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भोपाल-अमरावद खुर्द लाइन में एचटीएलएस तकनीक से अपग्रेडेशन शुरू:बिजली की मांग… लाइन बिछाए बिना ट्रांसमिशन क्षमता 3 गुना बढ़ाई जाएगी

भोपाल में बिजली की बढ़ती मांग के बीच अब मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन से ही तीन गुना तक ज्यादा बिजली ले जाने की तैयारी है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने 132 केवी भोपाल-अमरावद खुर्द डबल सर्किट लाइन का क्षमता उन्नयन शुरू कर दिया है। इसमें पुराने कंडक्टर की जगह एचटीएलएस तकनीक वाला कंडक्टर लगाया जा रहा है। इससे अमरावद खुर्द सबस्टेशन तक ज्यादा बिजली पहुंचाने, ओवरलोडिंग का दबाव घटाने, मैनिट क्षेत्र की आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह इसकी बड़ी खासियत: ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि बिजली पहुंचाने की क्षमता बढ़ाने के लिए नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाने के बजाय मौजूदा लाइन का ही अपग्रेडेशन किया जा रहा है। इससे नए टावर लगाने, जमीन की उपलब्धता, राइट ऑफ वे जैसी चुनौतियों को कम करने का विकल्प मिलता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ लाइन और सबस्टेशन के सभी संबंधित उपकरणों की क्षमता के अनुरूप संचालन पर निर्भर करेगा। एक्स्ट्रा हाईटेंशन सबस्टेशनों पर भी होगा काम एमपी ट्रांसको सिर्फ लाइन का कंडक्टर नहीं बदल रही। 132 केवी अमरावद खुर्द, 132 केवी मैनिट, 220 केवी भोपाल सबस्टेशन में संबंधित फीडर बे की क्षमता का भी उन्नयन किया जा रहा है। यानी बिजली पहुंचाने वाली लाइन और उसे सबस्टेशन में संभालने वाले उपकरणों की क्षमता में तालमेल बनाया जाएगा। यह है एचटीएलएस तकनीक मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी सुनील तिवारी ने बताया कि सामान्य कंडक्टर में ज्यादा करंट बहने से तापमान बढ़ता है। तार फैलकर नीचे झुक सकता है। एचटीएलएस यानी हाई टेम्परेचर लो सैग कंडक्टर को अधिक तापमान पर भी अपेक्षाकृत कम झुकाव के साथ ज्यादा करंट वहन करने के लिए डिजाइन किया जाता है। इससे मौजूदा टावरों और लाइन का उपयोग करते हुए बिजली वहन क्षमता बढ़ाई जा सकती है। यह है मौजूदा व्यवस्था- 220 केवी गोविंदपुरा सबस्टेशन से अमरावद खुर्द तक और वहां से मैनिट तक बिजली पहुंचाई जाती है। बढ़ते लोड के कारण कुछ स्थितियों में बिजली का भार दूसरी लाइन या वैकल्पिक व्यवस्था पर डालना पड़ता है। क्षमता बढ़ने के बाद नेटवर्क के पास बिजली का भार संभालने के ज्यादा विकल्प होंगे। यह होगा फायदा – नई व्यवस्था में ट्रांसमिशन क्षमता 3 गुना बढ़ जाएगी तो ओवरलोडिंग का दबाव कम होने, लोड प्रबंधन के विकल्प बढ़ने से संबंधित क्षेत्रों में आपूर्ति संभालना आसान हो सकता है। हालांकि, स्थानीय फॉल्ट, वितरण लाइन की खराबी, ट्रांसफॉर्मर संबंधी समस्याओं का समाधान अलग से करना होगा।

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