इंदौर में 30 कछुओं के साथ पकड़े गए दो आरोपियों से पूछताछ में वन विभाग को वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने मुसाखेड़ी निवासी केशव शर्मा और रोहन गौड़ को कछुओं की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद 24 अगस्त तक वन विभाग की रिमांड पर लिया है। अब जांच का फोकस सिर्फ बरामद कछुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पीछे मौजूद सप्लायर, खरीदार और दूसरे राज्यों तक फैले नेटवर्क को खंगालने पर है। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों के संपर्क महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से जुड़े मिले हैं। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कछुए कहां से लाए गए, किसके जरिए इंदौर पहुंचाए गए और आगे किन लोगों को इनकी सप्लाई की जानी थी। जांच में यदि कड़ियां जुड़ती हैं तो वन्यजीवों की तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। इन कछुओं की डिमांड इंदौर के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर तक होती है। ग्राहक तलाशने से लेकर डिलीवरी तक बंटा था काम
जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों के बीच काम बंटा हुआ था। केशव ग्राहकों से संपर्क कर कछुओं का सौदा करता था, जबकि रोहन उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करता था। अब अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की है कि दोनों के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और उन्हें कछुओं की नियमित सप्लाई कौन कर रहा था। टीम आरोपियों के मोबाइल फोन में मिले संपर्कों, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल सुरागों को भी जांच का हिस्सा बना रही है। महाराष्ट्र कनेक्शन पर भी जांच
पूछताछ में महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से सप्लाई लिंक के संकेत मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। टीम यह भी पता कर रही है कि क्या आरोपी लंबे समय से कछुओं की तस्करी में सक्रिय थे या हाल में इस नेटवर्क से जुड़े। अधिकारियों को आशंका है कि नेटवर्क में केवल सप्लायर और खरीदार ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों को पकड़ने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और ग्राहकों तक डिलीवरी करने वाले कई लोग शामिल हो सकते हैं। तीन संरक्षित प्रजातियों के 30 कछुए मिले थे
कार्रवाई में टीम ने आरोपियों के कब्जे से इंडियन स्टार टॉरटॉइज के 14, इंडियन रूफ्ड टर्टल के 10 और स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल के 6 कछुए बरामद किए थे। इसके अलावा तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। वन विभाग के मुताबिक बरामद वन्यजीव वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत संरक्षित हैं।
