गर्मी शुरू होने से पहले ही इंदौर में जलसंकट की तस्वीर सामने आने लगी है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में नगर निगम के सर्वे से सामने आया है कि शहर में 52,262 परिवारों तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच रहा है। नगर निगम का यह सर्वे बीते दिन तैयार किया था। इसी रिपोर्ट 14 अक्टूबर को सौंपी गई है। यह सर्वे रिपोर्ट दैनिक भास्कर के पास मौजूद है। इन परिवारों की जरूरत ट्यूबवेल और टैंकरों के जरिए पूरी की जा रही है। इसके अलावा 33,037 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें कम जलापूर्ति होने पर टैंकरों से पानी देना पड़ता है। यानी शहर में कुल मिलाकर 85 हजार से अधिक परिवार ऐसे हैं, जिनकी पानी की जरूरत नियमित नर्मदा सप्लाई से पूरी नहीं हो पा रही है। देखिए जलसंकट पर नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट… सर्वे में आंकड़ेवार विश्लेषण मौजूद निगम के सर्वे में वार्डवार आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि वार्ड 36 के मायाखेड़ी, अरंडिया, निपानिया और पिपलियाकुमार जैसे क्षेत्रों में स्थिति सबसे गंभीर है। यहां करीब 12 हजार परिवारों के पास नर्मदा कनेक्शन नहीं है। मायाखेड़ी और निपानिया में अभी से टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू होने की जानकारी सामने आई है। वार्ड 16 में 75 हजार परिवार वंचित वार्ड 16 में भी करीब 7,500 परिवार नर्मदा कनेक्शन से वंचित हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि शहर में जलापूर्ति की चुनौती सिर्फ गर्मी बढ़ने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही मौजूद है। गुरुवार को जलसंकट को लेकर हुई बैठक में भी सर्वे के आंकड़े सामने रखे गए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पानी की सप्लाई के लिए पर्याप्त हाइड्रेंट बनाकर टैंकर भरने की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने बताया कि नए टैंकर खरीदने के लिए मध्यप्रदेश सरकार से मांग की गई है। दूसरी ओर, इस बार सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश होने के कारण आने वाले महीनों में जलापूर्ति बनाए रखना निगम के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है। कम सप्लाई होने पर इन वार्डों में टैंकरों की जरूरत सर्वे का दूसरा अहम पहलू उन परिवारों से जुड़ा है, जहां नर्मदा कनेक्शन होने या जलापूर्ति व्यवस्था मौजूद रहने के बावजूद पानी की मात्रा कम पड़ने पर टैंकरों की जरूरत होती है। निगम के मुताबिक, ऐसे परिवारों की कुल संख्या 33,037 है। उपलब्ध वार्डवार आंकड़ों के अनुसार, वार्ड 37 में 2,000 परिवार, वार्ड 45 में 1,800, वार्ड 51 में 1,300 और वार्ड 28 में 1,200 परिवार कम जलापूर्ति की स्थिति में टैंकरों पर निर्भर हैं। वार्ड 63 में भी ऐसे 250 परिवार चिह्नित किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि जलसंकट की चुनौती सिर्फ उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, जहां नर्मदा का नेटवर्क नहीं पहुंचा है। जिन इलाकों में पानी की सप्लाई होती है, वहां भी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिलने पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। सामान्य से 14 इंच कम बारिश, गर्मी में बढ़ सकती है चुनौती इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई। यानी सामान्य के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा। कम बारिश के बीच जलस्रोतों में उपलब्ध पानी और उसकी आपूर्ति का प्रबंधन निगम के लिए अहम होगा। गर्मी में मांग बढ़ने पर उन इलाकों में दबाव और बढ़ सकता है, जहां परिवार पहले से ट्यूबवेल और टैंकरों पर निर्भर हैं। जलसंकट की आशंका को देखते हुए निगम ने बैठक में टैंकर भरने के लिए पर्याप्त हाइड्रेंट बनाने और नए टैंकर खरीदने की मांग जैसे कदमों पर जोर दिया है। मायाखेड़ी और निपानिया में टैंकरों की व्यवस्था शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल: इन परिवारों तक नियमित नर्मदा सप्लाई कब पहुंचेगी? नगर निगम के सर्वे ने उन इलाकों की स्थिति उजागर की है, जहां हजारों परिवारों को नियमित नर्मदा जलापूर्ति उपलब्ध नहीं है या कम सप्लाई के कारण टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है। अब सवाल यह है कि इन क्षेत्रों में स्थायी जलापूर्ति के लिए निगम की क्या योजना है, नर्मदा नेटवर्क से वंचित परिवारों को कब तक जोड़ा जाएगा और गर्मी में टैंकरों की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी। वार्ड 36 में करीब 12 हजार और वार्ड 16 में 7,500 परिवारों के पास नर्मदा कनेक्शन नहीं होना इस चुनौती का पैमाना बताता है। कम बारिश के बीच निगम के सामने दोहरी जिम्मेदारी है- मौजूदा जलापूर्ति को बनाए रखना और उन परिवारों तक पानी पहुंचाना, जो अब भी नियमित सप्लाई से वंचित हैं। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर में जलसंकट, महापौर ने 50 करोड़ का पैकेज मांगा मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून ने जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सामान्य तौर पर होने वाली करीब 37 इंच बारिश के मुकाबले इस बार 23 इंच पानी ही बरसा है। इसके मद्देनजर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग की है।पूरी खबर पढ़ें
