मध्य प्रदेश के नगर पालिक निगम, नगरपालिका और नगर परिषद में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों को लेकर सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, म.प्र. द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब सभी कम्प्यूटर ऑपरेटरों के लिए तकनीकी दक्षता और साइबर सुरक्षा से जुड़ी कुछ अनिवार्य योग्यताएं तय कर दी गई हैं। इसके लिए उन्हें 30 दिनों की समय-सीमा दी गई है, ऐसा न करने पर उनके मानदेय या वेतन भुगतान पर रोक लग सकती है। यह आदेश नगरीय प्रशासन एवं विकास की अपर आयुक्त मिशा सिंह ने किया है। आदेश की प्रति सभी नगर पालिक निगमों के आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को भेज दी गई है। क्यों लिया गया यह फैसला? विभाग का कहना है कि नगरीय निकायों की विभिन्न शाखाओं, योजनाओं और परियोजनाओं में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा कंप्यूटर संबंधी कार्यों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विभागीय ऑनलाइन पोर्टल और आईटी (IT) आधारित प्रणालियों का संचालन किया जाता है। सरकारी डेटा को सुरक्षित रखने और ऑनलाइन कामकाज को सुचारू बनाने के लिए ऑपरेटरों की तकनीकी क्षमता और साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी को पुख्ता करना बेहद आवश्यक हो गया है। ये 3 शर्तें पूरी करना हुआ अनिवार्य CPCT परीक्षा पास होना जरूरी: सभी कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा अनिवार्य रूप से CPCT (Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा पास की गई हो। मिशन कर्मयोगी पोर्टल से सर्टिफिकेट कोर्स: ऑपरेटरों को भारत सरकार के ‘मिशन कर्मयोगी’ (iGOT Karmayogi) पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से संबंधित कम से कम 10 सर्टिफिकेट कोर्स पूरे करने होंगे। 50 क्रेडिट पॉइंट अर्जित करना जरूरी : इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों को पूरा करके कंप्यूटर ऑपरेटरों को कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने होंगे। तय किए गए मुख्य सर्टिफिकेट कोर्स आदेश के साथ एक सूची भी जारी की गई है जिसमें आवश्यक कोर्स और उनकी महत्ता बताई गई है, जैसे बेसिक कंप्यूटर कोर्स और माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल/वर्ड (डेटा एंट्री और रिकॉर्ड के लिए)। साइबर सिक्योरिटी बेसिक्स और डिजिटल सेफ्टी एसेंशियल्स (सरकारी कंप्यूटर और पासवर्ड सुरक्षित रखने के लिए)। आधुनिक तकनीकी और एआई की जानकारी के लिए (‘AI Using Google Bard and ChatGPT for Beginners’) जैसे कोर्स तय किए गए हैं। इसके साथ ही डेटा ड्रिवन डिसीजन मेकिंग और रिस्पॉन्सिबल डेटा मैनेजमेंट को भी सीखना होगा। वेतन और नौकरी पर आ सकता है संकट शासन ने निर्देश दिया है कि जो कंप्यूटर ऑपरेटर आगामी 30 दिनों के भीतर इन अनिवार्य योग्यताओं और प्रशिक्षण को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें आगे नियोजन में रखने या हटाने और उनके नियमानुसार मानदेय/वेतन भुगतान की कार्रवाई इसी आधार पर तय की जाएगी। यानी शर्तें पूरी न करने वालों की सैलरी अटक सकती है। औसतन किस निकाय में कितने ऑपरेटर होते हैं? निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या वहां की जनसंख्या, वॉर्डों की संख्या और विभागीय शाखाओं (जैसे- जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जलकर, संपत्ति कर, पीएम आवास योजना, राजस्व आदि) के आधार पर तय होती है। आधिकारिक रूप से स्वीकृत और आउटसोर्स पदों के आधार पर एक अनुमानित औसत इस प्रकार है: नगर निगम स्तर पर 60 से 150+ ऑपरेटर नगर निगम बड़े शहर होते हैं, जहां कई ज़ोनल ऑफिस और दर्जनों विभाग होते हैं। इंदौर और भोपाल जैसे ‘A’ श्रेणी के नगर निगमों में ऑपरेटरों की संख्या 150 से भी अधिक हो सकती है, जबकि छोटे नगर निगमों में यह संख्या 50-70 के आसपास होती है। नगर पालिका स्तर पर 15 से 30 ऑपरेटर ये मध्यम श्रेणी के शहर होते हैं। यहाँ मुख्य कार्यालय में ही लगभग सभी शाखाएं (राजस्व, सामान्य प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी आदि) संचालित होती हैं, जिसके कारण हर काउंटर और मुख्य शाखा पर ऑपरेटरों की जरूरत होती है। नगर परिषद स्तर पर 5 से 10 ऑपरेटर ये छोटे या ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे टाउन होते हैं। यहाँ सीमित संख्या में वॉर्ड और विभाग होते हैं, इसलिए मुख्य रूप से लेखा (Accounts), स्थापना, और नागरिक सेवाओं के काउंटरों को संभालने के लिए सीमित ऑपरेटर ही रखे जाते हैं।
