अशोकनगर के भौरा काछी गांव के अमाही तालाब किनारे स्थित बस्ती में लंबे समय से बिजली की समस्या बनी हुई है। मंगलवार को बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे अपनी समस्या लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने बस्ती में नया ट्रांसफार्मर यानी डीपी लगवाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई महीनों से उन्हें रात के समय बिजली नहीं मिल रही है। दिन में पंप लाइन से सीमित समय के लिए बिजली आती है, लेकिन घरों की नियमित बिजली आपूर्ति के लिए बस्ती में अलग डीपी नहीं है। 25-30 घरों में रात को रहता है अंधेरा ग्रामीणों के मुताबिक बस्ती में करीब 25 से 30 घर हैं, जिनमें लगभग 100 लोग रहते हैं। रात के समय बिजली नहीं होने के कारण पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है।अंधेरे में जहरीले जीव-जंतुओं के काटने का डर बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और गर्मी के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। गर्मी और मच्छरों से भी परेशान बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीण गर्मी और मच्छरों से भी परेशान हैं। उनका कहना है कि रात में पंखे नहीं चल पाते, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। 15 साल पहले हटाया गया था ट्रांसफार्मर ग्रामीणों के अनुसार, बस्ती में करीब 15 साल पहले सरकारी ट्रांसफार्मर लगा हुआ था। बाद में मरम्मत के नाम पर इसे हटा लिया गया, लेकिन इसके बाद दोबारा ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया। इसके बाद ग्रामीण आसपास के खेतों में लगे ट्रांसफार्मरों से डोरी डालकर बिजली लेने को मजबूर रहे। हालांकि अब यह व्यवस्था भी नियमित नहीं है। छह महीने से सिर्फ दिन में मिल रही बिजली ग्रामीणों ने बताया कि पिछले करीब छह महीने से पंप लाइन के जरिए केवल दिन के समय बिजली मिल रही है। रात में बिजली नहीं होने के कारण उन्हें अंधेरे में रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें जल्द समस्या दूर करने का आश्वासन दिया गया। इसके बावजूद अब तक ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया। डीपी नहीं लगी, फिर भी बिजली बिल भेजने का आरोप ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बस्ती में घरों के लिए डीपी नहीं लगाई गई है, इसके बावजूद नियमित रूप से बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि बस्ती तक बिजली की लाइन भी निकली हुई है और डीपी लगाने के लिए स्ट्रक्चर भी बना हुआ है। ऐसे में केवल ट्रांसफार्मर लगाए जाने की जरूरत है। पहले तहसीलदार को दिया ज्ञापन बिजली की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने पहले तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद ग्रामीणों का एक समूह कलेक्टर से मिलने कलेक्ट्रेट पहुंचा और अपनी समस्या बताई। ग्रामीणों ने कहा कि यदि विभाग उनकी बस्ती में ट्रांसफार्मर लगा देता है तो वे नियमित रूप से बिजली बिल जमा करने के लिए तैयार हैं। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान जल्द किया जाएगा।
