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मामा घिरे…कहा-एक सीएम की घोषणा दूसरे को पूरी करनी चाहिए:प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चली गईं भाजपा विधायक; मंत्रियों का तीखे सवालों से सामना

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। अपनी पुरानी घोषणा पर घिरे शिवराज सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी एक पुरानी घोषणा को लेकर घिर गए। इसके बाद उन्होंने गेंद वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पाले में डाल दी। हुआ यूं कि अपनी मांगों को लेकर अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के सामने प्रदर्शन कर रहे थे। तभी यहां से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का गुजरना हुआ। अतिथि विद्वानों ने उन्हें रोक लिया। अतिथि विद्वानों ने शिवराज सिंह को याद दिलाया कि ‘सर, आपने 11 सितंबर 2023 को अतिथि विद्वानों के लिए ये घोषणा की थी कि हमको फॉलन आउट नहीं किया जाएगा।’ इस पर कैमरा फ्रेंडली शिवराज सिंह ने सबसे पहले वीडियो बनाने से मना किया। फिर कहा कि ‘एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे को पूरी करनी चाहिए।’ अतिथि विद्वानों ने उन्हें यह भी याद दिलाया कि सरकार तो भाजपा की ही है, आपकी ही है। इस पर शिवराज सिंह ने अतिथि विद्वानों की मांग सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया और वहां से चले गए। इधर, अतिथि विद्वानों का कहना है कि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने फिलहाल उनकी मांग मानने से इनकार कर दिया है और उल्टे उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली है। जवाब में अतिथि विद्वानों ने भी कहा कि अगर मंत्री चुनाव की बात कर रहे हैं तो वे चुनाव भी लड़ लेंगे। खरी बात ये है कि लोकतंत्र में अपनी मांगें मनवाने के लिए इस तरह के प्रदर्शन होते रहते हैं, लेकिन यहां बात मांग और आश्वासन से निकलकर चुनावी चुनौती तक पहुंच गई। अब अगर कहीं किसी ने इसे सीरियसली ले लिया तो… यूजीसी के सवाल पर विधायक ने साधी चुप्पी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इस अभियान की जानकारी देने के लिए मंत्री-विधायक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। इस दौरान कई जगहों पर उन्हें तीखे सवालों का सामना भी करना पड़ रहा है। सिंगरौली में भाजपा विधायक रीति पाठक भी अभियान की जानकारी देने पहुंची थीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे यूजीसी को लेकर सवाल पूछा गया। जिस पर उन्होंने चुप्पी साध ली। सवाल सुनते ही विधायक के चेहरे पर चुप्पी, मुस्कुराहट और गुस्से के भाव एक साथ नजर आए। कुछ पल रुकने के बाद उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर बात नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता का विषय कुछ और है। इसके बाद रीति पाठक प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर उठकर चली गईं। मंत्री प्रहलाद पटेल को याद दिलाया शराब कांड
सागर में मीडिया ने मंत्री प्रहलाद पटेल को बंडा शराबकांड की याद दिला दी। वे प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान की जानकारी दे रहे थे। तभी उनसे पूछा गया कि सागर में इतना बड़ा शराबकांड हुआ है, ऐसे में उसके बीच इस तरह के कार्यक्रम करना कितना जरूरी है। इस सवाल के जवाब में मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि इसमें कोई महिमा मंडन, स्वागत या सत्कार का कार्यक्रम नहीं है। ये सभी सेवा के कार्यक्रम हैं। मंत्री के इस सीधे-सादे जवाब के बाद मीडिया ने फिर सागर शराबकांड को लेकर सवाल दाग दिया। पूछा गया कि इतने बड़े शराबकांड के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मंत्री ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। वंदे मातरम पर फंसे मंत्री नारायण सिंह पंवार
शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार वंदे मातरम् को लेकर सवालों में घिर गए। दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री वंदे मातरम् के मुद्दे पर विपक्ष को घेर रहे थे। इसी दौरान उनसे सवाल कर दिया गया कि उन्हें खुद वंदे मातरम् आता है या नहीं। सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा, ‘हम भी सीख रहे हैं, आप भी सीख लो। भारत माता के हम सब सपूत हैं।’ खरी बात ये है कि सीखना अच्छी आदत है। और सीखने की कोई उम्र नहीं होती, इसलिए सबको सीखते रहना ही चाहिए। और अब अंदर की बात.. दो अफसरों में टकराव, भुगतान को तरसे ठेकेदार
जल से संबंधित एक विभाग में वित्तीय फाइलों के मूवमेंट को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद सार्वजनिक हो गया। दरअसल, विभाग के चीफ इंजीनियर और अपर संचालक स्तर की एक अधिकारी के बीच टकराव की वजह से ठेकेदारों का भुगतान अटका हुआ है। इससे नाराज ठेकेदारों ने मोर्चा खोल दिया। जब फाइल रोकने के मामले में विवाद ज्यादा बढ़ा तो विभाग के मंत्रालय में बैठे अफसर ने अपर संचालक स्तर की अधिकारी को शोकॉज नोटिस जारी किया। अब सुनने में आया है कि इस अधिकारी ने मौखिक रूप से इस बड़े अफसर को कह दिया कि वो उनके विभाग की कर्मचारी नहीं है, इसलिए नोटिस का जवाब देना उचित नहीं समझती। सुनने में आया है कि ये पूरा विवाद कमीशन को लेकर है। इनपुट सहयोग – विजय सिंह बघेल (भोपाल), राज द्विवेदी (सिंगरौली), जितेंद्र तिवारी (सागर), अजय वर्मा (शाजापुर) ये भी पढ़ें –
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