सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हम 11 दिन तक हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष शृंखला लेकर आए हैं। हम आपको भोपाल के सबसे बड़े बदलावों, शहर को जीवन देने वाली धरोहरों पर विशेषज्ञों के मंथन, पुराने दस्तावेजों और दुर्लभ अभिलेखों की पड़ताल से निकले अनकहे सच, तथ्यों पर आधारित एक्सक्लूसिव खुलासों और दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह से रूबरू कराएंगे। पढ़िए आज की कहानी… भोपाल की पहचान और सबसे बड़ी जल धरोहर बड़ा तालाब तेजी से उथला हो रहा है। इंटरनेशनल लेक एनवायर्नमेंट कमेटी (आईएलईसी) और 1999 की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में इसकी औसत गहराई 6 मीटर बताई गई है। दैनिक भास्कर और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर), भोपाल के संयुक्त बाथीमेट्रिक सर्वे में औसत गहराई 4.29 मीटर मिली, यानी पुराने रिकॉर्ड के मुकाबले 1.71 मीटर या 28.5% कम। 21 से 29 जुलाई के बीच हुए सर्वे में तालाब का करीब 22% हिस्सा तीन मीटर या उससे कम गहरा मिला। भविष्य में गाद बढ़ने के असर का भी आकलन किया गया। इसके मुताबिक तल में एक मीटर और गाद जमा हुई तो करीब 3.5% हिस्सा सूख सकता है। गाद दो मीटर बढ़ी तो करीब आधा तालाब दो मीटर या उससे कम गहरा रह जाएगा और जल भंडारण क्षमता करीब 45% घट सकती है। सर्वे अलग क्यों: ये आधार बनेगा, पुराने किसी सर्वे में पूरा डेटा नहीं था बड़े तालाब की गहराई 1950, 1963 और 1999 में भी मापी गई थी, लेकिन इन सर्वे की कार्यप्रणाली का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह ठीक-ठीक तुलना संभव नहीं है कि समय के साथ किस हिस्से में कितनी गाद जमा हुई और गहराई में कितना बदलाव आया। इस बार आइसर के प्रोफेसर सुजीत पी.बी. (इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवं कंप्यूटर साइंस विभाग) और डॉ. सोमिल स्वर्णकार (पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग) की टीम ने 63,544 अलग-अलग स्थानों पर गहराई मापकर विस्तृत वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार किया है। यह डेटा आगे तालाब की गहराई और गाद में होने वाले बदलाव को मापने की बेसलाइन बनेगा। भविष्य में इसी पद्धति से दोबारा सर्वे होने पर अलग-अलग हिस्सों के डेटा की तुलना की जा सकेगी। 5 मीटर से गहरा हिस्सा सिर्फ 21% ही बचा सर्वे के सबसे अधिक मापन वीआईपी रोड, बोट क्लब और श्यामला हिल्स के सामने वाले हिस्से में किए गए। यह बड़ा तालाब का अपेक्षाकृत गहरा और स्थायी जल वाला क्षेत्र माना जाता है। चार बड़ी चेतावनियां पहली बार अंदर की तस्वीरें… एक्सपर्ट के साथ 9 मीटर गहराई तक पहुंचा भास्कर बड़ा तालाब बीमार, अंदर 1 फीट दूर भी धुंधला देखिए तस्वीरें… मानसून से पहले दैनिक भास्कर की टीम बड़े तालाब की गहराई तक पहुंची। स्कूबा डाइविंग एक्सपर्ट यासिर हसीब के साथ शीतलदास की बगिया से रेतघाट के बीच 4 जगह गोता लगाया। दोपहर 12:30 से 3 बजे तक टीम ने अंदर की तस्वीरें लीं। अंदर विजिबिलिटी एक फीट से भी कम थी। भास्कर अधिकतम 9 मीटर गहराई तक पहुंचा। यहां सिर्फ सीप व गाद मिली। डाइविंग एक्सपर्ट ने बताया कि सामान्य तौर पर विजिबिलिटी कम रहती है, पर गहराई में अपेक्षाकृत पानी साफ दिखाई देता है। बड़े तालाब में इसके विपरीत स्थिति मिली। यह चिंताजनक है। तालाब बचेगा कैसे? 150+ झीलें बचा चुके लेकमैन ऑफ इंडिया बोले- गाद हटाओ, तालाब बचाओ आनंद मल्लिगावद लेकमैन ऑफ इंडिया पिछले 9 वर्षों में देश की 150 से अधिक झीलों का पुनर्जीवन कर चुके हैं। इनका मॉडल कर्नाटक, यूपी, ओडिशा, मेघालय समेत कई राज्यों में अपनाया जा रहा है। भास्कर टीम के साथ दो दिन तक बड़ा तालाब का मुआयना किया।
तालाब को बचाने के 5 उपाय कैचमेंट में सिल्ट ट्रैप: काेलांस नदी का पानी जहां से बड़े तालाब में आता है, वहां बहाव के हिसाब से छोटे-छोटे सिल्ट ट्रैप बनाए जाएं। पानी पहले इनमें रुकेगा, जिससे मिट्टी और गाद नीचे बैठ जाएगी और साफ पानी तालाब तक पहुंचेगा। इनकी नियमित सफाई पूरे तालाब की सफाई से आसान और कम खर्चीली होगी। तालाब किनारे जाली: बड़े तालाब के किनारे मजबूत जालियां लगाई जाएं। इससे प्लास्टिक, बोतलें, कपड़े और दूसरा तैरता कचरा तालाब में फैलने से पहले ही रुक जाएगा। जमा कचरे को नियमित रूप से निकालने की व्यवस्था भी हो। सिर्फ किनारों से गाद निकालें बड़े तालाब के बीच में पर्याप्त गहराई है और वहां गाद भी कम है। सबसे ज्यादा गाद किनारों पर है। इसलिए पूरे तालाब में खुदाई के बजाय किनारों से 70 से 100 मीटर तक गाद निकाली जाए। किनारों को नीचे से चौड़ा और गहरा बनाया जाए, ताकि वहां ज्यादा पानी जमा हो सके। इससे तालाब की क्षमता 20 से 30% तक बढ़ सकती है। निकली गाद से टापू-तटबंध बनाएं तालाब से निकली लाखों टन गाद को ट्रकों से दूर ले जाना महंगा और समय लेने वाला होगा। इसके बजाय 1999 की जल सीमा के पास इसी गाद से छोटे टापू और तटबंध बनाए जा सकते हैं। इन पर स्थानीय पेड़-पौधे लगाए जाएं। इससे तालाब की सीमा स्पष्ट रहेगी, अतिक्रमण रोकने में मदद मिलेगी और पक्षियों व दूसरे जीवों को नया ठिकाना मिलेगा। गाद बाहर निकालने वाली राजा भोज के समय की टनल फिर शुरू करें राजा भोज के समय अतिरिक्त पानी व गाद बाहर निकालने के लिए एक टनल बनाई गई थी। बाद में इसे बंद कर दिया गया। यह सुरंग बहुत जरूरी है। आधुनिक तकनीक से इस पुराने रास्ते को फिर खोला जा सकता है। मानसून में यह खुली रहे ताकि गाद बाहर निकले। 10 साल के भीतर यह तालाब की गाद को बाहर कर देगा। सरकार के स्तर पर : बड़ा तालाब के लिए बने विशेष मास्टर प्लान बड़ा तालाब के लिए विशेष मास्टर प्लान की जरूरत है। भोपाल सांसद और जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) के अध्यक्ष आलोक शर्मा का कहना है कि कैचमेंट और पानी की गुणवत्ता के लिए स्पष्ट गाइडलाइन हो। तालाब के 50 मीटर दायरे में निर्माण, अतिक्रमण पर रोक लगे। निगरानी के लिए विशेष डिप्टी कलेक्टर नियुक्त हो। जलकुंभी के कारण हालत खतरनाक पानी खराब होने की प्रक्रिया चार चरणों में होती है। पहला- साइनोबैक्टीरिया, जिसमें पानी की पारदर्शिता कम हो जाती है। वह हरा दिखने लगता है। दूसरा- एल्गल ब्लूम्स, जिसमें पानी की सतह पर हरे धब्बे बनने लगते हैं। तीसरा- वाटर लेटस, जिसमें पत्तागोभी जैसे पौधे फैलने लगते हैं। चौथा- जलकुंभी। बड़ा तालाब चौथे स्तर पर है। नगर िनगम जलकुंभी हटा रहा है, लेकिन सफाई रुकते ही झील फिर से जलकुंभी से भर जाएगी। ये पौधे सड़ने पर पानी की घुली हुई ऑक्सीजन खत्म कर देते हैं। जलीय जीव मरने लगते हैं। तालाब खराब होने के 3 बड़े कारण शहर के कई इलाकों में सीवेज बिना ट्रीटमेंट के बड़े तालाब में गिर रहा है। इससे नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व पानी में बढ़ सकते हैं, जो जलकुंभी और शैवाल को तेजी से बढ़ाते हैं। तालाब में सीवेज मिलना दूध में नींबू की एक बूंद पड़ने जैसा है। जब तक सीवेज का तालाब में जाना बंद नहीं होगा, स्थायी समाधान संभव नहीं है।। झील के चारों ओर बने रिंग वाटर चैनल प्लास्टिक और अन्य कचरे से भरे हैं। बारिश होते ही यह पूरा कचरा झील में पहुंच जाता है। कैचमेंट से यूरिया, डीएपी और कीटनाशक पानी के साथ झील में पहुंच रहे हैं। इससे पानी के लाभदायक बैक्टीरिया खत्म हो रहे हैं और पानी की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। ये गाद आती कहां से है? कोलांस नदी, बिशनखेड़ी और लाखापुर गाद के सबसे बड़े हॉटस्पॉट… बड़े तालाब में हर दिन आ रही 65 से 100 डंपर जितनी गाद डॉ. शीतल शर्मा, मेंबर रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट (भोपाल के बड़े तालाब पर खास अध्ययन) बड़ा तालाब के 361 वर्ग किमी कैचमेंट से हर साल करीब 3.6 लाख घनमीटर गाद तालाब में पहुंच रही है। आसान भाषा में समझें तो यह हर दिन 65 से 100 डंपर गाद तालाब में डालने के बराबर है। पिछले करीब 27 साल में लगभग 1 करोड़ घनमीटर गाद जमा हो चुकी है। इतनी गाद बाहर निकालने के लिए करीब 7 से 10 लाख डंपर लगेंगे। सैटेलाइट तस्वीरों के साथ बारिश, कैचमेंट की ढाल, नालों के बहाव और भदभदा आउटलेट के आंकड़ों का अध्ययन करने पर इसका खुलासा होता है। गाद जमा होने से तालाब का तल हर साल 9 से 20 मिमी ऊपर उठ रहा है। तालाब के तल में पहले से 5 से 6 मीटर मोटी गाद की परत है। इसमें ऊपर की करीब 2.5 से 3 मीटर मुलायम और जैविक गाद है, जो लगातार जमा हो रही है। बड़ी चिंता 24 साल में भोपाल की आबादी 45 लाख तक होगी… जीवों के आवास पर खतरा अनुमान है कि 2050 तक भोपाल शहर की आबादी 41 से 45 लाख तक पहुंच सकती है। यानी एक तरफ लाखों नए लोगों की पानी की जरूरत जुड़ेगी, दूसरी तरफ गाद के कारण बड़े तालाब की जलधारण क्षमता लगातार घटती जाएगी। दो मीटर और गाद जमा होने पर करीब 45% जल भंडारण क्षमता खत्म होने का अनुमान है। तालाब जितना उथला होगा, पानी का फैलाव और वाष्पीकरण का असर उतना बढ़ सकता है। उथले हिस्सों में जलीय वनस्पति और खरपतवार तेजी से फैलने, पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने और जलीय जीवों के आवास में बदलाव का जोखिम भी बढ़ेगा।
(कल पढ़िए पार्ट 8 में नई कहानी)
