नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ 150 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। फिल्म की सफलता के बीच बाबा का भोपाल से जुड़ा एक पारिवारिक रिश्ता भी सामने आया है। बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा आज भी भोपाल में रहते हैं। उनका जन्म भी भोपाल में हुआ था। वे बताते हैं कि जब उनका जन्म हुआ, तब बाबा भोपाल आए थे और उन्होंने ही उनका नामकरण किया था। बचपन में गर्मी की छुट्टियों में आगरा जाने पर बाबा की गोद में खेलते थे। वे कहते हैं- “आज भी आंख बंद करता हूं तो लगता है बाबा पुकार रहे हैं।” डॉ. धनंजय के पिता अनेक शर्मा मध्य प्रदेश में नौकरी लगने के बाद उत्तर प्रदेश से भोपाल आ गए थे। इसी वजह से नीम करोली बाबा का परिवार और भोपाल लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। धनंजय के लिए बाबा किसी बड़े संत से पहले उनके ‘बाबा’ थे। उनके पास बाबा के साथ बिताए बचपन के कई ऐसे किस्से हैं, जो आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा हैं। 13 साल तक बाबा का लाड़ मिला, गर्मियों में आगरा जाते थे धनंजय बताते हैं, “करीब 13 साल तक मुझे बाबा का लाड़-प्यार मिला। गर्मियों की छुट्टियों में हम दो महीने के लिए आगरा जाते थे। उस दौरान बाबा घर पर आया करते थे। घर में बाबा का बिल्कुल अलग रूप होता था। उन्होंने कभी हमें यह महसूस नहीं होने दिया कि वे कोई बड़े संत हैं। हमारे लिए तो वे सिर्फ हमारे बाबा थे और वे भी हमें अपने नाती की तरह ही प्यार करते थे।” बाबा करीब 40 साल तक गांव के प्रधान रहे। 1973 में भोपाल में थे, रेडियो से मिली बाबा के देहांत की खबर धनंजय बताते हैं कि 1973 में जब बाबा का देहांत हुआ, तब परिवार भोपाल में था। “हमें सुबह आठ बजे ऑल इंडिया रेडियो के समाचार से पता चला कि बाबा नहीं रहे।” बाबा से जुड़े भक्तों के अनुभव सुनकर भी धनंजय को कई बार आश्चर्य होता है। उनका कहना है कि भक्त बताते हैं कि उनके जीवन के कठिन से कठिन काम बाबा की कृपा से पूरे हुए। निधन पर देवरहा बाबा ने कहा था- नीम करोली बाबा कहीं नहीं गए धनंजय बताते हैं कि जब नीम करोली बाबा के कुछ भक्त वृंदावन में देवरहा बाबा के पास पहुंचे और उन्हें बताया कि महाराज जी अब नहीं रहे, तो देवरहा बाबा बहुत रोने लगे। उन्होंने भक्तों से कहा था- “नीम करोली बाबा तो ऐसे ही खेल करता रहता है, वह कहीं नहीं गया। वह यहीं रहेगा और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करेगा।” भोपाल में डॉक्टर बने, फिल्म रिलीज से पहले निर्देशक ने दिखाई थी डॉ. धनंजय शर्मा का जन्म भोपाल में ही हुआ। डॉक्टर बनने के बाद उन्होंने हमीदिया समेत कई अस्पतालों में सेवाएं दीं और बाद में सेवानिवृत्त हुए। नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज से पहले फिल्म के निर्देशक भोपाल आए थे और उन्होंने डॉ. धनंजय को फिल्म दिखाई थी। धनंजय बताते हैं कि शुरुआत में भोपाल में फिल्म को शो नहीं मिल रहे थे। टिकटों की बिक्री कम थी। इसके बाद कुछ भक्त आगे आए। उन्होंने 50 से 100 लोगों के लिए टिकट बुक किए। फ्री में फिल्म दिखाई। धीरे-धीरे दर्शक आने लगे और इसके बाद फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली। आगे जो हुआ, वो तो बाबा का चमत्कार ही है। बहू ने किताबों से बाबा को जाना, फिर भक्त बनीं धनंजय की पत्नी शैलजा बताती हैं कि उनकी शादी 1987 में हुई थी। शादी के बाद उन्हें परिवार में महाराज जी के बारे में पता चला। लोगों की आस्था और बाबा के जीवन के बारे में जानने के लिए उन्होंने कई किताबें पढ़ीं और धीरे-धीरे वे भी बाबा से जुड़ती चली गईं। कैंची धाम को नीम करोली कहना सही नहीं: पोते डॉ. धनंजय का कहना है कि लोगों में कैंची धाम और नीम करोली को लेकर भ्रम है। वे कहते हैं कि उत्तराखंड में जिस स्थान को लोग आजकल नीम करोली कहते हैं, उसका सही नाम कैंची धाम है। उनके मुताबिक, नीम करोली उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में अलग स्थान है, जहां महाराज जी ने तपस्या की थी। उत्तराखंड वाले स्थान को कैंची धाम और फर्रुखाबाद वाले स्थान को नीम करोली आश्रम कहना चाहिए। उनके अनुसार, लोगों के बीच दोनों स्थानों को लेकर भ्रम है। बाबा का पुश्तैनी घर अब परिवार और ट्रस्ट के बीच विवाद में जिस घर में नीम करोली बाबा का बचपन बीता, वह अब परिवार और ट्रस्ट के बीच विवाद की वजह बना हुआ है। बाबा की छह पोतियों ने डीएम को शिकायत देकर ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। नीम करोली बाबा का जन्म फिरोजाबाद से करीब 15 किलोमीटर दूर अकबरपुर गांव में हुआ था। गांव में मकान नंबर 154-व को बाबा का पुश्तैनी घर बताया जाता है। इसी परिसर में उनका ध्यान कक्ष, भोजनालय, अतिथि कक्ष और शयन कक्ष बनाए गए हैं। फिलहाल इसका रखरखाव श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट करता है।
बाबा गृहस्थ संत थे, परिवार में दो बेटे, एक बेटी नीम करोली बाबा गृहस्थ संत थे। उनके दो बेटे और एक बेटी थी। बड़े बेटे अनेक शर्मा के बेटे डॉ. धनंजय शर्मा हैं, जबकि छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की छह बेटियां हैं। संपत्ति को लेकर प्रशासन से शिकायत करने वाली इन्हीं छह पोतियों में सुनीता शर्मा, अर्चना शर्मा, वंदना शर्मा, भावना रावत, ऋतु तिवारी और ऋचा रावत शामिल हैं। बाबा की बेटी गिरिजा भटेले ट्रस्ट की अध्यक्ष हैं। मकान को लेकर विवाद ठीक नहीं विवाद को लेकर डॉ. धनंजय शर्मा कहते हैं, “जब यह मंदिर बनाया गया था, तब पिताजी और चाचाजी ने कहा था कि हमारे जाने के बाद मकान ट्रस्ट को दे देना। उस वक्त कोई लिखा-पढ़ी नहीं हुई थी। इसलिए कोई प्रमाण नहीं है। वह मकान सिर्फ 450 वर्गफीट में बना है। कोई करोड़ों की संपत्ति नहीं है। महाराज जी का नाम इतना बड़ा है, इस तरह के विवाद से सिर्फ उनका नाम खराब होगा।”
