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इंदौर में 8 महीने बाद MIC में जीतू की वापसी:बिजली-यांत्रिकी विभाग की जिम्मेदारी मिली

इंदौर के पार्षद कमलेश कालरा से विवाद के बाद पार्टी से निष्कासन और MIC से हटाए गए जीतू यादव की अब पूरी तरह वापसी हो गई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात को आदेश जारी कर जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू यादव को मेयर-इन-काउंसिल (MIC) का सदस्य नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार भी सौंपा गया है। इससे पहले पुलिस से क्लीन चिट मिलने के बाद 18 अगस्त को जीतू यादव की बीजेपी में वापसी हुई थी, लेकिन उन्हें MIC में शामिल नहीं किया गया था। अब पार्टी स्तर पर हुई चर्चा के बाद उन्हें फिर से MIC में लेने पर सहमति बनी और महापौर ने इसकी औपचारिक घोषणा कर दी। भोपाल में बैठक के बाद रास्ता साफ
जीतू यादव की MIC में वापसी को लेकर भोपाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ उनके करीबी नेताओं की मुलाकात हुई थी। इस बैठक में विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला समेत अन्य नेताओं के शामिल होने की बात सामने आई है। बैठक में जीतू यादव का पक्ष रखा गया और उन्हें दोबारा MIC में शामिल करने की मांग की गई। चर्चा के बाद पार्टी ने उनकी वापसी को हरी झंडी दे दी। इसके बाद इंदौर महापौर की ओर से MIC सदस्य बनाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया। कालरा विवाद के बाद हुई थी कार्रवाई
जनवरी 2025 में बीजेपी के वार्ड 65 के पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हमला किया था। इस मामले में जीतू यादव के समर्थकों के नाम सामने आने के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया था। कार्रवाई के चलते उनका MIC पद भी चला गया था। यह पूरा विवाद एक ऑडियो सामने आने के बाद शुरू हुआ था। ऑडियो में कमलेश कालरा द्वारा नगर निगम के एक कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अपशब्द कहे जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और मामला कालरा के घर पर हुए हमले तक पहुंच गया। अब जीतू के पास बिजली और यांत्रिकी विभाग
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के आदेश के मुताबिक मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 के तहत जितेन्द्र कुमार (जीतू यादव) को मेयर-इन-काउंसिल का सदस्य नियुक्त किया गया है। MIC सदस्य निरंजनसिंह (गुड्डू) चौहान को सौंपे गए विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग के प्रभार से मुक्त किया जाता है। विजयवर्गीय-मेंदोला खेमे के करीबी माने जाते हैं
जीतू यादव को भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा विधायक रमेश मेंदोला के करीबी नेताओं में माना जाता है। भाजपा से बाहर रहने के दौरान भी जीतू यादव स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे। वे कई मौकों पर भाजपा नेताओं के साथ नजर आए और नगर निगम परिषद की बैठकों में निर्दलीय पार्षद के रूप में शामिल होते रहे। इस दौरान वे कांग्रेस पार्षदों के खिलाफ भी मुखर नजर आए। कालरा विवाद के बाद हुई थी पार्टी की किरकिरी
जीतू यादव और भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के विवाद ने जनवरी 2025 में इंदौर की राजनीति को गरमा दिया था। कालरा के घर में तोड़फोड़ और उनके नाबालिग बेटे से कथित अभद्रता के आरोपों के बाद मामला गंभीर हो गया था। घटनाक्रम की गूंज प्रदेश भाजपा से लेकर दिल्ली तक पहुंची थी। इसके बाद पार्टी ने जीतू यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। लेकिन डेढ़ साल बाद यह कार्रवाई तय अवधि से पहले ही समाप्त कर दी गई है।

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