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सागर शराबकांड में 36 मौतों के बाद पुलिस की FIR:दोष सिद्ध हुआ तो उम्रकैद से फांसी तक की सजा; जानिए किस धारा में कितनी सजा

सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ में जहरीली शराब से हुई करीब 36 मौतों के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। दोनों थाना क्षेत्रों में दर्ज अलग-अलग FIR में अब तक करीब 33 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें से 19 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी मनीष लोधी समेत कुछ आरोपी फरार हैं। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। पुलिस जब्त शराब के सैंपल की FSL जांच रिपोर्ट और मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को केस की सबसे अहम कड़ी मानकर चल रही है। यदि जांच में शराब के जहरीली या मानव जीवन के लिए खतरनाक होने और मौतों का उससे संबंध साबित होता है, तो आरोपियों पर गंभीर धाराओं में कार्रवाई का आधार मजबूत होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सागर दौरे के बाद पुलिस-प्रशासन को आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद FIR में ऐसी धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें दोष सिद्ध होने पर लंबी जेल से लेकर उम्रकैद और कुछ परिस्थितियों में मृत्युदंड तक का प्रावधान है। दैनिक भास्कर ने एक्सपर्ट और पुलिस की पड़ताल की। पढ़िए एक्सक्लूसिव रिपोर्ट… 10 वर्ष के कारावास से उम्रकैद तक की सजा पुलिस थानों में दर्ज एफआईआर के अनुसार, शराबकांड के मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 105 लगाई है, जो पहले आईपीसी की धारा 304 थी। इसके अलावा धारा 123, आबकारी एक्ट की धारा 49(A) और धारा 3 (5) के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में पुलिस कार्रवाई करते हुए अब तक 33 लोगों को आरोपी बना चुकी है, जिनमें से 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्य आरोपी मनीष लोधी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। दो फरार आरोपी रवि लखेरा और शिवांजय सिंह राजपूत को शॉर्ट एनकाउंटर में पुलिस ने पकड़ा था। केस की सबसे अहम कड़ी: शराब की FSL रिपोर्ट पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से शराब जब्त कर उसके सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। अब FSL रिपोर्ट यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि शराब में ऐसा कौन-सा पदार्थ था, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक था। कानूनी जानकारों के मुताबिक केवल यह आरोप लगना पर्याप्त नहीं होगा कि शराब जहरीली थी। जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य से यह साबित करना होगा कि जब्त शराब में हानिकारक या जहरीला पदार्थ मौजूद था और मृतकों की मौत का संबंध उसी शराब से था। इसके साथ मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण होगी। यदि PM रिपोर्ट में मौत का कारण जहरीली शराब का सेवन सामने आता है और FSL रिपोर्ट से शराब में खतरनाक पदार्थ की पुष्टि होती है, तो दोनों साक्ष्य अभियोजन के केस को मजबूत कर सकते हैं। मेमोरेंडम कथनों के आधार पर बनाए ज्यादातर आरोपी अधिवक्ता अमित गोस्वामी ने बताया की पुलिस के द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में अधिकतर लोगों को धारा 27 के मेमोरेंडम कथनों के आधार पर अभियुक्त के रूप में समायोजित किया गया है। समायोजित अभियुक्त के पास से जब्ती के कोई अलग से तथ्यों को उजागर नहीं किया है। न ही उनके द्वारा यह तथ्य दिए हैं कि किस संबंधित दुकान पर ऐसी विषैली शराब को पाया गया। शराब मानव जीवन के लिए हानिकारक थी, इसका निराकरण एफएसएल द्वारा किया जा सकता है। यह मौखिक रूप से नहीं कहा जा सकता है। मामले में दर्ज एफआईआर में कुछ लोगों को बचाओ मिल सकता है, जिनको किसी दूसरे के नाम बताने के आधार पर अभियुक्त बनाया गया है। उनसे कोई रिकवरी नहीं है। लेकिन एफएसएल रिपोर्ट में शराब के विषैली होने की पुष्टि होती है तो दोषियों को सजा मिलेगी। सबसे बड़ी चुनौती: हर आरोपी की भूमिका साबित करना शराबकांड में अब पुलिस का फोकस केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जहरीली शराब कहां तैयार हुई, किसने उसे तैयार कराया, किसने सप्लाई की और किन लोगों के जरिए गांवों तक पहुंचाई गई। पुलिस आरोपियों से जुड़े दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटा रही है। जांच के दौरान यदि किसी आरोपी की भूमिका से जुड़े नए तथ्य सामने आते हैं तो FIR में अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। एक सवाल: मृतकों के मरणासन्न बयान क्यों नहीं हुए? शराब पीने के बाद बीमार हुए कई लोग अस्पताल पहुंचे और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दौरान कई मामलों में पुलिस ने मरणासन्न बयान दर्ज नहीं किए। यह बात राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के बंडा दौरे के दौरान सामने आई। उन्होंने मृतकों के परिजन से मुलाकात की और पुलिस को उनके बयान तत्काल दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी परिजन की ओर से अलग FIR दर्ज कराने की मांग की जाती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाए। पहली FIR… 20 रुपए कम कीमत पर दी शराब बंडा थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, फरियादी अनूप सिंह लोधी ने बताया कि उसके गांव में करीब 8 लोग अवैध रूप से शराब बेचने का काम करते हैं। 4 सितंबर को मैं अपने भतीजे राजेंद्र लोधी के साथ गांव में जुझार लोधी की दुकान पर गया था। जुझार लोधी मुझसे बोलने लगा कि एक नया सस्ता ब्रांड हमें बरेठी के लाइसेंसी शराब ठेकेदार यशवंत सिंह, मनीष लोधी और आशीष साहू निवासी बंडा के द्वारा आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रविंद्र, रोहित, अनिकेत गंधर्व और माखन के माध्यम से अपनी गाड़ी से दे गया है। आपको शराब दुकान से 20 रुपए कम कीमत में मिलेगी। मैंने कहा कि मुझे आज शराब नहीं पीना है। राजेंद्र बोला कि नकली जहरीली शराब तो नहीं है। जुझार लोधी बोला नहीं ब्रांड वही है उसको मनीष और आशीष ने शराब के फार्मूले से बनाया है। आपको बाजार से 20 रुपए सस्ते में मिलेगा। राजेंद्र ने जुझार की दुकान से एक क्वार्टर देशी शराब बंबइया 70 रुपए में खरीदा और पिया। रात में राजेंद्र अपने घर चला गया। जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी। उसे बंडा अस्पताल लेकर गए। जहां से सागर रेफर कर दिया। इलाज के दौरान सागर में राजेंद्र की मौत हो गई। इसके अलावा करतार सिंह लोधी, दिग्विजय सिंह लोधी की भी शराब पीने से मौत हो गई। दूसरी FIR : 60 रुपए में दी शराब विनायका थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, फरियादी सुरेंद्र पिता गजराज लोधी निवासी पाटन ने शिकायत में बताया कि मेरे गांव पाटन में राम सिंह, अरविंद, भगवान सिंह, देवी सिंह लोधी और मान सिंह चोरी-छिपे अवैध रूप से शराब बेचते हैं। 5 सितंबर की शाम को राम सिंह लोधी के पास से मेरा भांजा रोशन पिता जगन्नाथ शराब पीकर वापस आया। घर पर उसे उल्टियां होने लगी। मैंने उससे पूछा तो रोशन ने बताया कि मैं गांव में राम सिंह के यहां पर शराब पीने गया था। राम सिंह बोला कि मेरे पास नई शराब सस्ती आई है। जिसको चंदू और चंद्रभान सिंह राजपूत, शराब ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा के द्वारा निर्मित कराया गया है। गाद्दीदार रोहित शिवहरे, कर्मचारी राघवेंद्र सिंह, धर्मेंद्र राजपूत, सोहन सिंह के माध्यम से राम सिंह लोधी और अन्य जगहों पर भेजी जाती है। जिससे कि शराब की कीमत कम होकर 60 रुपए में बेच रहे हैं। राम सिंह से मेरे भांजे रोशन ने कहा कि नकली जहरीली शराब तो नहीं है तो राम सिंह बोला नहीं ब्रांड वही है, उसको शराब के फार्मूले से बनाया गया है तो आपको बाजार से 30 रुपए सस्ते में मिलेगा। रोशन ने राम सिंह की दुकान से एक क्वार्टर देशी शराब सागर गोल्ड 60 में खरीदा और पिया। घर पर रात में चला गया। घर आते ही भांजे की तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो उसे लेकर बंडा अस्पताल पहुंचे। जहां इलाज किया गया। इलाज के दौरान भांजे रोशन की मौत हो गई। इन पर FIR पुलिस ने जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक, विशाल लोधी और राजा सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं विनायका थाना पुलिस ने लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, राम सिंह लोधी, चंद्रभान राजपूत, अरविंद यादव, भगवान सिंह, मानसिंह अहिरवार समेत अन्य पर एफआईआर दर्ज की। यह खबर भी पढ़ें… MP शराबकांड-फरार आरोपी शिवांजय का शॉर्ट एनकाउंटर मध्य प्रदेश में सागर जहरीली शराबकांड में फरार आरोपी शिवांजय राजपूत (21) को पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है। सूचना मिली थी कि शिवांजय कठुआ नाला के पास जंगल से होता हुआ अपने गांव छापरी पहुंच रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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