सच्ची बात, बेधड़क। दैनिक भास्कर भोपाल संस्करण के 68 वर्ष पूरे होने पर हम 11 दिन तक हर सुबह भोपाल की नई कहानी, अनदेखे पहलू की एक विशेष श्रृंखला लेकर आए हैं। हम आपको भोपाल के सबसे बड़े बदलावों, शहर को जीवन देने वाली धरोहरों पर विशेषज्ञों के मंथन, पुराने दस्तावेजों और दुर्लभ अभिलेखों की पड़ताल से निकले अनकहे सच, तथ्यों पर आधारित एक्सक्लूसिव खुलासों और दुर्लभ तस्वीरों के संग्रह से रूबरू कराएंगे। पढ़िए आज की कहानी… ऐसे भोपालियों की कहानी… जो यहीं जन्मे, पले-बढ़े या यहीं से अपनी उड़ान शुरू की। आज दुनियाभर में अपनी पहचान बना चुके हैं। इनकी सफलता के साथ दुनिया के नक्शे पर भोपाल का नाम भी और मजबूत हुआ है। जुनैद काज़ी । राजनीति
भोपाल के कोहेफिजा निवासी जुनैद ने अमेरिका की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। वे न्यू जर्सी के मार्लबोरो टाउनशिप में पहले काउंसिल प्रेसिडेंट बने और बाद में डिप्टी मेयर नियुक्त हुए। जुनैद ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस ओवरसीज’ के अध्यक्ष रह चुके हैं। जब वे अमेरिका की राजनीति में उतरे तो धुर दक्षिणपंथी नेता डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी का दामन थामा। उसी के टिकट पर चुनाव भी जीता। ग्लोबल पोजिशन विनीत बुच। टेक्नोलॉजी कमाल का इनोवेशन डॉ. अमित सूद । स्वास्थ्य डॉ. अमित पूरी दुनिया में हैप्पीनेस डॉक्टर के नाम से मशहूर हैं। मानसिक स्वास्थ्य और तनाव को दूर करने के क्षेत्र में दुनिया के बड़े शोधकर्ता और डॉक्टर हैं। इनका जन्म भोपाल में हुआ था। यहीं गांधी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की। ये दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मेडिकल सेंटर्स अस्पताल ‘मेयो क्लीनिक’ में मेडिसिन के प्रोफेसर रहे हैं। उन्हें मेयो क्लीनिक ने अपने सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा है। ग्लोबल पोजिशन उमंग श्रीधर । सोशल एंटरप्रेन्योर खादी को गांव से दुनिया के फैशन बाजार तक पहुंचाया भोपाल की उमंग श्रीधर ने खादीजी की स्थापना कर पारंपरिक खादी को आधुनिक फैशन से जोड़ा। उनके मॉडल से हजारों ग्रामीण कारीगरों, विशेषकर महिलाओं को नया बाजार और रोजगार मिला। आज उनके उत्पाद विदेशों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने खादी पर डिजिटल प्रिंटिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया ताकि युवा पीढ़ी भी इसे पसंद करे। उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल कई नए फैब्रिक विकसित किए हैं। ग्लोबल क्यों नेमेश सिंह । स्टार्टअप भोपाल से शुरू किया स्टार्टअप, आज 75+ देशों तक पहुंचा भोपाल के ओरिएंटल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (ओआईएसटी) से इंजीनियरिंग करने वाले नेमेश सिंह ने बिना किसी बाहरी निवेश के ‘अपॉइंटी’ की शुरुआत की। यह एक ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और बुकिंग मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर है। डॉक्टर, सैलून, फिटनेस सेंटर, एजुकेशन व कोचिंग सेंटर के अलावा छोटे-बड़े व्यवसाय अपने ग्राहकों की ऑनलाइन बुकिंग व अपॉइंटमेंट इससे मैनेज करते हैं। ग्लोबल क्यों पंकज और नीरज अग्रवाल । एडटेक और सास फ्री डिजिटल शिक्षा वाला देश का सबसे बड़े प्लेटफॉर्म बनाया भोपाल के अग्रवाल बंधुओं पंकज और नीरज ने तकनीक के क्षेत्र में दो सफल स्टार्टअप खड़े किए। पहला- पैबली। यह दुनियाभर में बिजनेस ऑटोमेशन और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन सेवाएं देता है। दूसरा- मैग्नेट ब्रेन्स। यह करोड़ों विद्यार्थियों तक फ्री डिजिटल शिक्षा पहुंचाने वाले देश के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में एक है। इसमें नर्सरी से 12वीं तक के छात्रों के लिए वीडियो हैं। ग्लोबल कैसे डॉ. रघुराम राजन । अर्थशास्त्र दुनिया को 3 साल पहले बता दिया था- मंदी आने वाली है भोपाल में जन्मे डॉ. रघुराम राजन भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके हैं। परिवार तमिलनाडु का है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में मुख्य अर्थशास्त्री और रिसर्च डायरेक्टर का पद संभालने वाले इतिहास के सबसे कम उम्र के व्यक्ति (40 वर्ष) थे। इस पद पर वे 2003 से 2006 तक रहे। 2005 में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बढ़ते जोखिमों की चेतावनी दी। 2008 की आर्थिक मंदी आई। क्यों बड़ा चेहरा ज्योति रात्रे । पर्वतारोहण 55 की उम्र में एवरेस्ट चढ़ने वाली सबसे उम्रदराज भारतीय साल 2024 में भोपाल की ज्योति रात्रे ने 55 वर्ष की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली भारत की सबसे उम्रदराज महिला बनीं। इसके बाद उन्होंने दुनिया की अन्य ऊंची चोटियों पर भी तिरंगा फहराकर अपनी उपलब्धियों का दायरा लगातार बढ़ाया। वे 3 अलग-अलग महाद्वीपों के सबसे ऊंचे ज्वालामुखियों पर चढ़ाई करने वाली भारत की सबसे वरिष्ठ महिला पर्वतारोही हैं। अलग क्या टीना डाबी । प्रशासन पहले प्रयास में यूपीएससी टॉप करने वाली पहली दलित भोपाल में जन्मीं। यहीं ननिहाल भी है ओर 7वीं तक की पढ़ाई काॅर्मल कॉन्वेंट स्कूल से की। पिता के ट्रांसफर के बाद दिल्ली चली गईं। वहां 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) परीक्षा में देश में टॉप किया। ऐसा करने वाली पहली दलित महिला बनीं। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में उन्हें प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल मिला। अभी राजस्थान कैडर की आईएएस हैं। बड़ी सफलता रशीदा बी और चंपा देवी शुक्ला । पर्यावरण न्याय गैस पीड़ितों के लिए लड़ी… पर्यावरण का ‘नोबेल’ जीता भोपाल गैस त्रासदी में अपने पूरे परिवार को खोने वाली रशीदा बी और चंपा देवी शुक्ला ने सालों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष किया। 2004 में उन्हें गोल्डमैन एनवायरमेंटल प्राइज मिला, जिसे पर्यावरण का ‘ग्रीन नोबेल’ कहा जाता है। पुरस्कार में मिली पूरी राशि 1.25 लाख अमेरिकी डॉलर से उन्होंने गैस पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए चिंगारी ट्रस्ट बनाई। खास क्यों? (कल पार्ट 8 में पढ़िए नई कहानी )
