मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की औसत 33.7 इंच बारिश हो चुकी है। यह कोटे की 90.3 प्रतिशत है, जो ‘सामान्य से कम’ की कैटेगिरी में आती है। 96 से 104% तक होने वाली बारिश को ही ‘सामान्य बारिश’ माना जाता है। हालांकि, प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। IMD (मौसम केंद्र) की माने तो भोपाल, ग्वालियर समेत 22 जिलों को छोड़ दें तो बाकी में कोटा पूरा नहीं हुआ है। इंदौर संभाग सबसे ज्यादा पिछड़ा है। मानसून को अब 11 दिन ही बाकी बचे हैं। ऐसे में तेज बारिश का एक दौर आने की संभावना है। इसके बाद कुछ जिलों की तस्वीर सुधर सकती है। इधर, प्रदेश के जिन 22 जिलों में 100% या इससे ज्यादा बारिश हो चुकी है, उनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दतिया, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। वहीं, 90 से 99 प्रतिशत वाले जिलों में मंडला, पन्ना, मंदसौर और मुरैना शामिल हैं। यहां बारिश की दो-तीन तेज झड़ी लगते ही कोटा फुल हो सकता है। 30 सितंबर तक मानसूनी सीजन मौसम विभाग के अनुसार, मानसून सीजन 1 जून से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलता है। इस दौरान होने वाली बारिश मानसूनी कहलाती है। हालांकि, कई बार अक्टूबर में भी बारिश होती है, जो एक तरह से बोनस के रूप में ही होती है, लेकिन इसे मौसम विभाग रिकॉर्ड नहीं करता। इस हिसाब से प्रदेश में मानसून सीजन के 17 दिन और बाकी है। भोपाल के कलियासोत-भदभदा फिर फुल हुए इस बार सितंबर में कई डैम ओवरफ्लो हुए। भोपाल के बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल तक पानी आने के बाद भदभदा और फिर कलियासोत डैम के गेट खोले गए। इसके अलावा बरगी, बाणसागर, गोपीकृष्ण समेत कई डैम लबालब हो चुके हैं। इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाण सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वर, जौहिला, कुंडालिया समेत कई डैम में भी 90 प्रतिशत या इससे अधिक पानी जमा है। शनिवार को भदभदा का एक और कलियासोत के दो गेट खोले गए। इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो आखिरी तक तक जारी है। सितंबर के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर बना रहा। तीसरे सप्ताह में पश्चिमी हिस्से में अच्छी बारिश हुई। आखिरी सप्ताह में प्रदेशभर में हल्की बारिश होने का अनुमान है। प्रदेश में अभी कोटे की 90.3% बारिश रिकॉर्ड IMD की माने तो प्रदेश में अब तक 855.7 मिमी यानी, 33.7 इंच (90.3 प्रतिशत) बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36 इंच (914 मिमी) की तुलना में 2.3 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 10% बारिश कम हुई है। 32 जिलों में 5% से 48% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 24% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। कई जिलों में बाढ़ के हालात बने। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन शनिवार तक आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत हो गया। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 48% कम पानी गिरा है। इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। जून में सूखा, जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह से अब तक भी प्रदेश में 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। ऐसे समझें बारिश का गणित… मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, बारिश का एक सिस्टम एक्टिव हो रहा है। इसके प्रभाव से निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। यह प्रणाली आगामी दिनों में दक्षिण ओडिशा–उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकती है। इसका असर मध्य प्रदेश में भी बना रहेगा। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम
