर अमल नहीं किया। 6 अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि गुजरात का फैसला उसके आदेश में बाधा नहीं है, और रिहाई का निर्देश दिया। 20 दिन की गिनती असल रिहाई की तारीख से हो रही है। सवाल 5: पैरोल खत्म होने के बाद क्या होगा, क्या उसे फिर जेल लौटना पड़ेगा? जवाब: हां। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक अवधि पूरी होने पर उसे जोधपुर जेल लौटना होगा। तय समय पर न लौटना पैरोल की शर्तों का उल्लंघन माना जाता है, और इसका असर आगे मिलने वाली राहतों पर पड़ता है। उसकी सजा ‘शेष प्राकृतिक जीवन तक’ की है, यानी रिहाई की कोई तय तारीख नहीं है। आगे के रास्ते… 1. राजस्थान केस: हाईकोर्ट सजा बरकरार रख चुका है। अब राहत सुप्रीम कोर्ट से ही मिल सकती है, जहां उसकी मेडिकल जमानत की अर्जी लंबित है। 2. गुजरात केस: 2023 में गांधीनगर की अदालत ने भी उसे उम्रकैद दी थी। सितंबर 2026 में गुजरात हाईकोर्ट उसकी अंतरिम जमानत खारिज कर चुका है। 3. अगली पैरोल: राजस्थान में दूसरी पैरोल 30 दिन तक की हो सकती है, लेकिन पुलिस और सरकार की आपत्तियां फिर सामने आ सकती हैं। » 26 अक्टूबर को समय पर जोधपुर जेल लौटना ही तय करेगा कि आसाराम की अगली पैरोल की अर्जी कितनी मजबूत होगी। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें…
भाजपा को घेरने निकले दिग्विजय, कांग्रेस ने बनाई दूरी- क्या बेटे को CM फेस बनाना चाहते हैं 79 साल के दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर को उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या के राम मंदिर तक पैदल यात्रा शुरू की है। करीब 930-950 किमी की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ 70 दिन में पूरी होनी है।…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
