सिंहस्थ के लिए 1352 करोड़ रुपए से बनाए गए देवास-बदनावर हाइवे पर एनएचएआई के अफसरों और इंजीनियरों की लापरवाही सामने आई है। इस हाइवे पर जो वाहन देवास से उज्जैन आ रहे हैं, उन्हें तपोभूमि चौराहे पर इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन की सर्विस रोड पर उल्टा जाकर ब्रिज के नीचे से गुजरते हुए आना पड़ रहा है। ऐसे में सिंहस्थ के दौरान यहां वाहन निकालना मुश्किल होगा। भास्कर इन्वेस्टीगेशन में पता चला कि हाइवे को दो एजेंसियों ने बनाया है। उज्जैन से बदनावर तक 69.1 किमी का ठेका जीआर इंफ्रास्ट्रक्चर और देवास से उज्जैन तक 41.42 किमी का ठेका गावर कंस्ट्रक्शन ने लिया था। तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमएल पूरबिया के समय हाइवे का निर्माण हुआ था, जो अब गुवाहाटी में हैं। सिक्सलेन ब्रिज के नीचे से आना पड़ेगा इंजीनियरों ने सिक्सलेन बनने की संभावनाओं को देखते हुए प्लान ही नहीं किया। हाइवे को इंदौर रोड से तो सीधे सर्विस रोड से जोड़ दिया, लेकिन देवास से आने वालों को उज्जैन आने के लिए सीधे नहीं जोड़ा। ऐसे में वाहनों को या तो हाइवे पर 100 मीटर उल्टा आकर क्रॉसिंग करना पड़ेगी या सर्विस रोड के सहारे सिक्सलेन के ब्रिज के नीचे से उज्जैन आना पड़ेगा। इंजीनियरों का तर्क… इंजीनियरों का तर्क है इस हाइवे का प्लान 6 साल पहले 2019-20 में तैयार हुआ था। तब इंदौर-उज्जैन रोड को सिक्सलेन करने का प्लान नहीं था। फोरलेन के हिसाब से ही हाइवे की ड्राइंग बनी थी।
