तुम्हें भूख नहीं लगती होगी। सीरम लो (Low) है, चेहरा पीला है। पीलिया की शुरुआत है। मिर्च-मसाला बंद नहीं किया तो लिवर खराब हो जाएगा। किडनी और लिवर की जांच के 800-800 रुपए लगेंगे… रीवा के घूमा स्थित ‘प्रयाग हॉस्पिटल’ में खुद को MBBS फिजिशियन बताने वाले यूके श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर के अंडरकवर रिपोर्टर को यह चेतावनी दी। रिपोर्टर ने सिर्फ चक्कर आने की शिकायत की थी। इसके बाद श्रीवास्तव ने 5 जांचें लिखीं। करीब एक घंटे बाद आई रिपोर्ट में टाइफाइड का स्तर ‘320 काउंट’ बताया गया, जबकि रिपोर्टर को बुखार या टाइफाइड का कोई अन्य लक्षण नहीं था। श्रीवास्तव ने शुगर कम होने, आंतें चिपकने और लिवर खराब होने की बात कहकर रोज 3 बोतलें चढ़ाने और 10 दिन अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी। रोज का खर्च ₹1,000 से ₹1,200 बताया गया। संदेह होने पर रिपोर्टर ने 7 किलोमीटर दूर गढ़ स्थित ‘मातेश्वरी पैथोलॉजी लैब’ में दोबारा जांच कराई। वहां डॉक्टर या विशेषज्ञ मौजूद नहीं था। संचालक ने खुद सैंपल लेकर रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट में भी टाइफाइड बताया गया। क्या दोनों लैब की रिपोर्ट में गड़बड़ी हुई? क्या मरीजों को कमीशन या कमाई के लिए गंभीर बीमारियों का डर दिखाया जा रहा है? इन सवालों की पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर ने रीवा में 10 दिनों तक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन किया। विशेषज्ञ ने दोनों लैब की रिपोर्ट पर उठाए सवाल दैनिक भास्कर ने दोनों लैब की रिपोर्ट भोपाल के CMHO डॉ. मनीष शर्मा को दिखाई। उन्होंने रिपोर्ट का विश्लेषण कर उनमें संभावित गड़बड़ी पर सवाल उठाए। डॉ. शर्मा के मुताबिक, “टाइफाइड के मामले में WBC (व्हाइट ब्लड सेल्स) का स्तर बढ़ सकता है। लेकिन ‘सतगुरू पैथोलॉजी’ (प्रयाग हॉस्पिटल से संबद्ध) और ‘मातेश्वरी पैथोलॉजी’ की रिपोर्ट में यह स्तर सामान्य था।” डॉ. शर्मा ने इसे रिपोर्ट में संभावित हेरफेर का संकेत बताया। डॉ. शर्मा ने सवाल उठाया, “अगर डॉक्टर को लिवर और किडनी खराब होने की आशंका थी, तो उन्होंने LFT (लिवर फंक्शन टेस्ट) और KFT (किडनी फंक्शन टेस्ट) क्यों नहीं लिखे?” पैथोलॉजी लैब के लिए मंजूरी से लेकर कमीशन तक: स्टिंग में सामने आए आरोप पहले स्टिंग के बाद भास्कर टीम ने यह पड़ताल की कि ग्रामीण इलाकों में पैथोलॉजी लैब खोलने की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है। इसके लिए रिपोर्टर पैथोलॉजी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर रीवा के CMHO कार्यालय पहुंचा। स्टिंग के दौरान टीम के सामने कथित रिश्वतखोरी और बिचौलियों की भूमिका से जुड़े आरोप सामने आए। ₹20 हजार मासिक पर डॉक्टर की व्यवस्था, जांच पर 50% कमीशन का दावा मनीष के जरिए भास्कर टीम रीवा के न्यू बस स्टैंड स्थित ‘मातेश्वरी पैथोलॉजी लैब’ के संचालक रामायण सिंह तक पहुंची। स्टिंग में सिंह ने डॉक्टर की व्यवस्था और कमीशन को लेकर दावे किए। बायोमेडिकल वेस्ट और प्रदूषण NOC के लिए भी रकम मांगने के आरोप पैथोलॉजी लैब के लिए जरूरी अन्य मंजूरियों की प्रक्रिया में भी स्टिंग के दौरान कथित भुगतान की मांगें सामने आईं। स्टिंग में सामने आए आरोपों पर संबंधित लोगों की सफाई दैनिक भास्कर ने स्टिंग में सामने आए सभी संबंधित लोगों से आरोपों पर प्रतिक्रिया मांगी, तो कोई अपने दावे से मुकर गया तो किसी ने फोन ही काट दिया। मनीष (शिव जनसेवा केंद्र): स्टिंग में ₹30,000 में डॉक्टर की व्यवस्था कराने का दावा करने के बाद मनीष ने कहा कि उनके पास कोई डॉक्टर नहीं है। रामायण सिंह (मातेश्वरी पैथोलॉजी): डिजिटल साइन और कमीशन के दावों पर उन्होंने कहा, “मुझे कोई जानकारी नहीं है। आपकी टीम कब आई थी? मुझसे किसी की बात नहीं हुई।” शुभम (चित्रकिरण वेस्ट मैनेजमेंट): उन्होंने ₹3,500 मासिक शुल्क लेने की बात स्वीकार की। अन्य सवालों पर उन्होंने HOD से बात करने को कहा। रंजीत साहू (प्रदूषण बोर्ड): ₹20,000 की कथित मांग और 15 दिन में NOC मिलने के दावे पर सवाल पूछे जाने के बाद साहू ने फोन ही काट दिया।
