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ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू:सात दिन में देनी होगी रिपोर्ट, ट्रक को प्रवेश किसने दिया; बैरिकेडिंग और ड्यूटी व्यवस्था की होगी जांच

ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के बाहर हुए भीषण सड़क हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर (एडीएम) सीबी प्रसाद को सौंपी है। उन्हें 7 दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। बुधवार से घटना से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे, उन्हें प्रवेश किसने दिया और हादसे के समय सुरक्षा व्यवस्था के लिए किसकी ड्यूटी थी। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 41 लोग घायल हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जा सकती है। बैरिकेडिंग के आदेश भी जांचेंगे मजिस्ट्रियल जांच के लिए घटना के कई अहम बिंदु तय किए गए हैं। इनमें दुर्घटना का मूल कारण, चीनौर घाटी की ओर से भारी ट्रकों के मंदिर मार्ग तक पहुंचने की परिस्थितियां और प्रवेश की अनुमति देने वालों की भूमिका शामिल है। जांच अधिकारी यह भी पता लगाएंगे कि घटना के समय मौके पर कितने पुलिसकर्मी और प्रशासनिक कर्मचारी तैनात थे, किसकी कहां ड्यूटी थी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए कितने बल की तैनाती की गई थी। इसके अलावा, मंदिर मार्ग पर बैरिकेड लगाने के कितने और कहां-कहां आदेश जारी किए गए थे, आदेशों का पालन हुआ या नहीं और भारी वाहनों को रोकने के लिए क्या इंतजाम थे, इसकी भी पड़ताल होगी। जांच अधिकारी घटना से जुड़े शासकीय और अशासकीय लोगों के बयान दर्ज कर अन्य जरूरी पहलुओं की जांच करेंगे। भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सुझाव भी रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे। 200-200 रुपए लेकर ट्रक को प्रवेश देने की चर्चा हादसे के बाद पुलिस, जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के बीच चेक पॉइंट पर कथित अवैध वसूली को लेकर भी चर्चा है। अधिकारियों के बीच दबी जुबान में यह आरोप सामने आया कि चेक पॉइंट पर तैनात कर्मचारियों ने कथित तौर पर 200-200 रुपए लेकर भारी ट्रक को अंदर आने दिया। हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मजिस्ट्रियल जांच में प्रवेश व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल से इसकी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों के बीच यह आशंका भी जताई जा रही है कि यदि ट्रक चालक ने आखिरी समय में स्टीयरिंग मंदिर के मुख्य गेट की ओर नहीं मोड़ा होता, तो जनहानि और अधिक हो सकती थी। घटना के समय मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी हुई थी। 17 अक्टूबर की रात बेकाबू ट्रक ने 57 लोगों को कुचला ग्वालियर के सातऊ गांव की पहाड़ियों के बीच स्थित मां शीतला मंदिर में 17 अक्टूबर की रात करीब 1:30 बजे हादसा हुआ था। सप्तमी के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से ढलान पर दो भारी ट्रक आए। बताया गया है कि एक ट्रक के चालक ने ढलान पर वाहन रोक लिया, लेकिन दूसरा चालक ट्रक को नियंत्रित नहीं कर सका। बेकाबू ट्रक भीड़ की ओर बढ़ा और 57 लोगों को अपनी चपेट में लेते हुए मंदिर के प्राचीन मुख्य दरवाजे से टकरा गया। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 लोग घायल हुए हैं। दो गंभीर घायलों को एयर एम्बुलेंस से भोपाल एम्स में भर्ती कराया गया है। अब मजिस्ट्रियल जांच में हादसे की परिस्थितियों, सुरक्षा इंतजामों और संभावित लापरवाही की कड़ियां जोड़ी जाएंगी। सात दिन में आने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दुर्घटना के लिए कौन जिम्मेदार था और भारी ट्रक को मंदिर मार्ग तक पहुंचने से रोकने में कहां चूक हुई। ये खबरें भी पढ़ें… ग्वालियर हादसे में घायल को एम्स में नहीं मिला इलाज:वायरल वीडियो में भाई का आरोप, मरीज का ठीक से नहीं हो रहा इलाज ‘जहां साइकिल नहीं जा सकती, वहां ट्रक कैसे पहुंचा’:मां बोली- बेटा जिंदा था, पोस्टमॉर्टम कराओ कहती रही पुलिस; ग्वालियर में अपनों को तलाशते रहे ट्रक में फंसे रहे श्रद्धालु, वहीं लगाया इंजेक्शन:पुलिस से पहले लोगों ने रेस्क्यू किया; ग्वालियर हादसे की 20 तस्वीरें 15 मौतों के बाद 50 लाख का कारोबार ठप:ग्वालियर के शीतला माता मेले से लौटे व्यापारी, बोले- कोरोना के बाद भी नहीं थे ऐसे हालात

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