होटल रेडिसन के किचन में 50 किलो सड़े आलू… सयाजी के फ्रीजर में एक्सपायर्ड फिश-चिकन… डोमिनोज-KFC आउटलेट्स पर चूहों के अवशेष और मक्खियां.. मध्य प्रदेश के बड़े शहरों में खाद्य सुरक्षा विभाग (FDA) की ताबड़तोड़ छापेमारी चर्चा में है। विभाग 12 से 26 सितंबर तक विशेष अभियान चलाकर मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। इस कार्रवाई को देखकर लग रहा है कि मिलावटखोरों पर शिकंजा कस रहा है, लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि मौके पर कार्रवाई करने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग अदालत में मामलों को अंजाम तक पहुंचाने में कमजोर साबित हो रहा है। पिछले 5 साल में दर्ज मामलों में 97% आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हुआ, जबकि केवल 3% मामलों में ही सजा हो सकी। आखिर कार्रवाई के बाद मामले अदालत में क्यों कमजोर पड़ जाते हैं? भास्कर ने एक्सपर्ट्स से बात कर इसकी वजह समझी और अफसरों से भी इस मामले में जवाब लिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 5 साल का रिपोर्ट कार्ड: 9,406 सैंपल फेल, दोषसिद्धि सिर्फ 243 मामलों में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने जुलाई 2026 में राज्यसभा में जो आंकड़े पेश किए, उनके मुताबिक 2021 से जून 2026 तक मध्य प्रदेश में 68,932 सैंपल जांचे गए। इनमें 9,406 अमानक या मिसब्रांडेड पाए गए। इन मामलों में आपराधिक कार्रवाई के तहत सिर्फ 243 मामलों में दोषसिद्धि हुई। वहीं 10,263 मामलों का निपटारा जुर्माना, कंपाउंडिंग या दीवानी कार्रवाई के जरिए किया गया। हाईकोर्ट के 2 मामले: कोर्ट में क्यों कमजोर पड़ जाते हैं विभाग के केस? भास्कर ने हाईकोर्ट पहुंचे दो मामलों की पड़ताल की। इनसे पता चलता है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया में खामियों के चलते आरोपियों को अदालत से राहत कैसे मिली। 1. ग्वालियर श्रीराम डेयरी मामला: सैंपल रिपोर्ट में 4 महीने की देरी
8 अगस्त 2023 को श्रीराम डेयरी से दही का सैंपल लिया गया। इसमें सॉलिड्स नॉन-फैट (MSNF) 7.5% मिला, जबकि तय मानक 8.7% था। एडजुकेटिंग ऑफिसर ने 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट के मुताबिक, सैंपल 14 अगस्त को भोपाल लैब भेजा गया, लेकिन रिपोर्ट 12 दिसंबर को यानी करीब 4 महीने बाद आई। तय समय 14 दिन था। कोर्ट ने माना कि इतनी देरी में सैंपल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने 1 लाख रुपए का जुर्माना रद्द कर दिया। 2. रतलाम दूध सैंपल मामला: सैंपलिंग प्रक्रिया में खामी बनी बचाव का आधार
15 अक्टूबर 2011 को रतलाम में दूध का सैंपल लिया गया, जिसे लैब भेजने में 2 दिन की देरी हुई। प्रिजर्वेटिव के तौर पर फॉर्मेलिन डालने की तय प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। हर बोतल में सीधे 40 बूंदें डाली गईं। अधिकारियों के हस्ताक्षर एक सप्ताह बाद प्रमाणित हुए। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने भी फैसला बरकरार रखा और सैंपलिंग प्रक्रिया में खामियों को महत्वपूर्ण माना। एक्सपर्ट बोले- ‘केवल मुहिम से नहीं रुकेगी मिलावट’ सीनियर एडवोकेट अजय गुप्ता के मुताबिक, फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई में तीन प्रमुख कमियां हैं, जिनसे आरोपियों को अदालत में फायदा मिल जाता है हालिया एक्शन: बड़े ब्रांड्स के किचन में मिली गंदगी और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री त्योहारों के सीजन को देखते हुए 12 से 26 सितंबर 2026 तक मप्र में खाद्य सुरक्षा विभाग का विशेष अभियान चल रहा है। इस दौरान कई आउटलेट्स और होटलों में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी खामियां सामने आईं अफसर बोले- टेस्टिंग क्षमता बढ़ा रहे, जल्द शुरू होंगी नई लैब FDA कमिश्नर मनोज पुष्प ने दैनिक भास्कर को बताया, “अभियान के तहत पूरे प्रदेश में एक हफ्ते में 400 जगहों पर कार्रवाई की गई है। जहां स्थिति गंभीर थी, वहां लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इसे केवल एक बार की कार्रवाई तक सीमित नहीं रखते हुए निरंतर प्रक्रिया बनाया जा रहा है।”
