आगर-मालवा जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर है। नवरात्र के दौरान भक्ति और तंत्र साधना का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहां दो विशाल यज्ञशालाओं के 200 से ज्यादा हवन कुंडों में दिन-रात आहुतियां दी जा रही हैं। स्थिति यह है कि 9 दिन तक हवन कुंडों की अग्नि ठंडी भी नहीं हो पाती। शत्रु नाश, कोर्ट केस में जीत, चुनाव में सफलता और सुख-शांति की कामना लेकर देशभर से रोजाना 40 से 50 हजार श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। श्मशान-कब्रिस्तान से घिरा जाग्रत शक्तिपीठ लखुंदर नदी के किनारे स्थित यह मंदिर चारों दिशाओं से श्मशान और कब्रिस्तान से घिरा हुआ है। बगलामुखी तंत्र की देवी हैं, इसलिए यहां तांत्रिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। मंदिर के गर्भगृह में मां तीन रूपों में विराजित हैं- मध्य में मां बगलामुखी, दाएं महालक्ष्मी और बाएं मां सरस्वती। गर्भगृह 3 करोड़ रुपए से अधिक के सोने और 65 लाख रुपए की चांदी व आभूषणों से दमक रहा है। मंदिर के ठीक सामने 80 फीट ऊंची दीपमाला और उत्तर में भैरव महाराज का स्थान है। पांडवों ने कृष्ण के कहने पर किया था अनुष्ठान मंदिर से दो प्रमुख पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं। देश का अकेला मंदिर जहां चढ़ती है खड़ी हल्दी मां बगलामुखी का स्वरूप पीताम्बर (पीला) है। मां को सोने की नथनी, कान के बाले, मंगलसूत्र और पीली चुनरी अर्पित की जाती है। यह संभवतः देश का पहला मंदिर है, जहां पूजन में खड़ी हल्दी और हल्दी पाउडर चढ़ाने का विशेष महत्व है। अनुष्ठान के लिए पहचान पत्र अनिवार्य, मिर्ची अनुष्ठान पर रोक मंदिर में 190 रजिस्टर्ड पंडित हैं, जो विजय यज्ञ, शत्रु नाशक और संतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान कराते हैं। इस बार भंडारा नहीं, फूलों से भव्य सजावट कलेक्टर प्रियंक मिश्र ने बताया कि सामान्य दिनों में यहां 2 से 3 हजार भक्त आते हैं, लेकिन नवरात्र में यह आंकड़ा रोज 50 हजार तक पहुंच रहा है। अष्टमी और नवमी पर भीड़ और बढ़ेगी। इस बार 10 साल से चल रहा ‘पीतांबरा सेवा समिति’ का भंडारा नहीं किया जा रहा है। वहीं मंदिर की भव्य सजावट के लिए टेंडर जारी कर ठेका दिया गया है, जिसके तहत 9 दिनों में 3 बार ताजे फूलों से विशेष शृंगार किया जा रहा है। यूपी, बिहार और दक्षिण भारत से आ रहे श्रद्धालु
