सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हम 11 दिन तक हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष श्रृंखला लेकर आए हैं। हम आपको भोपाल के सबसे बड़े बदलावों, शहर को जीवन देने वाली धरोहरों पर विशेषज्ञों के मंथन, पुराने दस्तावेजों और दुर्लभ अभिलेखों की पड़ताल से निकले अनकहे सच, तथ्यों पर आधारित एक्सक्लूसिव खुलासों और दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह से रूबरू कराएंगे। पढ़िए आज की कहानी… 1. राजा भोज जिन्होंने भोपाल को जन्म दिया मालवा के शासक राजा भोज की राजधानी धार थी। कोलांस और आसपास की नदियों का पानी रोककर विशाल जलाशय बनवाया। यही आज का भोजताल या बड़ा तालाब है। उस समय बांध को ‘पाल’ कहते थे। ‘भोज’ और ‘पाल’ से ही ‘भोपाल’ नाम बना। भोजपुर मंदिर और उनका ग्रंथ समरांगण सूत्रधार उनकी इंजीनियरिंग और नगर नियोजन क्षमता के बड़े प्रमाण हैं। 2. बाल्थाजार डी बौरबोन बेगम शासन की नींव मजबूत की फ्रांस के बौरबोन राजवंश से जुड़े बाल्थाजार डी बौरबोन भोपाल रियासत के प्रभावशाली रणनीतिकार थे। 1813-14 के संकट में उन्होंने भोपाल की रक्षा की। 1818 में एंग्लो-भोपाल संधि कराकर रियासत को ब्रिटिश संरक्षण दिलाया। 1819 में नवाब नजर मोहम्मद खान की मृत्यु के बाद उन्होंने कुदसिया बेगम का समर्थन किया। इससे बेगम शासन की नींव मजबूत हुई। 3. एम.एन. बुच आधुनिक भोपाल के वास्तुकार इनका जन्म साहीवाल (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने अरेरा हिल्स, शिवाजी नगर और जोनिंग व्यवस्था से आधुनिक भोपाल की शहरी योजना तैयार की। 1975 में उन्होंने यूनियन कार्बाइड को शहर से दूर ले जाने का सुझाव दिया, पर यह लागू नहीं हुआ। अगर ऐसा होता तो 1984 की गैस त्रासदी टल सकती थी। 2011 में उन्हें पद्म भूषण मिला। 4. अशोक वाजपेयी सांस्कृतिक राजधानी की नींव रखी इनका जन्म राजनांदगांव (अब छत्तीसगढ़) में हुआ। वे 1966 बैच के आईएएस अधिकारी थे। 1982 में उन्होंने भारत भवन की स्थापना कराई। यह देश का पहला बहु-कला केंद्र बना। यहां साहित्य, चित्रकला, संगीत, रंगमंच और लोक कला को मंच मिला। आज भारत भवन का कला संग्रह देश के महत्वपूर्ण संग्रहों में से एक है। यहां देश-विदेश के शोधकर्ता अध्ययन करने आते हैं। 5. चार्ल्स कोरिया भारत भवन-विधानसभा बनाया देश के प्रसिद्ध वास्तुकार चार्ल्स कोरिया का जन्म सिकंदराबाद में हुआ था। उन्होंने भारत भवन और मध्य प्रदेश विधानसभा इमारतें डिजाइन की थी। भारत भवन को इस तरह बनाया कि बड़ा तालाब और शामला हिल्स का प्राकृतिक सौंदर्य बना रहे। वहीं विधानसभा में भारतीय परंपरा और आधुनिक वास्तुकला का मेल दिखता है। विधानसभा को 1998 में आगा खान आर्किटेक्चर अवॉर्ड मिला। 6. जगदीश स्वामीनाथन गोंड कला दुनिया तक पहुंचाई इनका जन्म शिमला में हुआ था। वे चित्रकार, कला समीक्षक और विचारक थे। अशोक वाजपेयी के बुलावे पर वे भोपाल आए। उन्हें भारत भवन के रूपंकर कला संग्रहालय का पहला निदेशक बनाया गया। उन्होंने प्रदेश के आदिवासी इलाकों से गोंड और अन्य लोक कलाकारों को खोजा। भारत भवन में उन्होंने संग्रहालय बनाया, जहां लोक और जनजातीय कला सम्मान मिला। 7. दुष्यंत कुमार हिंदी गजल को नई आवाज दी उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्में दुष्यंत कुमार ने भोपाल को अपनी कर्मभूमि बनाया। वे भाषा विभाग और आकाशवाणी से जुड़े रहे। उस दौरान दुष्यंत ने हिंदी में ऐसी गजलें लिखीं, जो आम आदमी की जिंदगी और संघर्ष से जुड़ी थीं। 1975 में उनका चर्चित संग्रह साये में धूप प्रकाशित हुआ। भोपाल का दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय उनकी स्मृति में आज भी है। 8. डॉ. बशीर बद्र उर्दू अदब को आसमान दिया इनका जन्म अयोध्या में हुआ था। 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जल गया। उनकी हजारों किताबें और पांडुलिपियां भी नष्ट हो गईं। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और भोपाल के साहित्यकारों ने उन्हें भोपाल बुलाया। यहां उन्होंने उर्दू गजल को कठिन फारसी शब्दों से आसान बोलचाल की भाषा दी। उनकी वजह से भोपाल बड़े मुशायरों और उर्दू साहित्य का केंद्र बना। (कल पढ़िए नई कहानी)
