सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हम 11 दिन तक हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष श्रृंखला लेकर आए हैं। हम आपको भोपाल के सबसे बड़े बदलावों, शहर को जीवन देने वाली धरोहरों पर विशेषज्ञों के मंथन, पुराने दस्तावेजों और दुर्लभ अभिलेखों की पड़ताल से निकले अनकहे सच, तथ्यों पर आधारित एक्सक्लूसिव खुलासों और दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह से रूबरू कराएंगे। पढ़िए आज की कहानी… 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया, लेकिन भोपाल रियासत का भविष्य अभी तय नहीं था। एक तरफ नवाब हमीदुल्लाह खान भोपाल को स्वतंत्र रियासत बनाए रखना चाहते थे, तो दूसरी ओर प्रजामंडल भारत में विलय और उत्तरदायी शासन की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर रहा था। बढ़ते जनदबाव के बीच 1 अप्रैल 1948 को नवाब और प्रजामंडल नेताओं के बीच समझौता हुआ। इसी के बाद पहली बार जनता के प्रतिनिधियों को सरकार में शामिल करने का फैसला लिया गया। पहली लोकप्रिय सरकार : 2 मई 1948 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर भोपाल की पहली लोकप्रिय सरकार बनाई गई। इसमें नवाब के नामित सदस्य और प्रजामंडल के प्रतिनिधि दोनों शामिल थे। इस सरकार का उद्देश्य प्रशासन में जनता की भागीदारी बढ़ाना और भोपाल में उत्तरदायी शासन की शुरुआत करना था। इसे अंतरिम सरकार माना गया, जो रियासत के भावी संवैधानिक ढांचे और प्रशासनिक सुधारों पर काम करने वाली थी। सरकार बनने के कुछ ही महीनों में साफ हो गया कि सत्ता का वास्तविक नियंत्रण अब भी नवाब के हाथ में है। मंत्रियों के पास सीमित अधिकार थे और वे बड़े फैसले लेने की स्थिति में नहीं थे। इससे प्रजामंडल के भीतर असंतोष बढ़ने लगा। दूसरा बड़ा विवाद भारत में विलय को लेकर था। प्रजामंडल के कई नेताओं, विशेषकर शाकिर अली खान का आरोप था कि यह सरकार भोपाल को भारत में मिलाने के बजाय एक अलग रियासत बनाए रखने की कोशिश है। उन्होंने इसे जनता के साथ धोखा बताया। उधर मंत्रिमंडल में भी नवाब समर्थक और प्रजामंडल के प्रतिनिधियों के बीच लगातार मतभेद बने रहे। बाहर जनता का आंदोलन तेज होता गया और भीतर सरकार कमजोर पड़ती गई। साम्प्रदायिक तनाव और राजनीतिक अविश्वास ने भी इसकी साख को नुकसान पहुंचाया। आखिरकार लोकप्रिय सरकार जन अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी। प्रजामंडल के मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया और भारत में विलय का आंदोलन निर्णायक चरण में पहुंच गया। क्यों अहम है यह घटना? भोपाल की यह पहली लोकप्रिय सरकार लोकतंत्र की शुरुआत तो थी, लेकिन सत्ता हस्तांतरण की नहीं। जनता को प्रतिनिधित्व मिला, पर अधिकार नहीं। यही वजह रही कि यह प्रयोग एक वर्ष भी नहीं टिक सका। (स्रोत : भोपाल रियासत का गजट नोटिफिकेशन और स्वराज संस्थान संचालनालय, म.प्र. शासन से प्रकाशित पुस्तक ‘भोपाल रियासत का इतिहास: 1722 से 1949 तक’।) (कल पढ़िए नई कहानी)
