नर्मदापुरम के नानपा-कुल्हड़ा रोड की बदहाली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। वे शुक्रवार को करीब 45 किलोमीटर पैदल चलकर शाम 7 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे और गेट के सामने बैठ गए। धरने के बीच ही इनमें से कुछ लोगों ने सड़क पर कंडे जलाकर बाटी-भर्ता पकाया। फिर सड़क पर ही बैठकर भोजन किया। रात गहराने पर वहीं बिस्तर बिछाकर सो गए। ये लोग 5 ट्रॉलियों में जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं। प्रदर्शन के मद्देनजर भारी पुलिस बल कलेक्ट्रेट पर मौजूद रहा। डिप्टी कलेक्टर सीमा बडोले और तहसीलदार सुरेखा यादव ने ग्रामीणों को मनाने की कोशिश की। इस पर महिलाओं ने कहा- आप एक बार उस रोड पर आकर देखें। छोटी गाड़ी से आना, तब हमारी समस्या का अहसास होगा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता राकेश गौर ने कहा- हम कलेक्टर सोमेश मिश्रा से नई और पक्की सड़क बनाने का लिखित आश्वासन चाहते हैं। उसके बाद ही यहां से उठेंगे। देखिए, तस्वीरें… सड़क के लिए 9 सितंबर से चल रहा आंदोलन बता दें कि नानपा-कुल्हड़ा सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले 9 सितंबर से आंदोलन चल रहा है। पहले दिन नानपा ढाना में रात 11 बजे तक धरना दिया गया। दूसरे दिन बुधवार को ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों में बैठ-लेटकर विरोध जताया। तीसरे दिन शुक्रवार को सुबह ग्रामीणों ने नानपा घाट पर नर्मदा पूजन किया। फिर कलेक्ट्रेट के लिए पैदल मार्च शुरू कर दिया। करीब 45 किमी चलने के बाद वे शाम 7 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे। दो हजार ग्रामीण 4 साल से उठा रहे परेशानी दरअसल, नर्मदापुरम जिले के नानपा, कुल्हड़ा और आसपास के इलाके को आपस में जोड़ने वाली 3.26 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक, इसका मुख्य कारण इस सड़क से अवैध रेत से भरे ओवरलोड डंपरों और ट्रकों का लगातार गुजरना है। बारिश में यह सड़क गड्ढों में बदल जाती है। कीचड़ भरे इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, मरीज, किसान और नर्मदा परिक्रमा करने वाले लोग जान जोखिम में डालकर निकलते हैं। लगभग दो हजार ग्रामीण बीते 4 साल से इस परेशानी को झेल रहे हैं। रेत माफिया के इस्तेमाल की दलील से अटका काम नानपा-कुल्हड़ा रोड को पक्का करने के लिए ग्रामीण विकास प्राधिकरण ने प्रस्ताव तैयार कर भोपाल भेजा था। 24 दिसंबर 2025 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव (ACS) के सामने इसका प्रेजेंटेशन हुआ। लेकिन जब ACS को पता चला कि इस रास्ते पर बंद खदानों से बिना रॉयल्टी के अवैध रेत का परिवहन होता है, तो उन्होंने सड़क निर्माण की मंजूरी पर रोक लगा दी। विभाग का तर्क है कि जब तक अवैध वाहन चलेंगे, सड़क बनाने का कोई फायदा नहीं क्योंकि वह फिर टूट जाएगी। ग्रामीण बोले- प्रशासन नाकाम, खामियाजा हम क्यों भुगतें? ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकना पुलिस और प्रशासन का काम है, न कि जनता का। प्रशासन अपनी नाकामी का बहाना बनाकर ग्रामीणों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित नहीं कर सकता। प्रदर्शन के मिनट-टु मिनट अपडेट के लिए नीचे ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…
