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धन-धान्य कृषि योजना में टीकमगढ़ जिले को मिला राष्ट्रीय सम्मान:केंद्रीय मंत्री ने कलेक्टर को किया सम्मानित; गेहूं-उड़द का रकबा भी बढ़ा

टीकमगढ़ जिले को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रदर्शन संकेतकों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। सोमवार को नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को सम्मानित किया। योजना का एक वर्ष पूरा होने पर आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पांच जिलों के कलेक्टरों को सम्मान मिला। प्रदेश के पांच जिलों को मिला सम्मान टीकमगढ़ के अलावा उमरिया, सीधी, शहडोल और डिंडोरी जिले के कलेक्टरों को भी सम्मानित किया गया। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने बताया कि भारत सरकार चयनित जिलों की डीडीकेवाई डैशबोर्ड पर दर्ज प्रगति की नियमित मासिक समीक्षा करती है। योजना के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों का चयन किया गया है। तस्वीरे देखिए… दो साल में 80 हजार मीट्रिक टन बढ़ा गेहूं उत्पादन टीकमगढ़ में कृषि उत्पादन के आंकड़ों में भी सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2023-24 में जिले में गेहूं का उत्पादन 6.12 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 6.92 लाख मीट्रिक टन हो गया। इस अवधि में गेहूं की खेती का रकबा भी 2.08 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.22 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया। खरीफ फसलों में लक्ष्य से आगे रहा जिला जिले में खरीफ फसलों का कुल क्षेत्रफल 2,30,810 हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि लक्ष्य 2,30,800 हेक्टेयर था। उड़द की बोवनी का क्षेत्र निर्धारित लक्ष्य से 16.68 प्रतिशत अधिक रहा। जल संरक्षण के तहत 134 नए जल संग्रहण ढांचे बनाने का लक्ष्य भी पूरा किया गया। वहीं, वाटरशेड घटक में 8,975 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 7,392 हेक्टेयर क्षेत्र में काम हुआ। मत्स्य पालन और प्राकृतिक खेती में भी उपलब्धि मत्स्य पालन के क्षेत्र में 461 इकाइयों के लक्ष्य के मुकाबले 529 इकाइयां दर्ज की गईं। प्राकृतिक खेती से 5,225 किसान 2,090 हेक्टेयर क्षेत्र में जुड़े हैं, जबकि जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या 1,983 है। सहकारिता और महिला किसानों की भागीदारी सहकारिता क्षेत्र में जिले की सभी 64 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में कंप्यूटर हार्डवेयर, इंटरनेट और ई-पैक्स से जुड़ी व्यवस्थाएं पूरी की गई हैं। इसके अलावा महिला किसान उत्पादक कंपनी के माध्यम से 1,200 महिलाएं भी जुड़ी हैं। इन उपलब्धियों को जिले के कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रदर्शन का हिस्सा माना गया है।

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