मध्य प्रदेश में कोटे की 32.1 इंच यानी, 86% बारिश हो चुकी है। कुल 55 में से 16 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है, 34 जिले पिछड़े हुए हैं। इनमें इंदौर संभाग की तस्वीर ठीक नहीं है। IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, मानसूनी सीजन को अभी 17 दिन बाकी है। ऐसे में उम्मीद है कि कई जिलों की तस्वीर ठीक हो सकती है। प्रदेश के जिन 16 जिलों में 100% या इससे ज्यादा बारिश हो चुकी है, उनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। वहीं, 90 से 99 प्रतिशत वाले जिलों में खरगोन, मंडला, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, आगर-मालवा, अनूपपुर है। यहां बारिश की दो-तीन तेज झड़ी लगते ही कोटा फुल हो सकता है। 30 सितंबर तक मानसूनी सीजन
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून सीजन 1 जून से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलता है। इस दौरान होने वाली बारिश मानसूनी कहलाती है। हालांकि, कई बार अक्टूबर में भी बारिश होती है, जो एक तरह से बोनस के रूप में ही होती है, लेकिन इसे मौसम विभाग रिकॉर्ड नहीं करता। इस हिसाब से प्रदेश में मानसून सीजन के 17 दिन और बाकी है। बारिश से सितंबर में ओवरफ्लो हुए डैम
इस बार सितंबर में कई डैम ओवरफ्लो हुए। भोपाल के बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल तक पानी आने के बाद भदभदा और फिर कलियासोत डैम के गेट खोले गए। इसके अलावा बरगी, बाणसागर, गोपीकृष्ण समेत कई डैम लबालब हो चुके हैं। इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाण सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वर, जौहिला, कुंडालिया समेत कई डैम में भी 90 प्रतिशत या इससे अधिक पानी जमा है। नर्मदा, मंदाकिनी समेत कई नदियां उफान पर चल रही है। सप्ताह के आखिरी में भी तेज बारिश का दौर चला। इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून
बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो आखिरी तक तक जारी है। सितंबर के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर बना रहा। दूसरे सप्ताह में पश्चिमी हिस्से में तेज बारिश का अलर्ट है। अब तक 32.1 इंच बारिश, 22 जिलों में ज्यादा
IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 814.4 मिमी यानी, 32.1 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 34.4 इंच (874.4 मिमी) की तुलना में 2.3 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 7 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 1% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 13% बारिश कम हुई है। 33 जिलों में 1% से 55% तक कम बारिश
प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 1% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 2% से 26% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। बीते एक सप्ताह से यहां के कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इससे आंकड़े में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों में बेहतर रहा है, लेकिन बुधवार तक आंकड़ा एक प्रतिशत हो गया। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 55% कम पानी गिरा है। इन 22 जिलों में ज्यादा बारिश
IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़्र, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। ऐसे समझें बारिश का गणित… 50 इंच से ज्यादा- सतना और मऊगंज, मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, एमपी में नए सिस्टम के एक्टिव होने से इसका असर पश्चिमी हिस्से में देखने को मिल रहा है। यह सिस्टम अगले दो दिन और एक्टिव रहेगा। इससे बारिश के आंकड़े में सुधार की उम्मीद है। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम
