उज्जैन में सोमवार सुबह शाही मस्जिद के बाहर अचानक तनाव बढ़ गया। सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद का एक हिस्सा हटाने की कार्रवाई शुरू हुई तो विरोध कर रहे लोग पुलिस के सामने आ गए। पथराव हुआ, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज करना पड़ा। नमाज के वक्त कार्रवाई रोकनी पड़ी और शहर के कई बाजार व निजी स्कूल बंद रहे। उज्जैन में आखिर हो क्या रहा है, नौबत यहां तक कैसे पहुंची, क्या बाकी धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई नहीं हुई; मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… सवाल 1: शाही मस्जिद का कितना हिस्सा हटाया जा रहा है और क्यों? जवाब- पूरी मस्जिद नहीं, बल्कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा हिस्सा हटाया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन में दो सड़कें 15 मीटर चौड़ी की जा रही हैं। शाही मस्जिद कोयला फाटक से कंठाल चौराहा और सती गेट होते हुए गोपाल मंदिर जाने वाली सड़क पर है, जो आगे महाकाल मंदिर से जुड़ती है। इस हिस्से की लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर है और इसमें 323 मकान प्रभावित हो रहे हैं। नगर निगम ने कोर्ट में कहा कि शाही सवारी, पेशवाई और सिंहस्थ के दौरान भीड़ व जाम से बचने के लिए सड़क चौड़ीकरण जरूरी है। मस्जिद का कितना हिस्सा हटेगा, इस पर अब तक अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं.. सवाल 2: पथराव और आंसू गैस तक बात कैसे पहुंची? जवाब: नोटिस से शुरू हुई बात 9 सितंबर को कोर्ट पहुंची और सोमवार को सड़क पर आ गई। A. नोटिस: निगम ने मस्जिद प्रबंधन को हिस्सा हटाने के 3 नोटिस दिए। B. 9 सितंबर: इंदौर बेंच में जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने मस्जिद पक्ष (वक्फ पंचायत मोचियान से जुड़े दो पक्ष) की याचिकाएं खारिज कर दीं। स्टे नहीं मिला। कमेटी ने डबल बेंच (दो जजों की बेंच) में अपील की। C. रविवार, 27 सितंबर: पुलिस, RAF और STF के 600 से ज्यादा जवानों ने फ्लैग मार्च किया। रात में प्रशासन और शहर काजी खलीकुर्रहमान के बीच सहमति बनी कि मशीनें नहीं चलेंगी और मस्जिद से जुड़े लोग खुद हिस्सा हटाएंगे। D. सोमवार, 28 सितंबर, सुबह: काम शुरू हुआ। मस्जिद से जुड़े कुछ लोग हथौड़े से मेहराब हटाते हुए रो पड़े और अल्लाह से माफी मांगी। तभी समाज का दूसरा गुट विरोध में उतर आया। सवाल 3: हाईकोर्ट ने क्या कहा और समझौते में क्या तय हुआ? जवाब: कोर्ट ने अपील खारिज कर दी और नगर निगम की ओर से दिए गए आश्वासनों को बाध्यकारी माना। सुनवाई में कमेटी की ओर से समझौते की कुछ शर्तें बताई गईं। समझौते की शर्तें… » कटे हिस्से के बदले मस्जिद को TDR और FAR मिलेगा, जिससे वह ऊंचाई और मीनार बना सके। FAR यानी प्लॉट पर कितना निर्माण हो सकता है। TDR यानी वह निर्माण-अधिकार, जो जमीन गंवाने पर कहीं और इस्तेमाल किया जा सकता है। » यह समझौता कमेटी के वकील की बताई शर्तों पर आधारित है। निगम की तरफ से लिखित पुष्टि अभी नहीं आई है। » पहले 9 सितंबर को सिंगल बेंच ने 27 पेज के आदेश में माना था कि निगम ने मस्जिद प्रबंधन को सुनवाई का मौका दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्रवाई एक ही धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है और निगम उज्जैन विकास योजना-2035 के तहत कार्रवाई कर सकता है। यह योजना शहर के भविष्य के नक्शे का सरकारी दस्तावेज है, जिसमें सड़कें और जमीन का उपयोग तय होता है। सवाल 4: मस्जिद पक्ष और प्रशासन की दलील क्या है? जवाब: मामले में कुल चार पक्ष हैं। 1. मस्जिद कमेटी और वक्फ पक्ष: मस्जिद सदियों पुरानी है। इमाम ने इसके 1390 में बनने का दावा किया है। रिपोर्ट्स में 1925 के सिंधिया राजघराने के दस्तावेज, 1975 में सड़क के लिए जमीन देने और 1985 के राजपत्र में उल्लेख की बात है। ये सब पक्ष के दावे हैं, जिनकी पुष्टि अलग से नहीं हुई है। पक्ष का कहना है कि वक्फ बोर्ड को उचित नोटिस नहीं मिला और सड़क का अलाइनमेंट बदला जा सकता है। पक्ष ने अनुच्छेद 25 का भी हवाला दिया। याचिका में जमातखाना (नमाज की जगह), करीब 120 फीट ऊंची मीनार और मजहर चौक प्रभावित होने की बात थी। 2. प्रशासन: सिंहस्थ में 30-40 करोड़ श्रद्धालुओं तक का अनुमान है, इसलिए चौड़ीकरण जरूरी है। CM ने 40 करोड़ से ज्यादा का आंकड़ा दिया। कलेक्टर ने अफवाहों से बचने की अपील की। वक्फ बोर्ड को नोटिस न मिलने के दावे पर कोर्ट पहले ही निगम के पक्ष में राय दे चुका है। 3. शहर काजी और राज्य वक्फ बोर्ड: काजी ने कहा कि प्रशासन और कमेटी में रात में सहमति बनी थी और कमेटी खुद हिस्सा हटा रही थी। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि पूरी मस्जिद नहीं हट रही, सिर्फ सड़क की जद वाला हिस्सा हट रहा है। दोनों ने अफवाहों से बचने को कहा। 4. समाज का दूसरा गुट: कार्रवाई का विरोध कर रहा है। सोमवार को इसी विरोध में स्थिति बिगड़ी। वहीं कुछ हिंदू संगठनों ने मांग की थी कि किसी भी धार्मिक निर्माण पर कार्रवाई हो, तो सभी के लिए एक जैसी नीति अपनाई जाए। सवाल 5: इसी सड़क पर और भी धार्मिक स्थल हैं- क्या उन्हें भी हटाया गया? जवाब- शाही मस्जिद अकेली नहीं है। उसी सड़क पर 15 में से 12 धार्मिक स्थल हटाए जा चुके हैं। आगे क्या होगा मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़ें… उज्जैन के खड़े हनुमान हिल क्यों नहीं रहे- शिला के नीचे ऐसा क्या है? बैतूल के जेएच कॉलेज में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान शुक्रवार रात 17 साल की छात्रा प्रतीक्षा वर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ी। चक्कर आने के बाद वह बेहोश हुई, अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि तेज डीजे की आवाज ही मौत की वजह बनी…पूरी खबर पढ़ें।
