लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले के विरोध में रीगल चौराहे पर सोमवार शाम महिला कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया हाथों में संविधान लेकर पहुंची, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा और आरएसएस के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान मनुस्मृति का पोस्टर जलाकर विरोध दर्ज कराया गया। महिला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खड़गे के अपमान की घटना को कई दिन बीतने के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की। सेतिया बोलीं- मनुस्मृति नहीं चलेगी
रीना बौरासी सेतिया ने कहा कि मनुस्मृति में शूद्रों और महिलाओं को समाज में नीचे रखा गया और महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता को सीमित करने वाले प्रावधान थे। इसके विपरीत संविधान हर नागरिक को अधिकार, शिक्षा, स्वतंत्रता और आगे बढ़ने का अवसर देता है। उन्होंने कहा- हमने मनुस्मृति को नकारते हुए संविधान को अपनाया है। देशवासियों को भी समझना चाहिए कि हमें मनुस्मृति नहीं, बल्कि संविधान चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों ने खड़गे के उत्तराखंड दौरे के बाद उस स्थान का शुद्धिकरण और हवन कराया था। सेतिया ने कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी दलित समाज के साथ इस तरह का भेदभाव होना गंभीर चिंता का विषय है। राहुल के खिलाफ कार्रवाई पर भी सवाल
सेतिया ने कहा कि कांग्रेस दलित, आदिवासी, युवा और वंचित समाज के अधिकारों की बात उठा रही है, लेकिन राहुल गांधी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कांग्रेस नेतृत्व की आवाज दबाने के लिए झूठे मुकदमों का सहारा ले रही है। उन्होंने बेरोजगारी, पेपर लीक और परीक्षाओं के रद्द होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि युवाओं में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है। प्रदर्शन में महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने संविधान की रक्षा और सामाजिक समानता के समर्थन में आवाज उठाई।
