किसानों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला रोक लिया। हाथों में सूखी फसल लेकर पहुंचे किसानों ने मांग की कि पांढुर्णा जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। साथ ही, सरकार कर्ज भी माफ करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। नया जिला बनने के बाद मुख्यमंत्री पहली बार रविवार को पांंढुर्णा पहुंचे। निर्धारित समय से तीन घंटे देरी से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने बुजुर्गों और लाड़ली लक्ष्मी योजना के हिग्राहियों को सम्मानित किया। उन्होंने ‘सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार’ के तहत लगाए गए शिविर का निरीक्षण किया। लौटते समय किसानों ने रोका काफिला दोपहर करीब 2 बजे लौटते समय गेट के पास किसानों ने सीएम का काफिला रोक लिया। किसानों को देखकर मुख्यमंत्री गाड़ी से उतरे। किसानों ने मुख्यमंत्री से कहा कि पांढुर्णा जिले में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है। इस कारण खेतों में खड़ी खरीफ फसलें प्रभावित हो रही हैं। कई क्षेत्रों में फसलें सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं। क्षेत्र में कपास, तुअर, ज्वार और मूंगफली समेत अन्य फसलों पर भी कम बारिश का असर पड़ा है। किसानों ने कहा- खेतों में फसल बचाना मुश्किल किसान प्रकाश गायधने का कहना था कि बारिश नहीं होने से खेतों में नमी खत्म हो रही है। कई जगह फसलें मुरझाने लगी हैं। किसानों के सामने उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है। किसानों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जिले में फसलों की स्थिति का तत्काल सर्वे कराया जाए। वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को राहत दी जाए। सूखाग्रस्त घोषित करने, कर्ज माफी की मांग कांग्रेस के पूर्व विधायक जतन उईके ने भी पांढुर्णा को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की। उनका कहना है कि फसल खराब होने की स्थिति में खेती की लागत और पुराने कर्ज का दोहरा दबाव पड़ेगा, इसलिए कर्ज माफ करने के साथ फसल नुकसान के आधार पर मुआवजा दिलाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कलेक्टर को फसलों का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। सर्वे के बाद फसलों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी। मुख्यमंत्री बोले- जिला बनने के बाद लगातार हो रहा विकास मुख्यमंत्री ने कहा साल 2023 में पांढुर्णा जिला बनने के बाद से सरकार यहां लगातार विकास कार्य कर रही है। नए भवनों के निर्माण के साथ विभिन्न विभागों में पदों की स्वीकृति की प्रक्रिया भी की जा रही है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हो और लोगों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल सकें।
