दमोह जिला न्यायालय के अधिवक्ता गोविंद तिवारी को उनके दोस्त ने जन्मदिन की पार्टी न देने पर नोटिस भेजा है। यह मामला मंगलवार को सामने आया। नोटिस में 41 हजार 250 रुपए की क्षतिपूर्ति का दावा किया गया है। वहीं गोविंद तिवारी का कहना है कि उन्होंने पार्टी दे दी है। वे इस नोटिस का जवाब नोटिस से ही देंगे। वहीं, जिस दोस्त ने नोटिस भेजा है, उनका कहना है कि अगर उन्हें पार्टी नहीं मिली तो वे यह मामला कोर्ट तक ले जाएंगे। हालांकि, यह नोटिस दोस्ताना अंदाज में भेजा गया है। गोविंद तिवारी की ओर से उनके सीनियर अधिवक्ता मनीष नगाइच ने बताया कि उनके जूनियर ने जन्मदिन की पार्टी का वादा किया था, लेकिन पार्टी नहीं दी। इसी को लेकर उन्हें नोटिस मिला है।
मनीष नगाइच ने कहा कि सिविल और क्रिमिनल एक्ट में वादा खिलाफी को लेकर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। हालांकि, उनका प्रयास रहेगा कि मध्यस्थता से कोई रास्ता निकाला जाए। गोविंद तिवारी का कहना है कि उन्होंने अपने जन्मदिन पर कुछ दोस्तों के लिए रात में पार्टी दी थी। उनके पास इसके बिल भी उपलब्ध हैं। अगर मामला कोर्ट पहुंचता है तो वे वहीं अपनी बात रखेंगे। हमें उम्मीद है मिलेगी पार्टी
नोटिस देने वाले विशाल सिंह राजपूत का कहना है कि मैं एक ला स्टूडेंट के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के संरक्षण में कानून की बारीकिया सीख रहा हूं। मेरे साथी अधिवक्ता गोविंद तिवारी का 10 अगस्त को जन्मदिन था। उनसे हमारे साथी अधिवक्ताओं ने पार्टी मांगी। स्टाम्प वाला इकरारनामा बनाया उन्होंने आश्वासन दिया था कि अगले रविवार को पार्टी दे देंगे। रविवार गुजर जाने के बाद भी जब हमने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि अगले रविवार 23 अगस्त को पार्टी देंगे। इसके लिए उन्होंने एक इकरारनामा भी लिखा था। इसमें वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साइन हुए थे, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने पार्टी नहीं दी। हमें लगा कि वह पार्टी देने के मूड में नहीं है।
पार्टी का बिल हमारे पास है
विशाले ने बताया कि हमने बांदकपुर रोड पर किसी रेस्टोरेंट में पार्टी दी है, जिसका बिल भी उनके पास है, लेकिन हम लोग वहां उपस्थित नहीं हुए और ना ही हमें पार्टी मिली है। इसलिए हमने अपने सीनियर अधिवक्ता कमल सिंह ठाकुर के माध्यम से उन्हें नोटिस दिया है।
आगे देखना है की 7 दिन के अंदर उनका क्या जवाब आता है। वह पार्टी देकर सुलह करते हैं कि नहीं करते तो इसके बाद हम आगे की कार्रवाई करेंगे। मजबूरी में रेस्टोरेंट में खाया 1750 रुपए का खाना विशाल ने बताया कि जब गोविंद तिवारी के द्वारा हमें पार्टी नहीं दी गई तो हमें मजबूरी में एक रेस्टोरेंट में जाकर 1750 रुपए का खाना खाना पड़ा। इसके बाद हम मानसिक रूप से काफी परेशान हुए तो निजी अस्पताल में इलाज कराया। जिसमें हमारे 39 हजार 500 खर्च हुए और इसी को लेकर हमने 41 हजार 250 का दावा अपने साथी अधिवक्ता गोविंद तिवारी पर किया है। हमें उम्मीद है की मित्रवत तरीके से इस मामले को सुलझा लेंगे।
