बुंदेलखंड में पिछले पांच दिनों से चल रही पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ‘सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 3.0’ अब सफलतापूर्वक संपन्न कुछ घंटों में होने वाली है। यह यात्रा बागेश्वर धाम से शुरू होकर पन्ना, दमोह, सागर और टीकमगढ़ होते हुए 5 जिलों में लगभग 500 किलोमीटर का सफर तय कर छतरपुर में पूरी होगी। यात्रा के दौरान बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने सनातन हिन्दू एकता के रथ में बैठकर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की सवाल- पांच दिन लगातार सफर किया, क्या रिस्पॉन्स मिला आपको, क्या कहेंगे?” धीरेंद्र शास्त्री- बुंदेलखंड की यह अद्भुत यात्रा रही। लाखों लोग सड़कों पर थे। आस्था था, सनातन के प्रति उत्साह था, उमंग थी और धैर्य था। आठ-आठ, दस-दस घंटे तक हिंदू एकजुट होकर के, एकत्रित होकर के, कीर्तन करते हुए सड़कों पर बैठे थे। उसमें दर्शन, उनके अंदर दर्शन का भाव था। यह सनातन का प्रदर्शन नहीं, दर्शन की यात्रा थी। यह यात्रा बुंदेलखंड के पांच जिलों में हिंदुओं को एकजुट और नशा मुक्ति विशेष इसमें अभियान रहा, जो हमारा बुंदेलखंड नशा से जूझ रहा है, उस नशा मुक्ति के लिए विशेष उपाय किया गया और अभूतपूर्व क्षण था, अद्भुत पल था, लोगों ने संकल्प लिया। हमें भरोसा है इस यात्रा से समाज में बहुत परिवर्तन आएगा। समाज सुधरेगा तो देश सुधरेगा, समाज सोच से सुधरेगा। सोच ठीक होगी तो समाज ठीक होगा और समाज ठीक होगा तो देश ठीक होगा।” सवाल-नशा मुक्ति के लिए कोई मुख्यमंत्री से कुछ कहना चाहेंगे, कोई संदेश देना चाहेंगे आप?” बागेश्वर बाबा-“हो सके जितनी जल्दी हो सके तो माननीय मुख्यमंत्री जी को हम यही कहेंगे कि देश की, प्रदेश की मदिरा की दुकानें शीघ्र बंद कर दी जाएं। यदि वो ऐसा करेंगे, तो हम सबको बहुत प्रसन्नता होगी और संपूर्ण प्रदेश को बहुत प्रसन्नता होगी। ये उनका बिहार और गुजरात के बाद का सबसे बड़ा कदम होगा। क्योंकि हम बंडा क्षेत्र में गए जहां बहुत लोगों की नकली शराब पीने से मौत हुई। उस परिवार के कुछ लोगों को मिले, उनके आंसुओं को, दर्द को समझा, किसी ने भाई खोया, किसी ने पिता खोया, किसी ने परिवार खोया, तो क्यों ना ये मादक पेय पदार्थ बंद ही कर दिया जाए पूरे प्रदेश में, ताकि किसी का भाई ना जाए। फिर कोशिश की जा सके, तो यह बहुत अद्भुत होगा, पूरे प्रदेश के लिए इससे बड़ी सौगात मुख्यमंत्री की ओर से होगी। लाडली बहना के बाद सबसे बड़ी सौगात होगी, मदिरा-मुक्त मध्य प्रदेश।”
सवाल-रोकने वाले दिखाई दिए… कहीं चर्चा हो रही थी यात्रा रोकेंगे
शास्त्री-देखिए, इस देश में हमारा ऐसा मानना है, सब सनातनी हैं, सब राममय हैं, क्योंकि…” ये राममय नीति की यात्रा थी। दूसरी बात, हमें तो कोई नहीं दिखाई पड़ा, हम तो इंतजार कर रहे थे कि आएं, उन्हें भी गले लगाएं, उन्हें भी समझाएं। हां, सोशल मीडिया पर या मोबाइल पर, टीवी पर बोल करके, बातों से प्रचार-प्रसार पाया जा सकता है, लेकिन जिस दिन वो सन्मुख में हमको सुन लेंगे, तो वो भी जयकारी लगाएंगे। सवाल -पदयात्रा हो गई, रथयात्रा हो गई, अगली यात्रा क्या हवाई जहाज से निकलेगी आपकी?
शास्त्री -नहीं-नहीं-नहीं, पदयात्रा की सफलता रथयात्रा है, रथयात्रा की सफलता रामराज्य है।
सवाल -अच्छा, अब रामराज्य कैसे आएगा? और अगला पड़ाव क्या होगा, कब यात्रा निकलेगी आपकी?
शास्त्री- विचार बदलेगा तो समाज बदलेगा, विचारों की क्रांति से ही मन में शांति स्थापित होती है।
सवाल- अगली यात्रा, बताएंगे कब यात्रा होगी?
शास्त्री -जल्दी कोशिश करेंगे और अगली यात्रा भी नशा मुक्ति के लिए की जाएगी
सवाल- पांच दिन का अनुभव कैसा रहा?
धीरेन्द्र शास्त्री -अद्भुत था और एक सुधार करना है कि अगली बार यात्रा एक दिन में 100 किलोमीटर की नहीं, 50 की करनी है, ताकि और ज्यादा संवाद कर सकें।
सवाल- सबसे अच्छा पल कौन सा रहा पांच दिन में? कौन सा जिला था, कौन सा वो गांव था जिस-जिस ने आपका दिल जीत लिया हो?
बागेश्वर बाबा- पांचों जिलों में कोई ना कोई जगह ने दिल छुआ, पर एक जगह दमोह जिले में एक परिवार गांव के किनारे एक छोटा बच्चा सिर पर लेकर के पिता जा रहा था, तो उन्होंने पूछा कि इसको सिर पर क्यों लिए, धक्का लग जाएगा, भीड़ बहुत है, चोट लग जाएगी। तो उसने कहा कि सुबह से इसने खाना इसलिए नहीं खाया, वो यात्रा में सम्मिलित होकर आपको देखना चाहता था। बल्कि पिता ने डांटा भी, पीटा भी, पर वो नहीं माना, उस पल ने हमारे हृदय को छुआ। सवाल- आपके जो शिष्य मंडल को क्या संदेश देंगे? यात्रा में क्या आप सुधार करना चाहते हैं
शास्त्री- हम उन्हें समय नहीं दे पाए, हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी भी हैं। अपनी सभी मंडलों के लोगों से और यही कहेंगे जल्दी धाम पर एक महासम्मेलन रखेंगे। इससे सममंडल समारोह, जिन-जिन ने सेवा की उनके साथ बैठक करेंगे, संवाद करेंगे।
आने वाले दिनों में जो हमने संकल्प दिलाए हैं, उस पर गांव-गांव, गली-गली के लिए नुक्कड़-नुक्कड़ में फिर से एक यात्रा चालू करें, अपने मंडल, अपने-अपने जिलों में, अपने-अपने मंडल। सवाल- मां ने आशीर्वाद देके आपको यात्रा में भेजा था, क्या उनका फोन?
शास्त्री -बात नहीं हो पाई, क्योंकि इन पांच दिनों में हम बहुत व्यस्त थे। रात को भी जागरण हो पा रहा था और रातों-भर चलना हो रहा था, तो बात नहीं हो पाई। पर मां टीवी पर या सोशल मीडिया पर तो देख ही रही होगी, अगल-बगल वालों से पूछ तो लेती है। तो जाएंगे, पूरी बात बताएंगे कि अद्भुत रही और परिश्रम जरूर हुआ, परिश्रम का फल मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।
सवाल- फोन उठाया तो क्या मां डांटेंगी
शास्त्री- हस्ते हुए बोले हां-हां, ये तो कहेंगे कि एक बार कम से कम याद तो कर लेते।
