मंदसौर के गरोठ में शुक्रवार रात ढाबे पर काम करने वाले 50 वर्षीय परमानंद कथिरिया निर्माणाधीन पुलिया से 8 से 10 फीट नीचे गिर गए। नीचे पड़ा करीब साढ़े 3 फीट लंबा सरिया उनकी आंख के पास से चेहरे में घुसकर कान के पीछे से आर-पार निकल गया। परमानंद करीब 10 से 15 मिनट तक सुनसान जगह पर तड़पते रहे। वहां से गुजर रहे लोगों ने उन्हें देखा और अस्पताल पहुंचाया। सीतामऊ और मंदसौर के बाद उन्हें रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रात करीब 2 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ और सुबह 5 बजे तक चला। सर्जरी विभाग के 10 डॉक्टरों और एनेस्थीसिया टीम ने बिना बड़ा चीरा लगाए सरिया निकाला। डॉक्टरों के मुताबिक ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था। सरिया निकालने में जान जाने और पैरालिसिस का खतरा था। अब परमानंद की हालत ठीक है और वे चल-फिर रहे हैं। तीन तस्वीरें देखिए… गरोठ से सीतामऊ पहुंचे, घर जाते समय हुआ हादसा परमानंद गरोठ में अपने साले के ढाबे पर कुक का काम करते हैं। शुक्रवार रात करीब 10 बजे वे बस से सीतामऊ पहुंचे और पैदल घर के लिए निकले। घर से करीब आधा किलोमीटर पहले निर्माणाधीन पुलिया के पास बैरिकेड लगा था। परमानंद ने बैरिकेड का सहारा लिया तो वह उसके साथ नीचे जा गिरे। नीचे पड़ा सरिया आंख के पास से चेहरे में घुसकर कान के पीछे से बाहर निकल गया। 10-15 मिनट बाद लोगों ने देखा हादसे के बाद परमानंद पुलिया के नीचे फंसे रहे। उन्होंने बताया कि करीब 10 से 15 मिनट तक वहां कोई मदद नहीं मिली। बाद में कुछ लड़के वहां से गुजरे और उन्हें देखकर लोगों को सूचना दी। 108 एंबुलेंस से परमानंद को सीतामऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में मंदसौर जिला अस्पताल रेफर किया गया। मंदसौर में सरिया नहीं निकाला, रतलाम भेजा रात करीब 11:30 बजे परमानंद मंदसौर जिला अस्पताल पहुंचे। ड्यूटी डॉक्टरों ने सरिया निकालने की कोशिश नहीं की। सर्जिकल स्पेशलिस्ट डॉ. प्रीति मानावत की टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक संभव इलाज किया। डॉक्टरों के मुताबिक, सरिया आंख के पास से घुसकर चेहरे के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचाते हुए कान के पीछे निकला था। कान के पीछे करीब 5 से 6 इंच लंबा और गहरा घाव था। नसों और दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान का खतरा देखते हुए सरिया वहीं छोड़कर रात करीब 1 बजे रतलाम रेफर किया गया। डॉ. प्रीति मानावत ने बताया कि 21 साल के करियर में उन्होंने इस तरह का केस पहली बार देखा है। रतलाम में चार घंटे चला ऑपरेशन रतलाम मेडिकल कॉलेज में रात करीब 2 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ। सर्जरी विभाग के 10 डॉक्टरों के साथ एनेस्थीसिया टीम भी शामिल रही। डॉ. प्रवीणसिंह बघेल ने बताया कि पहले सरिया निकालने की पूरी प्लानिंग की गई। ऑपरेशन बेहद रिस्की था। सरिया निकालते समय मरीज की जान जाने के साथ पैरालिसिस होने की भी आशंका थी। सरिया दोनों तरफ करीब एक-एक फीट बाहर निकला हुआ था। उसके आसपास की चमड़ी हटाकर निकालने पर नसों के कटने का खतरा था। इसलिए बिना चमड़ी हटाए और बिना बड़ा चीरा लगाए ऑपरेशन किया गया। सिर के पीछे से निकाला सरिया डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान सरिया सिर के पीछे की तरफ से बाहर निकाला। सुबह करीब 5 बजे ऑपरेशन पूरा हुआ। इसके बाद सिर के पीछे करीब 10 और आंख के पास 3 टांके लगाए गए। डॉक्टरों की निगरानी में परमानंद को तीन से चार दिन रखा जाएगा। हालत ठीक रहने पर डिस्चार्ज किया जाएगा। बोले- इंदौर ले जाने का समय नहीं था परमानंद ने बताया कि रतलाम में पहले डॉक्टरों ने इंदौर ले जाने की बात कही थी। उनके साले ने कहा कि इंदौर ले जाने तक का समय नहीं है और रतलाम में ही इलाज की कोशिश की जाए। इसके बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। परमानंद ने कहा, “मैं ठीक हूं, चल-फिर रहा हूं। कोई तकलीफ नहीं है। मैं गरीब आदमी हूं। सिटी स्कैन भी बाहर करवाया है।” बेटे ने बताया- घर से आधा किमी पहले गिर गए बेटे प्रवीण के मुताबिक, पिता गरोठ से बस में सीतामऊ पहुंचे थे। घर से करीब आधा किलोमीटर पहले पुलिया का निर्माण चल रहा था। बैरिकेड का सहारा लेते ही वे उसके साथ नीचे गिर गए। हादसे की सूचना मिलने पर प्रवीण मौके पर पहुंचे। वहां से 108 एंबुलेंस की मदद से पिता को सीतामऊ ले जाया गया, जहां से उन्हें मंदसौर और फिर रतलाम रेफर किया गया। ऑपरेशन में ये डॉक्टर शामिल रहे ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. प्रवीणसिंह बघेल, डॉ. देवेंद्र चौहान, शैलेन्द्र सिंह नर्गेश, डॉ. शिवम तोमर, डॉ. पिंकी केएम, डॉ. आशीष मेवाड़िया, डॉ. सजल यादव और डॉ. स्नेहा सहित सर्जरी विभाग के डॉक्टर शामिल रहे। एनेस्थीसिया की टीम ने भी सहयोग किया। परमानंद के साथ उनके बड़े भाई कारूलाल अस्पताल में हैं। फिलहाल डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं। …………………………….. ये खबर भी पढ़ें… बाउंड्रीवॉल का एंगल छात्र के गले से घुसा,मुंह से निकला खरगोन जिले के बड़वाह में 17 साल के छात्र के जबड़े में बाउंड्रीवॉल का एंगल घुसा और मुंह से आर-पार हो गया। छात्र जयंती माता रोड पर खेलते समय सीआईएसएफ परिसर की बाउंड्रीवाल लांघ रहा था। पढ़ें पूरी खबर…
