लैपटॉप वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेधावी विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई के साथ भविष्य के सपनों पर भी चर्चा की। किसी ने राजनेता बनने की इच्छा जताई तो किसी ने एंटरप्रेन्योर बनने का सपना बताया। मुख्यमंत्री ने बच्चों से उनके लक्ष्य और पसंद के क्षेत्र को लेकर सवाल किए। 12वीं में 97.2% अंक हासिल करने वाले धीरेंद्र सिंह मुंडेला ने बताया कि वह आगे चलकर राजनेता बनना चाहते हैं। फिलहाल उनका लक्ष्य यूपीएससी की तैयारी करना है। उन्होंने कहा कि 21 वर्ष की उम्र में यूपीएससी परीक्षा देने का प्रयास करेंगे और शिक्षा पूरी करने के बाद राजनीति में आकर देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे ज्यादा अंक पाने वाले विद्यार्थियों के खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपए ट्रांसफर किए। वहीं 10 बच्चों को प्रतीक स्वरूप लैपटॉप दिए। धीरेंद्र बोले- लोगों की मजबूरियां देखीं, इसलिए राजनीति चुनूंगा धीरेंद्र ने बताया कि उन्हें घूमने का शौक है। अलग-अलग जगहों पर जाने के दौरान उन्होंने लोगों की कई तरह की परेशानियां और मजबूरियां देखीं। उनका मानना है कि राजनीति के जरिए लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनके आसपास ज्यादातर युवा IIT, इंजीनियरिंग, साइंस या लॉ जैसे क्षेत्रों में जाना चाहते हैं, लेकिन राजनीति में जाने की इच्छा कम लोग जताते हैं। इसलिए उन्होंने राजनीति को अपना लक्ष्य बनाने का फैसला किया। हिमांशी बोलीं- नौकरी नहीं, नौकरी देने वाली बनना है मुख्यमंत्री ने 95% अंक हासिल करने वाली हिमांशी पाठक से भी उनके भविष्य के लक्ष्य पूछे। हिमांशी ने कहा कि वह प्रसिद्ध एंटरप्रेन्योर बनना चाहती हैं। शुरुआत में एयर होस्टेस के रूप में काम करने और लोगों से संपर्क बढ़ाने के बाद खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना है। उन्होंने कहा कि वह फाउंडर या को-फाउंडर बनना चाहती हैं। AI और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में उन्हें अपना व्यवसाय खड़ा करना बेहतर विकल्प लगता है। उनका लक्ष्य नौकरी पाने के बजाय नौकरी देने वाली बनना है। हिमांशी- खुद पर कभी शक नहीं करती हिमांशी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें खुद पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि 12वीं में अच्छे अंक हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री के साथ मंच पर खड़े होकर बातचीत करने का सपना उन्होंने पहले ही देख लिया था। उनका मानना है कि असंभव लगने वाली चीजों को भी दृढ़ सोच और मेहनत से संभव बनाया जा सकता है। CM बोले- राजनीति में योग्य युवाओं का आना जरूरी मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से खेती-किसानी को लेकर भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, वकील, इंजीनियर जैसे पेशे जरूरी हैं, लेकिन खेती भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसान अन्न पैदा नहीं करेगा तो समाज का काम नहीं चल सकता। राजनीति पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़े-लिखे और योग्य युवाओं का राजनीति में आना जरूरी है। इससे अच्छे जनप्रतिनिधि और बेहतर नेतृत्व तैयार होगा। 1.21 लाख विद्यार्थियों को दी गई राशि प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत इस बार करीब 1 लाख 21 हजार विद्यार्थी पात्र हैं। राशि विद्यार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर की जाएगी। योजना का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलता है, जिन्होंने 12वीं की परीक्षा पहले प्रयास में 75% या उससे अधिक अंकों से पास की है। स्कूल शिक्षा विभाग DBT के जरिए पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में 25 हजार रुपए ट्रांसफर करेगा। यह राशि लैपटॉप खरीदने के लिए दी जाती है। सरकार विद्यार्थियों को लैपटॉप सीधे नहीं देती। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का संबल प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत इस वर्ष करीब 1 लाख 21 हजार विद्यार्थियों को लाभ दिया जा रहा है। विद्यार्थियों के खातों में 304 करोड़ 98 लाख 50 हजार रुपए से अधिक की राशि ट्रांसफर की जाएगी। लैपटॉप के जरिए विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल पाठ्य सामग्री, ई-लर्निंग और अन्य तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए जरूरी डिजिटल संसाधन उपलब्ध होंगे और वे आधुनिक तकनीक से जुड़ सकेंगे। पहले 85% अंक जरूरी थे मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए सहायता देने की योजना 2009-10 में शुरू हुई थी। शुरुआत में पात्रता के लिए 85% अंक जरूरी थे। बाद में सरकार ने यह सीमा घटाकर 75% कर दी। इसके बाद 12वीं में 75% या उससे ज्यादा अंक पाने वाले विद्यार्थी भी योजना के पात्र हो गए। तीन साल में सरकारी स्कूलों में बढ़ा दाखिला परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के प्रति विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। पिछले तीन वर्षों में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने के बजाय बढ़ने लगी है। ड्रॉपआउट दर में भी लगातार कमी आई है और इसे लगभग शून्य स्तर तक लाने में सफलता मिली है। लैपटॉप वितरण कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। पिछले वर्ष करीब 92 हजार विद्यार्थियों ने 12वीं में 75% से अधिक अंक हासिल कर लैपटॉप के लिए पात्रता हासिल की थी। इस वर्ष मंत्री के अनुसार यह संख्या बढ़कर करीब 1 लाख 22 हजार हो गई है। उन्होंने इसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सुधार, शिक्षकों की प्रतिबद्धता, विद्यार्थियों की मेहनत और अभिभावकों के आशीर्वाद का परिणाम बताया। 6 लाख विद्यार्थियों को अब तक मिला लाभ राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि लैपटॉप योजना शुरू होने के बाद अब तक करीब 6 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ दिया जा चुका है। सरकार ने इस योजना के तहत अब तक करीब 1620 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि लैपटॉप केवल एक उपकरण नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लर्निंग, ई-लाइब्रेरी और डिजिटल किताबों के रूप में उपयोगी साबित होगा। नई शिक्षा नीति से ड्रॉपआउट में कमी मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। पहले जहां सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही थी, वहीं अब दाखिले बढ़ने लगे हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के कारण विद्यार्थियों का स्कूल छोड़ना भी कम हुआ है। 18 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी शिक्षकों की कमी को लेकर मंत्री ने कहा कि प्रदेश में अतिथि शिक्षकों के माध्यम से भी सेवाएं ली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नियमानुसार आरक्षण और बैकलॉग सहित विभिन्न प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए करीब 18 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि नियमानुसार रिक्त शिक्षकों के पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। आगामी समय में इन पदों पर भर्ती को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में और सुधार हो सके।
