मध्य प्रदेश के बालाघाट में 32 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब सियासी मुद्दा बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचकर मृत बच्चों के परिजन से मुलाकात करेंगे। राहुल के दौरे से पहले सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। जगला के जिन चार मृत बच्चों के परिजन से वे मिलेंगे, उनके नाम प्रशासन के आधिकारिक डेथ रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं। भास्कर की पिछली पड़ताल में भी सरकारी आंकड़ों से ज्यादा मौतों की जानकारी सामने आई थी। बालाघाट में बच्चों की मौत का सिलसिला मई में 3 साल की रूही परते की मौत के बाद शुरू हुआ था। मामला बढ़ने पर सरकार ने प्रभावित इलाकों में हेल्थ कैंप और स्क्रीनिंग शुरू की। सरकार का दावा है कि अब स्थिति नियंत्रण में है। वहीं बीजेपी ने राहुल के दौरे को राजनीतिक माइलेज लेने की कवायद बताया है। सोशल मीडिया पर भी सरकार को घेर चुके हैं राहुल राहुल गांधी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दो बार मोहन यादव सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं जगला के 4 बच्चों की मौतें स्थानीय लोगों और परिजनों के मुताबिक, जगला गांव के इन चार बच्चों की मौत सरकारी सूची में दर्ज नहीं है। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल बोले- राजनीतिक माइलेज लेने आ रहे राहुल गांधी के दौरे पर उप-मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, ‘राहुल गांधी केवल राजनीतिक माइलेज लेने का प्रयास कर रहे हैं। जब कठिन परिस्थितियां थीं, तब उन्हें संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। जिन समस्याओं को कांग्रेस की नीतियों से बढ़ावा मिला, आज वही संवेदना की बात कर रहे हैं।’ सरकारी आंकड़ों और जमीनी दावों में बड़ा अंतर बालाघाट में बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर सरकारी रिकॉर्ड और विपक्ष के दावों में अंतर है। सरकारी रिकॉर्ड में अब तक 32 मौतें दर्ज हैं, जबकि कांग्रेस विधायक संजय उइके का दावा है कि 43 बैगा बच्चों की मौत हुई है। अगस्त में दैनिक भास्कर की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा किया था। उस समय प्रशासन 8 मौतों की बात कर रहा था। टीम ने बिरसा ब्लॉक के 9 गांवों में 20 बच्चों की मौत की जानकारी जुटाई थी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इन मौतों की जानकारी होने की बात सामने आई थी। मौतों का सिलसिला कब और कैसे शुरू हुआ? प्रशासन की आखिरी सूची के अनुसार, पहली मौत 18 मई 2026 को 3 साल की रूही परते की हुई। अगले दिन 19 मई को उसके 5 साल के भाई राम परते की भी मौत हो गई। दोनों की मौत घर पर हुई थी। परिजनों के मुताबिक, उन्हें 15-20 दिनों से तेज बुखार, मुंह में छाले और डिहाइड्रेशन की समस्या थी। इसके बाद भी मौतें दर्ज होती रहीं। 29 जुलाई को मीडिया में मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज की। जांच में नाले के पानी के सैंपल में एडिनोवायरस मिला बच्चों की मौत के बाद दिल्ली की NCDC, जबलपुर की NSCB, पुणे की NIV और ICMR की टीमों ने जांच की। रिपोर्ट में ये नतीजे सामने आए। बड़ा सवाल: पोस्टमार्टम के बिना मौत की वजह कैसे तय हुई? सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया के मुताबिक, मौतों को सिर्फ मीजल्स से नहीं जोड़ा जा सकता। मलेरिया, उल्टी-दस्त और कुपोषण भी संभावित कारण हैं। उन्होंने बताया कि किसी मृत बच्चे का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। अब परिजन और ग्रामीणों से चर्चा के आधार पर ‘वर्बल ऑटोप्सी’ तैयार की जाएगी। ऐसे में सवाल है कि मौतों की वजह अब तक किस आधार पर तय की गई? सरकार ने शुरू किए राहत और स्वास्थ्य संबंधी उपाय सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और स्वास्थ्य संबंधी कार्य शुरू किए हैं। कार्रवाई पर सवाल: बड़े अफसरों की जवाबदेही क्या तय हुई? सरकार ने जिला मलेरिया अधिकारी का ट्रांसफर किया और सीएमएचओ से अतिरिक्त प्रभार वापस लिया। बाद में सीएमएचओ को पद से भी हटा दिया गया। अब सवाल जवाबदेही का है-इतनी मौतों के मामले में जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई और आगे क्या कार्रवाई होगी?
