जबलपुर में लंबी जांच के बाद शुक्रवार देर रात जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में पदस्थ उच्च वर्ग लिपिक-2 और कर्मचारी नेता वंश बहोर पटेल (62) के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पटेल का करीब 10 दिन बाद रिटायरमेंट होना है। लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। 1985 में दैनिक वेतन भोगी के रूप में की थी नियुक्ति लोकायुक्त जांच के मुताबिक वंश बहोर पटेल करीब 41 साल से विश्वविद्यालय में नौकरी कर रहे हैं। वर्ष 1985 में दैनिक वेतन भोगी के रूप में नियुक्त होने के बाद वर्ष 1994 में उनकी नियमित कर्मचारी के तौर पर नियुक्ति हुई। जांच में नौकरी के दौरान उनकी आय और संपत्ति में बड़ा अंतर सामने आया है। बरेला क्षेत्र में आलीशान मकान, 25 एकड़ कृषि भूमि भी जांच के दौरान लोकायुक्त टीम को बरेला के सालीबाड़ा, पड़रिया और नीमखेड़ा में पटेल के आलीशान मकानों की जानकारी मिली। इसके अलावा ग्रामीण हिनोतिया में करीब 25 एकड़ कृषि भूमि और एक ट्रैक्टर भी सामने आया है। जांच में एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े वाहनों का भी उल्लेख है। 91.88 लाख आय, खर्च 1.68 करोड़ रुपए शुरुआती जांच में पटेल की कुल आय 91 लाख 88 हजार 611 रुपए आंकी गई है, जबकि कुल व्यय 1 करोड़ 68 लाख 51 हजार 337 रुपए पाया गया। लोकायुक्त के अनुसार आय की तुलना में 85.57 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति सामने आई है। पटेल के खिलाफ करीब दो साल पहले लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत पहुंची थी। इसके बाद डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच कराई गई। लंबी जांच के बाद शुक्रवार देर रात एफआईआर दर्ज की गई। कर्मचारी नेता के तौर पर भी सक्रिय रहे विश्वविद्यालय में कर्मचारी नेता के रूप में पटेल विभिन्न कर्मचारी प्रदर्शनों और अन्य मामलों में नेतृत्व करते रहे हैं। रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले आय से अधिक संपत्ति की एफआईआर दर्ज होने के बाद विश्वविद्यालय में इसकी चर्चा है। लोकायुक्त पुलिस ने पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
