आगामी नवरात्रि और गरबा आयोजनों को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मुस्लिम युवाओं और समुदाय के लोगों से गरबा आयोजनों में जाने से परहेज करने की अपील की है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेख इस्माईल खान ने 6 अक्टूबर को जारी अपील में कहा कि यह किसी धर्म या धार्मिक आयोजन के विरोध में नहीं है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और विवाद से बचने के उद्देश्य से की गई है। कमेटी ने कहा है कि हाल के दिनों में गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की मौजूदगी को लेकर सार्वजनिक तौर पर आपत्तियां सामने आई हैं। भाजपा के कुछ मंत्रियों और विधायकों ने भी गरबा आयोजनों में मुस्लिमों के शामिल होने पर नाराजगी जताई है। ऐसे में जहां किसी समुदाय की ओर से मौजूदगी पर आपत्ति जताई जा रही है, वहां जाने की जिद करने के बजाय संयम और आपसी सम्मान का परिचय देना बेहतर है। आपत्ति है तो दूरी बनाने में ऐतराज क्यों कमेटी के मुख्य संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि जब एक समुदाय की ओर से मुस्लिमों से गरबा और अपने धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाए रखने की बात कही जा रही है तो मुस्लिम समाज को भी इस पर ऐतराज नहीं होना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश के सभी काजी, मुफ्ती, उलेमा और सामाजिक संगठनों से आगे आकर मुस्लिम युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील करने को कहा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के नौजवानों और बच्चों को ऐसे धार्मिक आयोजनों में शामिल होने से बचना चाहिए, जहां उनकी मौजूदगी को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। साथ ही सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं और इन्फ्लुएंसर्स से भी अपील की गई है कि वे गरबा आयोजनों से जुड़ी ऐसी रील या वीडियो वायरल न करें, जिससे विवाद की स्थिति पैदा हो। जिलों में अभियान चलाएगी कमेटी शमशुल हसन ने कहा कि कमेटी अपने प्रदेश, संभाग और जिला स्तर के पदाधिकारियों के माध्यम से अभियान चलाएगी। पदाधिकारियों से कहा जाएगा कि वे अपने क्षेत्रों के उलेमा और सामाजिक संगठनों से संपर्क करें और मीडिया तथा सोशल मीडिया के माध्यम से मुस्लिम समाज के युवाओं को गरबा आयोजनों से दूर रहने की अपील करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन से भी संपर्क कर उन्हें कमेटी की पहल के बारे में बताया जाएगा। उद्देश्य किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं, बल्कि विवाद की स्थिति से बचना और शांति बनाए रखना है। पत्र में सभी धर्मों की आस्था के सम्मान की बात कमेटी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सभी धर्मों की आस्था और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। कमेटी ने उलेमा, काजी, मुफ्ती, शायरों और धार्मिक विद्वानों से अपने मिंबरों, मजलिसों और सामाजिक मंचों के माध्यम से युवाओं को समझाने की अपील की है। कमेटी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. हफीज खान और मुख्य संरक्षक शमशुल हसन के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है कि उनका उद्देश्य समाज में दूरी पैदा करना नहीं, बल्कि ‘अमन, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द’ बनाए रखना है।
