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ग्वालियर सराफा में सबसे बड़ी होलिका दहन आज:25 हजार कंडों से हो रही तैयार, कोटेश्वर मंदिर से होगी होलिका दहन की शुरुआत

ग्वालियर में सोमवार को होलिका दहन के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत की जाएगी। सबसे पहले शाम 6:30 बजे गुप्तेश्वर मंदिर, 7:00 बजे सनातन धर्म मंदिर और आखिर में शाम 7:30 बजे अचलेश्वर मंदिर में होलिका जलाई जाएगी। ग्वालियर की सबसे बड़ी होली सराफा बाजार में जलाई जाती है। इस बार भी यहां 25 हजार कंडों से लगभग 15 फीट ऊंची होलिका बनाई गई है। ग्वालियर में कुल 965 स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। इनमें सराफा बाजार, अचलेश्वर महादेव मंदिर, सन, मोटे गणेश मंदिर और करौली माता मंदिर प्रमुख रहेंगे। सराफा बाजार में व्यापारियों द्वारा मुहूर्त में होलिका दहन शाम 7:00 किया जाएगा। 15 फीट ऊंची होली में होलिका की गोद में प्रह्लाद की प्रतिमा विराजित थी। जहां शहर के हजारों लोग इस विशेष होलिका दहन को देखने पहुंचते हैं। इस दिन होली के साथ-साथ जहां पर राधा कृष्ण का शुभ मुहूर्त और विशेष योग पंडित घनश्याम शास्त्री ने बताया- 2 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा शाम 5:55 बजे प्रारंभ होगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का भी आगमन हो जाएगा, जो अगले दिन 3 मार्च को सुबह करीब 5:28 तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, किंतु इस बार 3 मार्च को पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी (शाम के समय) नहीं है इसलिए 2 मार्च को ही दहन शास्त्रोक्त है।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2 मार्च की 6:21 बजे से 7:19 बजे तक रहेगा। वहीं सामान्य मुहूर्त रात्रि 2:37 से पूर्व तक रहेगा, इसके साथ वर्जित समय रात्रि 2:37 से 4:33 के मध्य दहन कदावी न करें। सनातन धर्म मंदिर में 3000 कंडों से जली होली शहर के प्रमुख सनातन धर्म मंदिर में परंपरा के अनुसार रात 7:00 बजे होलिका दहन किया जाएगा। यहां 3000 कंडों से बनी होली जलाई जाएगी। इस दौरान श्रद्धालुओं ने होलिका की परिक्रमा कर पूजा-अर्चना की और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देंगे। होलिका दहन की यह होती हैं विधि ज्योतिष आचार्य घनश्याम शास्त्री के अनुसार, होलिका दहन से पहले लकड़ियों को कच्चे सूत से तीन या सात बार लपेटना चाहिए। इसके बाद गंगाजल या शुद्ध जल, फूल, कुमकुम, माला, रोली, अक्षत, बताशे, गुड़, साबुत हल्दी, गुलाल और नारियल से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। हिंदू रीति-रिवाज में नवविवाहिता के लिए विशेष परंपरा शास्त्रों के अनुसार होलिका अष्टक के दौरान नवविवाहिता को ससुराल की पहली होली नहीं देखनी चाहिए। इसलिए परंपरा के अनुसार, ऐसी युवतियों को पहली होली मायके में मनाने की सलाह दी जाती है। ग्वालियर में होलिका दहन के साथ ही रंगों के इस उत्सव की शुरुआत हो गई है, जो अब रंग पंचमी तक जारी रहेगा।

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