मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा अमरकंटक साधु-संतों की तपस्थली के रूप में पहचाना जाता है। इसी इलाके के एक सुनसान आश्रम में रहने वाले संत की मौत ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी। पहले मामला सामान्य मौत का लगा, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुलिस के सामने हत्या की गुत्थी रख दी। संत समाज सड़कों पर उतर आया, जांच के लिए विशेष टीम बनानी पड़ी। जांच में सामने आया कि मौत से एक दिन पहले आश्रम में एक महिला आई थी। उसे देखकर बाबा नाराज हुए थे। महिला को लेकर उनके और एक दूसरे साधु के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद साधु गायब हो गया और आश्रम से बाबा का मोबाइल भी नहीं मिला। पुलिस के लिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं था कि बाबा की हत्या किसने की, बल्कि यह भी था कि उस मुलाकात में ऐसा क्या हुआ था, जिसने मामले को हत्या तक पहुंचा दिया। आज क्राइम फाइल्स में इसी केस की कहानी… अनूपपुर जिले के गढ़ीदादर गांव के जंगल में घने पेड़ों और सुनसान रास्तों के बीच शिवाबाबा आश्रम था। यहां जूना अखाड़े के संत अलबेले भोलागिरी महाराज रहते थे। लोग उन्हें खड़ेश्वरी महाराज के नाम से जानते थे। बताया जाता है कि उन्होंने लगातार 12 वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहकर तपस्या की थी। करीब चार साल से वे गढ़ीदादर गांव में रहकर पूजा-पाठ कर रहे थे। 8 अगस्त को मिली बाबा की लाश 7 अगस्त की सुबह गांव का सम्हर सिंह रोज की तरह जंगल में सूखी लकड़ियां और खाने लायक जंगली मशरूम तलाशने निकला। रास्ते में वह शिवाबाबा आश्रम पहुंचा। दरवाजा आधा खुला था। उसने बाहर से आवाज लगाई, ‘बाबा… ओ बाबा!’ अंदर से कोई जवाब नहीं आया। सम्हर सिंह कुटिया के भीतर गया तो बाबा अपने स्थान पर लेटे हुए थे। उनके ऊपर कपड़ा ढका था। उसे लगा कि बाबा आराम कर रहे हैं या ध्यान में हैं। वह बिना कुछ कहे वहां से चला गया। अगले दिन यानी 8 अगस्त को जब वह फिर आश्रम पहुंचा, तो बाबा उसी हालत में पड़े थे। इस बार उसे संदेह हुआ। पास जाकर उसने कपड़ा हटाया तो बाबा का शरीर ठंडा और अकड़ा हुआ था। उनकी सांसें थम चुकी थीं। बाबा का मोबाइल भी गायब था सम्हर सिंह गांव पहुंचा और सरपंच के साथ पुलिस को सूचना दी। देखते ही देखते बाबा की मौत की खबर आसपास के इलाकों में फैल गई। पुलिस आश्रम पहुंची तो पहली नजर में मामला सामान्य मौत का लग रहा था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बदल दी जांच की दिशा रिपोर्ट आई तो शुरुआती अनुमान गलत साबित हुआ। बाबा की गर्दन पर अंदरूनी और बाहरी चोटों के निशान थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत गला घोंटने से हुई थी। अब यह मामला संदिग्ध मौत का नहीं, हत्या का था। जंगल के बीच बने आश्रम में बाबा अकेले रहते थे। वहां तक पहुंचने वाले रास्ते भी सुनसान थे। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि हत्यारा कौन था और वह आश्रम तक कैसे पहुंचा? शुरुआती जांच में पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिला। दूसरी तरफ, हत्या की खबर से अमरकंटक और राजेंद्रग्राम में आक्रोश फैलने लगा।
बाबा की मौत पर प्रदर्शन और आंदोलन संतों और स्थानीय लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए राजेंद्रग्राम-अमरकंटक मुख्य मार्ग पर धरना दिया। प्रदर्शन के कारण आवागमन प्रभावित हुआ। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी रैली निकालकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मामले की सीबीआई या सीआईडी जांच कराने की मांग की और जल्द खुलासा नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। गणेश मंदिर छोड़ा, जंगल में बनाया आश्रम पुलिस ने ग्रामीणों से पूछताछ की तो बाबा के पुराने जीवन से जुड़ी जानकारियां सामने आने लगीं। शिवाबाबा आश्रम में रहने से पहले भोलागिरी महाराज धरहरकला के प्रसिद्ध गणेश मंदिर में पूजा-पाठ करते थे। ग्रामीणों के मुताबिक, वहां चेलों और बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी थी। कुछ लोगों ने इन गतिविधियों पर आपत्ति जताई। इसके बाद बाबा ने मंदिर छोड़ दिया और जंगल में अपना आश्रम बना लिया। हालांकि, जंगल में आने के बाद भी उनसे मिलने वालों का सिलसिला बंद नहीं हुआ। आश्रम में लोग आते, बैठक होती और बाबा से चर्चा करते थे। इन्हीं लोगों में साधु नरेंद्र गिरि भी शामिल था। वह अकसर आश्रम आता था और भोलागिरी महाराज को अपना गुरु मानता था। महिला को देखकर नाराज हो गए थे बाबा सम्हर सिंह ने पुलिस को बताया कि घटना से एक दिन पहले वह आश्रम में बर्तन साफ कर रहा था। उसी दौरान नरेंद्र गिरि एक अनजान महिला को लेकर वहां पहुंचा। कुटिया में महिला को देखकर भोलागिरी महाराज नाराज हो गए। उन्होंने आश्रम की मर्यादा और नियमों का हवाला देते हुए नरेंद्र गिरि पर आपत्ति जताई। वहां मौजूद सम्हर सिंह के मुताबिक, दोनों के बीच विवाद हुआ था। वह बर्तन वहीं छोड़कर अपने घर चला गया। इसके बाद आश्रम में क्या हुआ, इसकी जानकारी उसे नहीं थी। अगले दिन बाबा की मौत की खबर सामने आई तो उस मुलाकात पर संदेह और बढ़ गया। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही थी कि महिला को आश्रम लाने के पीछे क्या वजह थी और उसे देखकर बाबा इतने नाराज क्यों हुए थे। गायब साधु और मोबाइल ने बढ़ाया शक जांच आगे बढ़ी तो नरेंद्र गिरि के बारे में एक और अहम बात सामने आई। वह फरार था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और संभावित ठिकानों पर दबिश देने लगी। अब पुलिस के सामने ये सवाल खड़े थे-
– क्या बाबा की हत्या नरेंद्र गिरि ने की है?
– क्या महिला और नरेंद्र गिरि पर नाराज होना बाबा की हत्या का कारण बना?
– मोबाइल फोन में क्या कुछ ऐसा था जो राज खोल सकता था?
– या फिर बाबा का हत्यारा कोई और ही था? इन सवालों के जवाब कल पढ़िए मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट 2 में… ये भी पढ़ें… बैंक में काम करने वाला निकला पाकिस्तानी जासूस, क्राइम फाइल्स पार्ट-1 2002 से 2004 के बीच देश कई बम धमाकों और आतंकी साजिशों से दहल चुका था। दिसंबर 2002 से मार्च 2003 के बीच मुंबई में बसों, रेलवे स्टेशनों और लोकल ट्रेनों को निशाना बनाकर धमाके किए गए। पढ़ें पूरी खबर… भोपाल में बसना चाहता था पाकिस्तानी जासूस…शादी का था प्लान, क्राइम फाइल्स पार्ट-2 क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि भोपाल में सिटी बैंक में नौकरी करने वाला अब्दुल समी अचानक पुलिस की जांच के रडार पर आ गया। पुलिस को इनपुट मिला था कि वह पाकिस्तानी जासूस साजिद मुनीर है। पढ़ें पूरी खबर…
