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देश के 60% संगठित ड्रग केस अकेले MP में:स्टेपनी से लेकर सलवार-कुर्ते तक में तस्करी, शाह बोले- 3 साल में खत्म करेंगे नशा

मैं सभी अभिभावकों, खासकर माताओं से कहने आया हूं… 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्य प्रदेश में आपके बेटे-बेटियों के लिए नशे की जगह नहीं होगी। उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल में गोपालक सम्मेलन में यह भरोसा दिलाया। वे मध्य प्रदेश को नारकोटिक्स से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी करने वाले थे, जो अपरिहार्य कारणों से टल गई। सवाल है कि गृह मंत्री को मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ इतनी बड़ी घोषणा क्यों करनी पड़ी? इसका जवाब नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के आंकड़ों में मिलता है। इनके मुताबिक, मध्य प्रदेश ड्रग्स तस्करी के बड़े केंद्रों में शामिल है। भोपाल में 1,800 करोड़ की ड्रग्स फैक्ट्री से लेकर गुप्त लैब तक का नेटवर्क मध्य प्रदेश में ड्रग्स की तस्करी के साथ अवैध निर्माण का नेटवर्क भी सामने आया है। औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर गांवों तक में गुप्त लैब पकड़ी गई हैं। तस्करी के 3 तरीके: थार की स्टेपनी से सलवार-कुर्ते तक में छिपाई ड्रग्स तस्कर पुलिस और DRI से बचने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं। पिछले एक महीने में सामने आए तीन मामले इसकी मिसाल हैं: अब पूरे ड्रग नेटवर्क पर शिकंजे की तैयारी अब सरकार ने पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आह्वान पर प्रदेश को 2029 तक नशामुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ड्रग्स बनाने वाली 17 गुप्त लैब का भंडाफोड़ किया जा चुका है। आदतन ड्रग अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई तेज की गई है। पांच राज्यों की बैठक में संयुक्त कार्रवाई पर जोर केंद्रीय गृह सचिव ने MP की उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ से लगी सीमाओं को देखते हुए पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त आसूचना और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया। उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘ड्रग-मुक्त कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू करने और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन पर भी जोर दिया गया। मध्य प्रदेश में नशे के तीन बड़े नेटवर्क विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में नशे के तीन प्रमुख प्रकार का नेटवर्क सक्रिय है।

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