मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। ‘बाहुबली’ वाले अंदाज में नजर आए मुख्यमंत्री
इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘बाहुबली’ वाले अंदाज में नजर आए। उन्होंने मंच पर शिवलिंग को कंधे पर उठा लिया। दरअसल, सीएम एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें शिवलिंग भेंट किया। शिवलिंग हाथ में आते ही मुख्यमंत्री ने उसे कुछ उसी अंदाज में कंधे पर उठा लिया, जैसा फिल्म ‘बाहुबली’ में नजर आया था। मंच पर हुए इस रियल ‘बाहुबली’ सीन का वीडियो भी सामने आया है, जिसे सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है। इसके साथ ही वीडियो का राजनीतिक रिव्यू भी शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि शिवलिंग कंधे पर उठाकर सीएम ने शायद यही संदेश दिया है कि उन पर भगवान महाकाल के साथ-साथ पार्टी के आलाकमान का भी आशीर्वाद है। ऐसे में फिलहाल मध्यप्रदेश की सियासत के ‘बाहुबली’ तो वही नजर आ रहे हैं। कैलाश को जल संसाधन मंत्री कह गए महापौर
सीएम डॉ. मोहन यादव ने भले ही अपना ‘बाहुबली’ अवतार दिखाया, लेकिन इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को उनमें कुछ और ही नजर आया। उन्होंने सीएम की तुलना भगवान द्वारिकाधीश से कर दी। एक सड़क निर्माण की मांग रखते हुए महापौर ने कहा- ‘आप तो द्वारिकापुरी के द्वारिकाधीश मोहन हैं। हम सुदामा आपसे इतनी मांग करते हैं कि चंदन नगर का जो कष्ट है, उसे भी आप दूर करने का काम करेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है।’ वैसे सीएम के मंच पर महापौर इतने उत्साहित नजर आए कि मंत्रियों के नाम और विभाग को ही आपस में मिक्स कर गए। मंच से वे सभी अतिथियों का नाम ले रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को जल संसाधन मंत्री बता दिया। दरअसल, महापौर मंत्री तुलसी सिलावट का नाम लेना चाह रहे थे, लेकिन जुबान फिसली और उन्होंने जल संसाधन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कह दिया। सीएम ने इशारा कर गलती बताई, जिसके बाद महापौर ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली। तिरंगा यात्रा में जीप से गिर पड़े कांग्रेस नेता
‘सबका साथ-सबका विकास’… नारा भले ही भाजपा का है, लेकिन कोई रैली हो या सभा, खासकर मंच पर कांग्रेस इसका अक्षरश: पालन करती नजर आती है। देवास के कांटाफोड़ में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ। लेकिन यहां ‘सबका साथ’ कांग्रेस नेताओं पर ही भारी पड़ गया। हुआ यूं कि तिरंगा यात्रा के दौरान एक खुली जीप में 10 से ज्यादा नेता सवार हो गए। ज्यादा वजन पीछे होने की वजह से जीप का अगला हिस्सा ऊपर उठ गया और पीछे बैठे नेता नीचे जा गिरे। जीप में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष चौधरी, पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े समेत कई नेता सवार थे। हादसे में एक महिला कांग्रेस नेता गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें छह टांके आए हैं। अब लोग चुटकी ले रहे हैं कि तिरंगा यात्रा में कांग्रेस ने ‘सबका साथ’ तो निभाया, लेकिन जीप इस साथ का बोझ नहीं उठा सकी। जेन अल्फा ने रोक लिया मंत्री का काफिला
छतरपुर के एक गांव में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोक लिया। इसके बाद बच्चों ने उन्हें अपने स्कूल और सड़क की बदहाली के बारे में बताया। बच्चों ने कहा कि स्कूल तक पहुंचने के लिए ठीक सड़क तक नहीं है। इसके अलावा स्कूल में बाउंड्री वॉल और बिजली की समस्या भी है। दरअसल, मंत्री दिलीप अहिरवार चंदला विधानसभा क्षेत्र के बसराही गांव से गुजर रहे थे। बच्चों को जब उनके काफिले के आने की जानकारी मिली तो उन्होंने रास्ते में काफिला रोक लिया। बच्चों को सामने देख मंत्री भी कार से उतरे और उनकी बातें सुनीं। बच्चों ने एक-एक कर अपनी समस्याएं मंत्री के सामने रखीं। मंत्री ने उनकी बातें सुनने के बाद जल्द समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। अब देखने वाली बात ये है कि मंत्री का भरोसा बच्चों की इन समस्याओं तक कितनी जल्दी पहुंचता है। खरी बात ये है कि ये जेन अल्फा का दौर है। अपने हक, अधिकार और समस्याओं को लेकर आवाज उठाने में ये बच्चे भी पीछे नहीं हैं। जरूरत पड़ी तो काफिला रोककर सीधे मंत्री से बात करने में भी इन्हें देर नहीं लगती। और अब अंदर की बात.. साहब का प्राइवेट बंगले पर दिल आया
एक छोटे जिले में कलेक्टरी की पारी खेलकर हाल ही में राजधानी में पदस्थ हुए एक आईएएस अफसर को बड़ी मुश्किल से एक सरकारी बंगला पसंद आया। उन्हें एसीएस स्तर के अधिकारी के लिए तय बंगला अलॉट हुआ। इतना ही नहीं, साहब की पसंद के मुताबिक बंगले में रेनोवेशन का काम भी शुरू हो गया। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब साहब का दिल शहर के कटारा हिल्स इलाके के एक प्राइवेट बंगले पर आ गया। सुना है कि इस बंगले का मासिक किराया एक लाख रुपए से ज्यादा है। अब सवाल ये है कि साहब सरकारी बंगला वापस करेंगे या उसे भी अपने पास रखेंगे? इसका जवाब तो फिलहाल नहीं मिला है। लेकिन प्रशासनिक गलियारों में साहब की ‘ऊंची पसंद’ के चर्चे जरूर शुरू हो गए हैं। इनपुट सहयोग – अमित सालगट (इंदौर), पुनीत जैन (खातेगांव), राजेश चौरसिया (छतरपुर) ये भी पढ़ें –
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