इटारसी के पास ग्राम सुपरली के कृषक कलाकार योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी ने अनाज की अहमियत को कला के जरिए दुनिया के सामने पेश करने का अनोखा तरीका अपनाया है। उन्होंने नई दिल्ली में हो रहे 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में आए विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और खास मेहमानों की तस्वीरें अलग-अलग अनाज के दानों से बनाई हैं। सोलंकी ने इन कलाकृतियों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी, सऊदी अरब के युवराज और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई खास मेहमानों के चित्र बनाए हैं। कलाकार ने क्या बताया? कृषक कलाकार पिछले कई दिनों से इन चित्रों को बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने अपनी कला में रागी, बाजरा, राजगिरा, कोदो, कुटकी, धान, गेहूं, तिल और खसखस जैसे पारंपरिक और मोटे अनाजों का उपयोग किया है। अलग-अलग रंग, आकार और बनावट वाले अनाज के दानों को बहुत बारीकी से सजाकर राष्ट्राध्यक्षों के चेहरों और तस्वीरों को सुंदर बनाया गया है। योगेंद्र पाल सिंह सोलंकी बताते हैं कि भारत में अनाज सिर्फ खाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और जीवन का अहम हिस्सा है। इसी सोच के साथ उन्होंने विदेशी मेहमानों का स्वागत फूलों या दूसरे पारंपरिक तरीकों से हटकर, भारत की मिट्टी और किसान की मेहनत से पैदा हुए अनाज से करने की कोशिश की है। मोटे अनाजों का किया इस्तेमाल इन कलाकृतियों में मोटे अनाजों का खास इस्तेमाल करने के पीछे एक संदेश भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार श्रीअन्न और मोटे अनाजों के इस्तेमाल और बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। कलाकार ने इसी सोच से प्रेरणा लेकर अपनी कलाकृतियों में पारंपरिक अनाजों को खास जगह दी है। अनाज से बनी इन तस्वीरों को नई दिल्ली में मौजूद संबंधित विदेशी दूतावासों में ईमेल के जरिए भेजने की तैयारी है। कलाकार का मकसद इन कलाकृतियों से भारत की कृषि विरासत, किसानों की मेहनत, मोटे अनाजों की उपयोगिता और भारतीय परंपरा का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाना है।
